इंदौर। फ्रेंड्स ऑफ एमपी कॉन्क्लेव के मं

च से दूसरे दिन अप्रवासियों ने अपनी सफलता की कहानियां साझा की। किस्से साझा करने वालों में कलाकार से लेकर बिजनेसमैन, उद्यमी और कबाड़ खरीदने का स्टॉर्टअप शुरू करने वाले युवा थे। इन्होंने प्रदेश के विकास में सहभागी बनने की इच्छा भी जाहिर की।
अरब का राजपरिवार भी मुरीद
मंदसौर के छोटे से गांव सोनगिरी में पले-बढ़े वाजिद खान अनोखे कलाकार हैं। वे कील से पोर्ट्रेट बनाते हैं। उन्होंने बताया कि इंदौर ने मुझे पहचान दिलाई। कील से बनाई पहली पेटिंग ही 30 लाख में बिकी। बाद में अरब के राजपरिवार से लेकर ब्रिटेन और तमाम देशों में काम किया। पत्थर से लेकर हर वस्तु से पेटिंग बना सकता हूं। फीफा वर्ल्ड कप के लिए भी आर्ट वर्क का काम मिला है। दुबई में रह रहे 34 साल के वाजिद ने सीएम से कहा कि पैसा खूब कमा लिया। अब मैं बच्चों के लिए मुफ्त काम करना चाहता हूं। मामा मुझे भी अपना भांजा बना लो। सीएम ने वाजिद को भारत भवन में स्थायी जगह देने का वादा किया।
पहला वाई-फाई गांव बनाया
इंजीनियरिंग के बाद तुषार भरतरे ने जाना कि बिना इंटरनेट के दुनिया कैसी हो सकती है। भरतरे ने कहा- मैंने देखा कुछ गांव वाले इंटरनेट के बिना सिर्फ मोबाइल रिचार्ज करवाने 10 किमी जाते हैं। छठी के बच्चे भी वहां एबीसीडी और जोड़-घटाव सीख रहे हैं। हम चार इंजीनियर दोस्तों ने नौकरी छोड़ राजगढ़ के पास पहला वाई-फाई गांव बना दिया।
कबाड़ीवाला डॉट कॉम
भोपाल के अनुराग असाटी ने कहा कि कॉलेज में पढ़ाई के समय कमरे में पड़ी रद्दी बेचने निकला तो कबाड़ी नहीं मिला। इसके बाद कबाड़ीवाला डॉट कॉम बना दिया। दरवाजे पर पहुंचकर कबाड़ खरीदने का कंसेप्ट सफल हुआ। स्वच्छ भारत अभियान में योगदान दे रहा हूं।
प्रदेश के लिए कुछ करना चाहता हूं
टोरंटो (कनाडा) से आए उद्यमी अर्जुन जसूजा ने 1974 में कंपनी की नींव रखी। वे बोले- मैंने असफलता से बहुत कुछ सीखा। आज भी अपने प्रदेश और शहर कटनी को नहीं भूला। अब मप्र के लिए कुछ करना चाहता हूं। सीएम जो आदेश करेंगे, वह करूंगा। अर्जुन ने मंच से गाना गाया तो मुख्यमंत्री ने भी सुर मिलाया।
उनके पास कुछ नहीं
लंदन में विज्ञापन उद्योग की अगुवाई कर रहे मनीष तिवारी ने कहा कि पश्चिम में कुछ नहीं है। वहां हर शहर हर बाजार एक जैसा है। हमारे देश की विविधता ही हमारी खूबी है। हमें उसकी परख नहीं है। वहां जाकर में बोर हुआ। फिर मैंने 2005 में अपनी विज्ञापन एजेंसी शुरू की। विविधता को अपनी ताकत बनाया।
मार्च में प्लांट शुरू
हांगकांग में जन्मे सिद्धार्थ आईलदासानी ने कहा कि मैं अपनी जड़ों की ओर लौटा हूं। उद्योग के जरिए कुछ करने का मौका है। पीथमपुर में दवा का पहला प्लांट डाल लिया है। मार्च तक उत्पादन शुरू होगा। इसके बाद हम दूसरा प्लांट भी शुरू करेंगे।
स्मार्ट-हेल्दी गांव बनाएंगे
बोस्टन (अमेरिका) से आए परमित माकोड़े और एनआरआई पद्मश्री डॉ. सुधीर पारिख ने मुख्यमंत्री को स्टेच्यु ऑफ लिबर्टी की प्रतिकृति दी। उन्होंने कहा इंडो-यूएस हेल्थ इनिशिएटिव के साथ हम शहरों-गांवों में स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करना चाहते हैं। प्रस्ताव दिया गया कि स्मार्ट और हेल्दी विलेज बने। आधुनिक चिकित्सा के साथ परंपरागत चिकित्सा पद्धति के मेल पर हॉर्वर्ड में भी रिसर्च हो रही है। हमें उसका फायदा यहां लेना चाहिए। स्वास्थ्य पर पहला जोर हो तो प्रदेश और देश आगे बढ़ेगा ही






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