Press "Enter" to skip to content

बैराड नगर का बडा खुलासा करोडों रूपयों का भ्रष्टागचार उजागर


प्रशाशन ने अभी तक नहीं की कोई कार्यवाही नगरीय   प्रशाशन बना बौना

माखन सिंह धाकड़ (9755629139)

बैराड़। बैराड़ नगर परिषद गठन शासन अधिसूचना 14 नवंबर 2011 के द्वारा की गई थी, किंतु उस समय नगर परिषद में सम्मिलित की गई ग्राम पंचायत बैराड़, कालामढ़, भदेरा, पचीपुरा में निर्वाचित पंचायतें अस्तित्व में थी जिनके द्वारा नगर परिषद गठन के उपरांत माननीय उच्च न्यायालय ग्वालियर में याचिका दायर कर निवेदन किया गया है कि उन्हें अपना कार्यकाल पूरा करने दिया जावे जिसके क्रम    में माननीय न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश  पारित करते हुए पंचायतों को पंचायत काल अवधि तक कार्य करने की अनुमति प्रदान की गई थी गठन के समय ग्राम पंचायतो में मात्र 8 कर्मचारी कार्यरत थे जिस की सूची जिला कार्यालय से प्राप्त की जा सकती है किंतु नगर परिषद के गठन के उपरांत अध्यक्ष पद एवं ष्द्व  तथा ग्राम पंचायत सचिवों के द्वारा अपने भाई भतीजों को पंचायत कर्मी के रूप में प्रस्तुत दर्शाते हुए नगर परिषद को सौंप दिया गया विचारणीय प्रश्न यह है कि माननीय न्यायालय के स्थगन के उपरांत किस अधिकार के द्वारा ग्राम पंचायतों ने   पंचायत कर्मियों की भर्ती की गई  क्या पंचायते   माननीय न्यायालय से भी बड़ी है स्थगन काल के दौरान की गई भर्ती माननीय न्यायालय की अवहेलना की श्रेणी में आती है।
सीएमओ के द्वारा सांठगांठ कर फर्जी तरीके से 
शासन द्वारा बनाई गई दो बर्ष पूर्व नवीन नगर पंचायत में वर्तमान अध्यक्ष श्रीमती सुशीला रावत एवं सीएमओ श्री कमलकिशोर शिवहरे द्वारा नगर पंचायत बैराड़   बड़े भारी पैमाने पर भ्रष्टाचार किया जा कर शासन नियमों एवं निर्देशों की धज्जिया उड़ाई जा रही है नगर पंचायत  बैराड़ मैं नगर पंचायत के गठन के 2 वर्ष पूर्व के अंदर ही पूर्व सीएमओ एवं वर्तमान ष्टरूह्र  और अध्यक्ष द्वारा   ताक पर रखकर मनमाने ढंग से अवैज्ञानिक कार्य किए जा रहे हैं   नगर पंचायत बैराड़   की अध्यक्ष एवं सीएमओ द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार एवं अवैधानिक   कार्यों का अध्यक्ष सीएमओ एवं ग्राम पंचायत सचिवों ने साठगांठ  कर 24 फर्जी कर्मचारियों की भर्ती कर नगर पंचायत को सौंप दी गई है जैस मैं   सभी कर्मचारी पूर्णत: फर्जी होकर अध्यक्ष एवं सीएमओ के रिश्तेदार हैं   जिसके द्वारा  कभी भी पंचायत काल में कोई नौकरी नहीं की गई है   नगर पंचायत के बनने के बाद पंचायत सचिव नगर परिषद अध्यक्ष तथा सीएमओ के द्वारा सांठगांठ कर फर्जी तरीके से ग्राम पंचायतों में कर्मचारियों की भर्ती होना बताया गया  है   जब के सभी कर्मचारी नगर परिषद की घोषणा होने के बाद ग्राम पंचायतों के द्वारा किए गए हैं. जिनमे   अभिषेक दीक्षित पंचायत सचिवों का रिश्तेदार   मोहन सिंह रावत अध्यक्ष का पुत्र पंकज रावत अध्यक्ष का दामाद राजू रावत अध्यक्ष का भतीजा   नीतेश अग्रवाल पूर्व सीएमओ का     निवासी बिजावर जिला छतरपुर राजेंद्र गर्ग सीएमओ का रिश्तेदार शिव सिंह रावत अध्यक्ष का भांजा   प्रभु दयाल रावत अध्यक्ष का भा संजय गुप्ता ग्राम पंचायत सचिव का भाई   युक्त कर्मचारियों के द्वारा कभी भी पंचायत के समय में कोई कार्य नहीं किया   गया  और ना ही उक्त व्यक्तियों को संबंधित     ग्राम पंचायतों के  व्यक्ति जानते हैं संबंधित   कर्मचारियों की योग्यता इनके   दस्तावेजों से प्रमाणित किया  जा सकता  है जिन कर्मचारियों को पंचायत काल में नौकरी पर दर्शाया गया है उस समय   संबंधित कर्मचारी शिक्षा ग्रहण कर रहे थे और ना ही उनकी उम्र   शासकीय सेवा के लाइक थी   अध्यक्ष एवं सीएमओ के द्वारा उन्हें नौकरी दी  गई है जो कि जांच का विषय है नितेश अग्रवाल जो के जिला छतरपुर तहसील बिजावर का रहने वाला है     ग्राम पंचायत  पचीपुरा में कर्मचारी के रूप में कार्य करते हुए ग्राम पंचायत सचिव के द्वारा दिखाया गया है जो कि जांच का विषय है   एक व्यक्ति एक ही समय में दो अलग-अलग स्थानों पर कार्य. कैसे  कर सकता है  संबंधित पंचायत सचिव एवं पूर्व सरपंच का कहना है कि उक्त व्यक्ति उनकी ग्राम पंचायत में कभी भी काम नहीं किया है नियक्ति कैसे की गई हैं उनको जानकारी में नहीं है  नितेश अग्रवाल सीएमओ सतीश अग्रवाल का खास भतीजा  होने के कारण उनके द्वारा कागजों में फर्जी तरीके से उनका नाम जोड़ा गया है  नगर पंचायत के बनने के बाद सीएमओ एवं अध्यक्ष के द्वारा नगर की सफाई व्यवस्था के नाम पर 24   सफाई कर्मचारी  भर्ती कर दिए गए हैं  जिनको भर्ती करते समय नगर पंचायत बैराड़   द्वारा ना तो कोई विज्ञापन निकाला गया और  ना ही आरक्षण नियमों का पालन किया गया  अध्यक्ष एवं सीएमओ के द्वारा   सफाई कर्मचारियों  से भर्ती के नाम पर मोटी रकम वसूल की गई है  नगर पंचायत द्वारा भर्ती किए गए सभी सफाई कर्मचारी पुरुष कर्मचारी रखे गए हैं  जब शासन नियमानुसार 50त्न पद महिलाओं के लिए आरक्षित होनी चाहिए थे वास्तविकता में देखा जाए तो दिन सफाई कर्मचारियों के द्वारा पंचायत के समय के सफाई कार्य किया जा रहा है उन्हें पैसे न देने के कारण नौकरी नहीं दी गई पंचायत काल में सफाई कार्य करने वाले कर्मचारियों के पंचायत काल के सेवा कार्य देखा जाये   नगर पंचायत द्वारा सफाई कार्य एवं पेयजल कार्य हेतु दो ट्रैक्टर खरीदे गए हैं जिन्हें चलाने के   लिए अध्यक्ष द्वारा अपने चहेतो  को बिना किसी विज्ञापन सूचना के एक मोटी रकम लेकर नौकरी पर रखा गया है   एक कर्मचारी अध्यक्ष का रिश्तेदार है  जबकि दूसरे  कर्मचारी   से लाखों रुपए  लेकर रखा गया है   जब उक्त दोनों कर्मचारी उक्त पद के लिए निर्धारित योग्यता  नहीं रह सकते हैं साथ ही शासन द्वारा नगर पालिका एवं नगर पंचायतों में होने वाली भर्ती शासन नियमानुसार व्यापम के माध्यम से कराया जाना है सीएमओ एवं अध्यक्ष  के द्वारा कंप्यूटर चलाने के लिए बिना भर्ती विज्ञापन के दो व्यक्ति प्रखर एवं राजेंद्र को मोटी रकम लेकर रख लिया गया है नगर पंचायत बैराड़ में होने वाली टेन्डर   प्रक्रिया में भी अध्यक्ष एवं सीएमओ के द्वारा व्यक्तिगत रूप से रुचि लेकर नगर पंचायत से निकलने वाले सभी टेण्डरो  को स्वयं   अध्यक्ष अध्यक्ष  पति  दौलत सिंह रावत पुत्र सुनील रावत एवं भाई के द्वारा  आँन लाइन  निकलने  वाले टेंडरों की बिड संबंधित ठेकेदारों को जमा नहीं करने दी जाती है   कार्यालय से वापस बाहर कर दिया जाता है यदि कोई ठेकेदार इसका विरोध करता है तो अध्यक्ष एवं उसके परिवार जनों द्वारा ठेकेदार को मारने की धमकी दी जाती है उक्त बात की पुष्टि बैराड़ नगर पंचायत से निकलने वाले टेण्डरो से की जा सकती है ठेकेदार टेण्डर तो खरीदते हैं लेकिन जमा नहीं होने देते है जिसमें अध्यक्ष के चहेते   अपनी मनपसंद भरे टेंडर में भरकर शासन एवं संस्था को आर्थिक क्षति पहुंचा रहे हैं  साथ ही ठेकेदारों को भी   आर्थिक क्षति  हो रही है  इसका सबसे बड़ा उदाहरण है नगर पंचायत बैराड़ द्वारा   कार्यालय भवन निर्माण एवं बैराड़ रोड सी सी   निर्माण के टेंडरों से इस बात की पुष्टि की जा सकती है कि जिसमें लगभग 10  ठेकेदारों द्वारा टेंडर हेतु किए गए हैं लेकिन विड केवल एक-एक ठेकेदार की ही जमा की गई है  इसी प्रकार नगर पंचायत द्वारा जल व्यवस्था हेतु निकाले गए नलकूप खनन के टेंडरों में अध्यक्ष पति दौलत सिंह रावत एवं उसके पुत्र सुनील रावत द्वारा सभी ठेकेदारों को बिड जमा करने से रोक दिया गया जब ठेकेदारों द्वारा इस बात का विरोध किया गया तो   के लोग लड़ाई झगड़े पर  उतारू हो.जाते हैं  नगर  पंचायत बैराड़   मैं कहने को तो महिला श्रीमती सुशीला रावत अध्यक्ष है नगर की प्रथम नागरिक हैं लेकिन वास्तविकता में देखा जाए तो नगर पंचायत के बनने से लेकर आज दिनांक तक  शायद ही किसी ने अध्यक्ष को अपने कार्यालय में कार्य करते हुए देखा गया हो  सारा काम स्वयं अध्यक्ष पति दोलत सिंह रावत एवं उसके पुत्र सुनील रावत के द्वारा किया जाता है इसके द्वारा  नगर पंचायत के कार्यों में दखल दिया जाता है नगर पंचायत बैराड़ की सभी   शासकीय फायलो पर  श्रीमती सुशीला रावत के द्वारा हस्ताक्षर न किए  जाकर उनके पति दोलत सिंह रावत ही फाईलों   हस्ताक्षर कर दिए जाते हैं इसकी पुष्टि  नगर पंचायत की फाइलों को देखकर की जा सकती है क्योंकि श्रीमती सुशीला रावत को मात्र  सुशीला लिखना आता है   किसी भी फायल को पढ़ नहीं सकती है  जव कि  फायलों पर अध्यक्ष के पति द्वारा बकायदा टीप लगाकर सुशीला रावत के फर्जी हस्ताक्षर किए जाते हैं  नगर पंचायत के पति का यह कृत्य घोर अपराध की श्रेणी में आकर.    शासन के      महिला.      सशक्तिकरण  और लोकतंत्र जैसी पवित्र व्यवस्था को कलंकित करता है  नगर पंचायत बैराड़ द्वारा वर्तमान में विभिन्न निर्माण कार्य कराए जा रहे जिसकी दरें ई-टेण्डरिंग  के  माध्यम से बुलाई गई है जिसमें सी सी रोड निर्माण कार्य की दरें 30त्न तक  कम प्राप्त हुई हैं जबकि अध्यक्ष द्वारा पूल बनाकर   किए गए टेंडरों की दरें विभागीय दर पत्रक से अधिक है   जिससे स्पष्ट होता है कि नगर पंचायत अध्यक्ष नगर पंचायत को अपनी  समझकर शासन  एवं जनता के पैसों का दुरुपयोग किया जा रहा है इसी प्रकार कार्यालय भवन निर्माण की निविदा में एक ठेकेदार द्वारा 26 प्रतिशत कम दर भरी गई थी  अध्यक्ष द्वारा किसी भी  ठेकेदार की बिड जमा.   न की जाकर केवल अपने चहेते ठेकेदार की बिड जमा कराई गई इसकी दरें बहुत अधिक है  मुख्य नगर पालिका अधिकारी एवं  अध्यक्ष नगर पंचायत बैराड़ के   दोबारा अधिकांश टेंडरों को जानबूझ कर दो लाख रुपए से कम का तैयार कराया जाता है ताकि उसे ऑन लाइन न कराना पड़े  इसी का जीता जागता उदाहरण है निर्माण कार्य में लगने वाली सामग्री एवं मुरम बोल्र्डर आदि का वार्षिक टेन्डर   मात्र 2 लाख से   कम  का रखा जाता है  ताकि उसे ऑनलाइन न किया जा सके  उक्त टेंडर को अध्यक्ष द्वारा अपने चहेतो को  दिया.   जाकर लगभग 3से 4 लाख रुपये का सामान भी   खरीद लिया गया है जब उक्त  टेंडर पूरे द्वितीय वर्ष के लिए मात्र 2लाख रुपए का था फिर तीन से चार लाख रुपए का सामान कैसे खरीद लिया गया समझ से परे जाच  का.    विषय   एवं स्पष्ट  रुप से सााशन को गंभीर रुप से अधिक छती  पहुंचाना दिखाई देता है इसी प्रकार हैडपंप सामग्री एवंअंन्य  कई टेंडर फर्जी रुप से लिए गए हैं ! नगर पंचायत में हो रहे निर्माण कार्यों में ठेकेदार दवारा एस्टीेमेट के हिसाब से कार्य ना किया जाकर अध्य क्ष के कहने पर मनमाने  ढंग से घटिया स्तेर के सामान का उपयोग किया जा रहा है जिससे निर्माण कार्य कराये जाने का कोई औचित्यय नहीं हैं सत्याता के लिये वार्ड क्र 2 3 4 एवं 8 में 9 में डाली गई सीसी निमार्ण कार्य की जॉच मौके पर की जा सकती हैं नगर पंचायत अध्य क्ष द्वारा शासकीय एवं संस्थास के संसाधनों का उपयोग अपने निजी घरेलू कार्यों में किया जा रहा है। इसके संबंध में अभी कुछ दिन पूर्व ही दैनिक समाचार पत्र राजएक्ससप्रेस ग्वासलियर एवं शिवपुरी समाचार डॉट कॉम पर ट्रेक्टरर से अध्यसक्ष पुत्र मोहन सिंह रावत जो कि नगर पंचायत में कथित रुप से कर्मचारी है के द्वारा स्वंंय के ख्?ोत की जुताई करते हुये समाचार प्रकाशित किया गया। किन्तू् कोई कार्यवाही नहीं हुई इसी प्रकार फर्नीचर भी अध्यकक्ष के घर पर संस्था् के पैसे से खरीद कर भेजाजाता है। नगर पंचायत द्वारा टयूबैल खनन बोरों की मोटरें खरीदी गई थी उन मोटरों को अध्य क्ष द्वारा स्वखयं के बोरों में डलवां दी गई है और खराब मोटरों को नगर के बोरों में डालकर पुन: खरीद कर ली गई इसी प्रकार भदेरा के बोरों से निकली सैकडों फुट 3इंच की पाईप लाईन अध्यीक्ष द्वारा बेंच दी गई है जिससे में मुख्यल नगर पालिका अधिकारी बराबर का हिस्से?दार है। नगर पंचायत बैराड के द्वारा बस स्टैकण्डब पर बनबायी गयी दुकाने जिसकी बोलीनीलामी की कार्यवाही दिखावे मात्र को की गयी है 23 दुकानों में से मात्र 6 दुकानों की सही बोली लगाई गई हैं । बाकी दुकानों पर अध्यंक्ष् के द्वारा किसी को भी बोली नहीं लगाने दी गई मात्र अपने चहेतोंको  ही बहुत कम बोली पर ही दुकान बांट दी गई हैं। जबकि नगर पंचायत की एक दुकान 15 लाख 52 हजार रूपये एवं 9 लाख रूपये तक बिकी है । लेकिन अध्याक्ष के द्वारा जो दुकानें ली गई है उनकी बोली मात्र 2 लाख 70 हजार रूपये में हैं । अध्यरक्ष द्वारा प्रत्ये क दुकान से 2 लाख रूपये वसूल किये हैं। अध्यंक्ष का यह कार्य स्प ष्टा दिखाता है क?ि किस प्रकार नगर पंचायत  बैराड को आर्थिक रूप से कमजोर किया जा कर स्व यं का घर भरा जा रहाक है । नगर परिषद द्वारा की गई दुकान निलामी की कार्यवाही भी संदिग्धघ होकर जॉच का विषय है। नगर परिषद बैराड किये जा रहे भृष्टाभचार एवं अनिमियताओं के संबंध में आय दिन समाचार पत्रों में भी शिकायतें एवं अनिमियताऐं प्राकाशित की जा रही है किन्तूे प्रशासन पर इस पर कोई ध्याीन नहीं दिया जा रहा हैं। नगर परिषद के द्वारा नागरिकों के गरीबी रेखा के राशनकार्ड बनाये जा रहे है। जिसमें परिषद के कर्मचारियों द्वारा राशनकार्ड बनबाने के एवज में प्रत्येंक व्यमकियों से 2000 से 5000 हजार रुपये लिये जा रहे है कर्मचारियों से पूछने पर बताया जाता है हमको अध्य0क्ष0 एवं सीएमओं एसडीएम को पैसा देना पडता है। तब वो राशनकार्ड पर हस्ता्क्षर करते है नगर परिषद के जनप्रतिनिधियों एवं कर्मचारियों नें अपने स्वषयं के राशनकार्ड बनवा रखे जबकि पात्र व्यहकियों के राशनकार्ड पैसे न देने के कारण निरस्ते कर दिये जाते है। वर्तमान में यदि वरिष्टय अधिकारियों द्वारा निस्पेक्ष जॉच कराई जाए तो बैराड में 70 से 90 प्रतिशत अपात्र लोगों के फर्जी बीपीएल राशनकार्ड बने हुये है। जिनकी जॉच होना आवश्येक है ताकि पात्र लोगों को लाभ मिल सके। परिषद के बनने के बाद गरीबी रेखा की सूची की जॉच की जाना आवश्य क है। फर्जी लोगों के नाम हटा जाकर पात्र लोगों के नाम बीपीएल सूची में जोडे जा सके। वर्तमान में वार्ड क्र 8 के पाषर्द एवं परिषद के कई कर्मचारियों के नाम पर बीपीएल राशनकार्ड बने हुये है। बैराड परिषद द्वारा शासन की ऋण योजना में भी सी एम ओ एवं अध्य।क्ष के द्वारा बैंकों को केस भेजे जाने के एबज में 5000 से 10000 रूपये तक लिये जाते हैं तब लोन स्वीेक्रत कर बैंक में भेजा जाता है।
अध्य क्ष एवं उनके पति देवर पुत्र के द्वारा नगर में खाली पडी शासकीय जमीन पर अंधदुंध तरीके से अतिक्रमण किया जा रहा है इनके द्वारा जगह जगह शासकीय जमीनों को रोककर कुछ समय बाद मुह मांगे दामों पर जमीन को बेंच दिया जाता है। इनके द्वारा किये जा रहे इस काम को किसी तहसीलदार पुलिस के द्वारा नहीं रोका जा रहा है साथ ही खरीदने वाले व्यककियों को भी इनके द्वारा लिखित दस्ताकवेज नहीं दिये जाते है इसी प्रकार भ्?ावन निर्माण स्वी कृति के प्रकरणों में सीएमओं अध्यतक्ष द्वारा 10000 से 20000 रुपये लेकर मौखिक स्वीतकृति दी जाती है। नगर परिषद बैराड में सीएमओं एवं अध्य क्ष पति के द्वारा मिलकर अपने चहते कर्मचारियों को शासन से स्वीमकृति वेतन से अधिक का भुगतान किया जा रहा है जो कि शासन नियमों के विरुध होकर निकाय को आर्थिक क्षति हो रही है। कार्यालय के कर्मचारी प्रखर सिंघल एव राजेन्द्रआ गर्ग को सीएमओं एवं अध्य्क्ष के द्वारा 10000 रुपये प्रति माह भुगतान किया जा रहा है। शासन द्वारा कम्यूालय टर ऑपरेटर का मान देय 5000 रुपये मासिक निर्धारित किया गया सीएमओं द्वारा राजेन्द्र  गर्ग प्रखर सिंघल को 10000 मासिक मानदेय दिया जाना समझ से परे होकर शासन को आर्थिक क्षति पहूचाना है नगर परिष्?ाद बैराड में व्यारपक पैमाने पर हो रहे भृष्ट्चार एवं अनिमियत कार्यो को रोक कर निष्परक्ष रूप से जॉच कराई जाए। दोषी अध्य क्अन सीएमओं एवं कर्मचारियों के विरुध कार्यवाही की जाए। नगर परिष्?ाद के बनने का सही फायदा बैराड की आम जनता को मिल सके नगर परिषद बैराड के भृटाचार एवं अनिमियत कार्यो की निष्पतक्ष रूप से की जाकर दोषियों को दण्डित किया जाए। तभी नगर विकास हो सकता है।
सीएमओं कमलकिशोर शिवहरे का कहना है- नगर परिषद बैराड का नवीन गठन 7 जनवरी 2015 को हुआ है गठन के दिनांक से 2 कम्यूटर ऑपरेटर संविदा दर पर 2 भवन सर्वे कार्य अंशकालीन श्रमिक को
24 सफाई कार्य अंशकालीन श्रमक 2 सफाई कचरा वाहन चलाने 1 ट्रेक्टरर चालक एवं टैंकर परिवहन हेतू 1 सफाई श्रमिक मुक्ति धाम की सफाई एवं पेडों में पानी डालने के लिये आवश्यीक सेवाये होने से श्रमिकों को संविदा दर पर रखा गया है जो कि अध्येक्ष का नजदीकी रिश्ते दार दामाद का बडा भाई है जिसको संविदा दर पर अध्येक्ष के आदेश से रखा गया है जिनकी जानकारी संयुक्त संचालक महोदय नगरीय प्रशासन एवं विकास ग्वारलियर को विधानसभा प्रश्नर क्रमाक 1914 के उत्तदर मे भेजी गई है।

More from Fast SamacharMore posts in Fast Samachar »

Be First to Comment

Leave a Reply

error: Content is protected !!