
शिवपुरी :– सफलता सुखद अंत का पर्याय है। सफलता के लिए किया गया संघर्ष ही प्रेरणास्पद है और प्रमाणित सत्य यह है कि सिंध का पानी शिवपुरी लाने के लिए सिंध की भागीरथ (श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया) आज भी संघर्षरत हैं। सिंध के सपने को साकार करने के लिए जो जीवटता श्रीमंत ने दिखाई है वह आने वाले कल में असंभव को संभव बनाने का उदाहरण अन्य संघर्षशीलों के लिए साबित होगी और आज का सनसनीखेज सच यह है कि श्रीमंत की दिन रात की अथक मेहनत और आ रहे परिणामों का श्रेय लेने की अंतहीन होड़ भी लग चुकी है। सिंध के भागीरथ को शेखचिल्ली अंदाज में सिंध से दरकिनार कर श्रेय लेने की हास्यास्पद कवायद को करने वाले हंसी के पात्र बन रहे हैं और ऐसे तत्वों को नसीहत यह है कि शिवपुरी के लाखों लोगों के हित में सिंध की साधना पूर्ति के लिए किए (श्रीमंत द्वारा) जा रहे पवित्र यज्ञ में भ्रम पैदा करने वाले टोने टोटके वेकार हैं। स्वार्थ पूर्ति के लिए भी इनसे बचना चाहिए। जो करता है वह स्वत: दिखता है और सच यह है कि सिंध के लिए श्रीमंत ने वह किया जिसकी उनसे किसी ने उम्मीद (दिन रात एक कर भरी दोपहरी में पसीना-पसीना हुई) नहीं की थी। बहरहाल सिंध की साधना में सकारात्मक और प्रेरणास्पद प्रसंग यह हो सकता है कि जब श्री राम रामसेतु का निर्माण कर रहे थे तब एक गिलहरी सेतु के श्रमदान में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रही थी। गिलहरी की क्षमता उपहास का जब पात्र बनी तो श्री राम ने उत्साह का महत्व सभी को सिखाया। सोचो श्रम न करके अगर गिलहरी रामसेतु के निर्माण की सफलता के लिए श्रीराम द्वारा स्थापित किए गए शिवलिंग पर रोली टीका लगाती, सातियां माड़ती तो श्रीराम इस क्रिया पर क्या प्रतिक्रिया देते? श्रीराम का चरित्र दर्शन बताता है कि वह गिलहरी के भ्रम फैलाने वाले इस टोटके (पूजा का नाटक कर यह भ्रम फैलाना कि सब मेरा प्रताप है) पर सिर्फ मुस्कराकर रह जाते! उनसे इतर लक्ष्मण गिलहरी को नजर भरकर देखते। सिंध की साधना में गिलहरी का सोचो बाला रूप ही सामने आ रहा है। सब जगह सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या पैनल वॉक्स पर सातियां माडऩे से सिंध आ जाएगी! क्या आ रही है? नहीं। सिंध आएगी श्रीमंत के अथक प्रयासों से! सतत संघर्षरत रहने से। सिंध की साधना में पूर्ण समर्पण से जुटे भागीरथ की कर्म पूजा में वेकार के टोने टोटके करने से सभी को बचना चाहिए। यह किसी के लिए शुभ नहीं है। विशेषकर शिवपुरी के लाखों वाशिंदों के लिए। अगर श्रेय चाहिए तो मन और भावना से पवित्र होकर गिलहरी क्षमता में भी श्रम और अन्य सहयोग किया जाकर सिंध के यज्ञ को अपनी-अपनी आहुति देकर सफल संपन्न किया जा सकता है






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