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अभ्यारण करैरा के अंदौरा में चल रहा बड़े स्तर पर उत्खनन प्रदेश स्तर के नेताओं की आड़ में हो रहा है उत्खनन, अभ्यारण में नहीं कोई जिम्मेदार अधिकारी

करैरा। प्रतिबंधित क्षेत्र करेरा अभ्यारण में इन दिनों सुनारी अंदौरा सड़ दिहायला में रेत माफियाओ द्वारा करैरा के कुछ नेता प्रदेश स्तर के नेताओ की आढ़ में बड़े स्तर पर रेत का कारोबार कर रहे है, साथ ही जंप नरवर के शासकीय कर्मचारी सत्ता दल के नेताओ ने अपने अपने टेक्टर चला रखे है जिससे प्रतिदिन 10 से 12 टेक्टर ग्राम अंदौरा से करैरा आईटीबीपी केम्पस में आते है । साथ ही ग्राम सिलरा से समोहा लमकना भासडा खुर्द दिहायला लमकना समोहा घाट से रेत का कारोबार खुलेआम बिना कोई रोक टोक के किया जा रहा है । साथ ही जिले के जिम्मेदार अभ्यारण के अधिकारी कर्मचारी कर्मचारी चुप्पी साधे बैठे हुये है । इस अवैध रेत उत्खनन से कभी भी ग्राम अंदौरा में बड़ी घटना भी घटित हो सकती है।

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एसडीओ के सेवानिवृत हो जाने से खाली पड़ी कुर्सी 

करैरा अभ्यारण के अधीक्षक( एसडीओ)रणवीर सिंह यादव का रिटायर्ड मेंट हो जाने से करैरा अभ्यारण के अधीक्षक की कुर्सी खाली पड़ी हुई है । साथ ही गेम रेंजर का प्रभार भी प्रभारी के भरोसे चल है जिनके पास तीन तीन जगहों पर अतिरिक्त चार्ज है जो करैरा अभ्यारण में कभी भी क्षेत्र में हो रहे उत्खनन पर बिल्कुल ध्यान नही दे रहे है । अभ्यारण के प्रभारी गेम रेंजर की भूमिका संदिग्ध दिखाई दे रही है जिसकी बजह से रेत माफिया खुलेआम प्रतिबन्ध क्षेत्र से रेत का कारोबार कर रहे है।

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दो फॉरेस्ट गार्ड के भरोसे करैरा अभ्यारण 

करैरा अभ्यारण में पिछले तीन सालो से पर्याप्त मात्रा में स्टाफ को न भेजना खुलेआम रेत का कारोबार बड़े स्तर से दतिया करैरा के माफियाओ द्वारा होना यह एक बहुत बड़े डीलिंग का प्रमाण है। आखिर क्या बजह है की 202 वर्ग किलो मीटर क्षेत्रफल में फैले अभ्यारण में केवल दो फ़ॉरेस्ट गार्ड जिसमे न स्थाई रेंजर न अधीक्षक न डिप्टी रेंजर का होना बहुत बड़ी लापरवाही को उजागर करता नजर आ रहा है।

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दिहायला अंदौरा सुनारी में हो रहा मृग हिरणों का रात्रि के समय शिकार 

करैरा अभ्यारण में रहने बाले वन्यजीवों का खुलेआम ग्राम दिहायला अंदौरा सुनारी सिलरा में मृग हिरणों का रात्रि के अँधेरे में शिकार किया जा रहा है जिस समय इन ग्रामो में वन्यजीवों का शिकार होता है उस समय न फतेहपुर वीट में कोई रहता है और न ही बहगवा गधाई वनगवा वीट पर कोई नही रहता है जबकि इन चारो वीटो पर आवास भी बने है।

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समाप्ति से पहले ही ग्रामीण स्वयं उजाडऩे लगे अभ्यारण को 

केंद्र राज्य सरकारो के द्वारा करैरा अभ्यारण को समाप्त करने के लिए  ग्वालियर सांसद नरेंद्र सिंह तोमर  भारत सरकार ने विचार करके उसको खत्म करने के लिए पत्र भेजा है जो अभी प्रोसिस में है उसके लिए सुप्रीम कोर्ट से सहमति लेना पड़ती है यह सभी प्रोसिस में है करैरा अभयारण खत्म होगा यह तय है लेकिन करैरा विधानसभा के सत्तादल के नेताओ के द्वारा बिना कोई आदेश के अभ्यारण को उजाड़ा जा रहा है जो सरासर अपराध की श्रेणी में आता है ऐसे लोंगो के खिलाफ विभाग कोई कार्यवाही नही कर रहा है।

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