
करैरा।
जिले में अभी तक हुई अल्पवर्षा के चलते नदी-नाले सूखे पड़े हैं। बरसात न
होने से किनारों पर बहकर आने वाली रेत भी इस बार नहीं आ सकी। यही वजह है कि
रेत माफिया अब नदियों के किनारों की मिट्टी को खोदकर उसमें से धोकर
डुप्लीकेट रेत बनाकर बाजार में बेच रहे हैं। रेत न मिलने की वजह से कोपरा
का इस्तेमाल न केवल ग्रामीण क्षेत्रों बल्कि शिवपुरी में चल रहे बड़े
निर्माणों में भी इसका उपयोग हो रहा है। यह हालात तब हैं, जबकि रेत के काले
कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए अभी हाल ही में कलेक्टर तरुण राठी ने ईटीपी
(इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसिट पास) व्यवस्था लागू की है। बावजूद इसके रेत का
अवैध उत्खनन व परिवहन रुकने का नाम नहीं ले रहा।
जिले में अभी तक हुई अल्पवर्षा के चलते नदी-नाले सूखे पड़े हैं। बरसात न
होने से किनारों पर बहकर आने वाली रेत भी इस बार नहीं आ सकी। यही वजह है कि
रेत माफिया अब नदियों के किनारों की मिट्टी को खोदकर उसमें से धोकर
डुप्लीकेट रेत बनाकर बाजार में बेच रहे हैं। रेत न मिलने की वजह से कोपरा
का इस्तेमाल न केवल ग्रामीण क्षेत्रों बल्कि शिवपुरी में चल रहे बड़े
निर्माणों में भी इसका उपयोग हो रहा है। यह हालात तब हैं, जबकि रेत के काले
कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए अभी हाल ही में कलेक्टर तरुण राठी ने ईटीपी
(इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसिट पास) व्यवस्था लागू की है। बावजूद इसके रेत का
अवैध उत्खनन व परिवहन रुकने का नाम नहीं ले रहा।
करैरा की महुअर
नदी तिसाटा से इन दिनों नदी के किनारे से मिट्टीयुक्त रेत (कोपरा) का अवैध
उत्खनन किया जा रहा है, जबकि वो शासकीय भूमि है। बताते हैं कि रेत माफिया
नदी के किनारे वाली जमीन को अपने नाम करवा लेते हैं और फिर नदी के किनारों
की मिट्टी में मौजूद रेत को जेसीबी से खोदकर हर रोज रात में 10 डंपर भरे जा
रहे हैं। किनारों को खोदे जाने से नदी का स्वरूप न केवल बिगड़ रहा है,
बल्कि जब भी उसमें बारिश आएगी तो उसका पानी आगे जाने की बजाए, आसपास के
खेतों में भरकर फसलों को नुकसान पहुंचाएगा। यह तो महज उदाहरण है, बल्कि
करैरा क्षेत्र के अधिकांश नदी-नालों में इसी तरह अवैध उत्खनन करके उनके
अस्तित्व को खत्म किया जा रहा है। यह पूरा काम वैसे तो सेटिंग से चल रहा है
और यदि वाहन पकड़ा जाता है तो उसके लिए सिरसोना की रायल्टी रसीद थमा दी
जाती है। जबकि वास्तविकता यह है कि सिरसोना में जिस जगह की रेत खदान की लीज
दी गई, वहां पर रेत बची ही नहीं। ऐसे में रेत का अवैध कारोबार जल सरंचनाओं
को तहस-नहस करके किया जा रहा है।
नदी तिसाटा से इन दिनों नदी के किनारे से मिट्टीयुक्त रेत (कोपरा) का अवैध
उत्खनन किया जा रहा है, जबकि वो शासकीय भूमि है। बताते हैं कि रेत माफिया
नदी के किनारे वाली जमीन को अपने नाम करवा लेते हैं और फिर नदी के किनारों
की मिट्टी में मौजूद रेत को जेसीबी से खोदकर हर रोज रात में 10 डंपर भरे जा
रहे हैं। किनारों को खोदे जाने से नदी का स्वरूप न केवल बिगड़ रहा है,
बल्कि जब भी उसमें बारिश आएगी तो उसका पानी आगे जाने की बजाए, आसपास के
खेतों में भरकर फसलों को नुकसान पहुंचाएगा। यह तो महज उदाहरण है, बल्कि
करैरा क्षेत्र के अधिकांश नदी-नालों में इसी तरह अवैध उत्खनन करके उनके
अस्तित्व को खत्म किया जा रहा है। यह पूरा काम वैसे तो सेटिंग से चल रहा है
और यदि वाहन पकड़ा जाता है तो उसके लिए सिरसोना की रायल्टी रसीद थमा दी
जाती है। जबकि वास्तविकता यह है कि सिरसोना में जिस जगह की रेत खदान की लीज
दी गई, वहां पर रेत बची ही नहीं। ऐसे में रेत का अवैध कारोबार जल सरंचनाओं
को तहस-नहस करके किया जा रहा है।
फोरलेन किनारे धुल रही रेत, जिम्मेदार मौन
नदी-नालों
के किनारों को खोदकर निकाली जा रही मिट्टीयुक्त रेत से भरे डंपरों को धोने
का काम किसी गुप्त जगह पर नहीं किया जा रहा, बल्कि सुरवाया बैल्ट में
फोरलेन किनारे ही रेत की धुलाई बेखौफ जारी है। इस रास्ते से तो पुलिस व
प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी यदा-कदा रात में भी निकलते हैं। बावजूद इसके
यह धुलाईसेंटर बदस्तूर जारी हैं।
के किनारों को खोदकर निकाली जा रही मिट्टीयुक्त रेत से भरे डंपरों को धोने
का काम किसी गुप्त जगह पर नहीं किया जा रहा, बल्कि सुरवाया बैल्ट में
फोरलेन किनारे ही रेत की धुलाई बेखौफ जारी है। इस रास्ते से तो पुलिस व
प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी यदा-कदा रात में भी निकलते हैं। बावजूद इसके
यह धुलाईसेंटर बदस्तूर जारी हैं।
जनप्रतिनिधि भी लगे अवैध उत्खनन में
करैरा
के अधिकांश जनप्रतिनिधि, फिर चाहे वे सत्ता के हों या विपक्ष के, रेत के
अवैध कारोबार में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संलिप्त हैं। अमोलपठा
थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत उकायला के सरपंच मदन गुर्जर की जेसीबी को
शनिवार की सुबह अमोलपठा चौकी प्रभारी संदीप परते ने जब्त कर ली। चौकी
प्रभारी का कहना हैकि आज सुबह लगभग 8 बजे कुंडलपुर के नाले के किनारे से
जेसीबी रेत का अवैध उत्खनन कर रही थी। जब पुलिस वहां पहुंची तो एक ट्रैक्टर
भरकर जा चुका था, जबकि जेसीबी को लेकर ड्राइवर वहां से भागा और आदिवासी
बस्ती में ले जाकर खड़ी कर दी। जहां से उसे जब्त करके चौकी में खड़ा कर
दिया। वहीं सरपंच मदन गुर्जर का कहना हैकि मेरी जेसीबी उमा आदिवासी के घर
के बाहर खड़ी थी, जहां से चौकी प्रभारी उसे पकड़ लाए। सरपंच ने चौकी
प्रभारी पर 20 हजार रुपए की रिश्वत मांगे जाने का आरोप भी लगाया है।
के अधिकांश जनप्रतिनिधि, फिर चाहे वे सत्ता के हों या विपक्ष के, रेत के
अवैध कारोबार में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संलिप्त हैं। अमोलपठा
थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत उकायला के सरपंच मदन गुर्जर की जेसीबी को
शनिवार की सुबह अमोलपठा चौकी प्रभारी संदीप परते ने जब्त कर ली। चौकी
प्रभारी का कहना हैकि आज सुबह लगभग 8 बजे कुंडलपुर के नाले के किनारे से
जेसीबी रेत का अवैध उत्खनन कर रही थी। जब पुलिस वहां पहुंची तो एक ट्रैक्टर
भरकर जा चुका था, जबकि जेसीबी को लेकर ड्राइवर वहां से भागा और आदिवासी
बस्ती में ले जाकर खड़ी कर दी। जहां से उसे जब्त करके चौकी में खड़ा कर
दिया। वहीं सरपंच मदन गुर्जर का कहना हैकि मेरी जेसीबी उमा आदिवासी के घर
के बाहर खड़ी थी, जहां से चौकी प्रभारी उसे पकड़ लाए। सरपंच ने चौकी
प्रभारी पर 20 हजार रुपए की रिश्वत मांगे जाने का आरोप भी लगाया है।
क्या कहते हैं अधिकारी
-इस
तरह से नदी के किनारों को खोदा जाना बिल्कुल गलत है। हमने पूर्व में भी
वहां पर कार्रवाईकी है। जो भी यह अवैध उत्खनन कर रहे हैं, उनके खिलाफ
कार्रवाईकी जाएगी।
तरह से नदी के किनारों को खोदा जाना बिल्कुल गलत है। हमने पूर्व में भी
वहां पर कार्रवाईकी है। जो भी यह अवैध उत्खनन कर रहे हैं, उनके खिलाफ
कार्रवाईकी जाएगी।
सीबी प्रसाद, एसडीएम करैरा
-उकायला
के सरपंच की जेसीबी को पकड़ा गया है। जिस नाले में वो अवैध उत्खनन कर रहा
था, वहां से पूर्व में एक और रेत माफिया भी उत्खनन कर रहा था। सरपंच से
जुड़े लोगों के वाहन पूर्व में भी पकड़े गए। पंचायत में काम करवाने के लिए
रेत की वैध खदानों से लाएं।
के सरपंच की जेसीबी को पकड़ा गया है। जिस नाले में वो अवैध उत्खनन कर रहा
था, वहां से पूर्व में एक और रेत माफिया भी उत्खनन कर रहा था। सरपंच से
जुड़े लोगों के वाहन पूर्व में भी पकड़े गए। पंचायत में काम करवाने के लिए
रेत की वैध खदानों से लाएं।
अनुराग सुजानिया, एसडीओपी करैरा
-इस
तरह से नदियों का अस्तित्व खत्म नहीं होने देंगे। हम जल्द ही वहां मायनिंग
टीम को भेजेंगे और जल संरचनाओं को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ
कार्रवाई की जाएगी।
तरह से नदियों का अस्तित्व खत्म नहीं होने देंगे। हम जल्द ही वहां मायनिंग
टीम को भेजेंगे और जल संरचनाओं को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ
कार्रवाई की जाएगी।
तरुण राठी, कलेक्टर शिवपुरी






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