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निजी स्कूल बने कमाई का जरिया, कागजों में सिमटी सुविधाएं

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बदरवास
शिक्षा की परम्परा वर्षो पुरानी है और शिक्षा का हमारे देश के विकास में एक
बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और लगातार शिक्षा से ही हमारा देश लगातार
आगे बड़ रहा है आज हमारा देश जिन उचाईयो को छू रहा है उसमें शिक्षा का
प्रवल योगदान है शिक्षा प्रत्येक समाज में समाजिकरण, सामाजिक और आर्थिक
विकास तथा सामाजिक नियंत्रण का सबसे प्रभावशाली माध्यम रहा है पहले की
शिक्षा में और आज की शिक्षा में काफी अंतर आया है पहले के समय में शिक्षा
को व्यापार के रूप में नही धरोहर के रूप में दी जाती थी लेकिन आज के समय
में शिक्षा को एक व्यापार के रूप में पेश किया जा रहा है व्यापम और डी-मेड
जैसे शिक्षा के घोटालो ने शिक्षा को एक अलग मोड़ पर ही लाकर खड़ा कर दिया
है।
यूं तो शिक्षा मांफियाओ ने हर जगह अपने पांव पसार लिए है नगर में
दर्जनो अशासकीय स्कूलो संचालित है यह अधिकारियों कि मिलिभगत है की शिक्षा
माफिया और विभागीय सडय़ंत्र के तहत यह आरटीई एक्ट की अंदेखी कर भ्रष्ट्राचार
रूपी खेल खेला जा रहा है सर्व सुविधाओ और प्रलोभन देकर बच्चो को स्कूलो
में दाखिला तो मिल जाता है पर बताई गई सुविधाओ के आधार पर जमीनी हकीकत नजर
नही आती इस माध्यम से प्रतीत होता है कि किस तरह से प्रलोभन देकर देश का
भविष्य कहे जाने वाले बच्चो के भविष्य को किस तरह से अंधकार में धकेला जा
रहा है जिसे देखने वाला शायद कोई नही निजी स्कूलो की सुविधाए सिर्फ कागजो
तक ही सिमट कर रह गई है अपने व्यक्तिगत फायदे के लिए प्रलोभन देकर नीजी
स्कूल संचालको द्वारा ठगी की जा रही है।

शिक्षा का किया जा रहा व्याव्सायिकरण
बदरवास
नगर में नीजी स्कूल संचालको ने शिक्षा का प्रयोग व्यापार के रूप में नीयम
कानून ताक पर रखकर वर्षो से किया जा रहा है और यह प्रशासन की लापरवाही का
ही नतीजा है कि गली मोहल्लो और दुकानो में स्कूल संचालित हो रहे है कुछ
स्कूलो की मानयता की अगर हम बात करे तो मान्यता संबंधी दस्ताबेजो में तो
सारे फोर्मेट बिल्कुल सही और सुविधायुक्त भरे जाते हे लेकिन अगर मान्यतो
संबंधी बिंदुओ को हम जमीनी स्तर पर ढूंढे तो कई सिर्फ कागजो में ही नजर
आऐंगे और कई तो बिना मान्यता के ही संचालित है जिन्हें किसी का खोप ही नही
है।

आरटीई एक्ट सिर्फ कागजो तक सिमटा-
सरकार द्वारा 26
मार्च 2011 में अशासकीय स्कूलो के लिए बनाए गए नीयमो को लागू किया गया
दुसरी तरफ राईट टू एज्यूकेशन एक्ट 2009 को शिक्षा के व्यापार के लिए
अशासकीय स्कूल संचालको ने मजाक बनाकर रख दिया है नगर में शायद ही एक आध ऐसा
स्कूल हो जो आरटीई एक्ट के अनुरूप संचालित हो नगर मे तो आरटीई एक्ट को
सिर्फ कागजो में सिमेट कर रख दिया है।

भ्रमिक आंकड़ों और दस्तावेजों का खेल
यह
सारा खेल भ्रमिक आंकड़ो और दस्तावेजो में फसा है जब भी विभाग के जिम्मेदार
बड़े अधिकारी मामले में अपनी सक्रियता दिखाते है और मीटिंगो और अन्य जगह
सवाल किये जाते है तो उनके सामने भ्रमिक आंकड़े और दस्तावेज पेशकर वाह वाही
लूट ली जाती है

दुकानो घरो में हो रहा अशासकीय स्कूलो का संचालन
नगर
सहित आस पास शिक्षा का व्यापार दुकानो तथा घरो में स्कूलो के बोर्ड लगाकर
किया जा रहा है कुछ नीजी स्कूल संचालको ने नीयमो को ताक पर रखकर नीयमो की
धज्जियां उड़ा कर रख दी है जो जांच का विषय बने हुए है कुछ नीजी स्कूल
संचालको ने नीयमो को ताक पर रखकर नीयमो की धज्जियां उड़ा कर रख दी है ऐसे
ही कई स्कूल नगर के बार्ड क्रमांक 1 पूर्ब बिजली ऑफिस के सामने रेलवे
स्टेशन रोड पर है जिनकी मान्यता जाच का बिषय है और न ही इनके पास खेल मैदान
जैसी अन्य सुबिधाये भी नही है जो दुकानो में संचालित हो रहे है ऐडमीशन के
समय बच्चो को ,उच्चशिक्षा और सुविधाओ का प्रलोभन देते है यह स्कूल खुद ही
सुविधाओ के मोहताज है जहां सुविधाओ के नाम पर सिर्फ अविभावको के साथ हुआ छल
साफ दिखाई देता है।

क्या कहते है अधिकारी      
यदि इन स्कूलों में अनियमितता है तो मे देखने जाओगा और कारवाही करूँगा।
राजेश कमठान, बीआरसीसी बदरवास

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