पिछोर। गाय देवमयी, वेदमयी है गाय का दूध सर्वोत्तम है जो मनुष्य गाय के दूध का सेवन करता है वह प्रत्येक प्रतिस्पर्धा में सर्वश्रेष्ठ रहेगा हमेशा आगे और आगे बढ़ेगा यह उद्बोधन गौ भक्त गणेशानंद महाराज ने छत्रसाल स्टेडियम में चल रही गौ कथा के तीसरे दिन हजारों श्रोताओं से कहीं महाराज ने कहा कि भगवान कृष्ण का पहला आंदोलन दूध को लेकर किया और पूतना का वध करके गौ पालक बनकर धर्म की स्थापना की गणेशा नंद ने कहा कि गाय का बछड़ा दूध पीने के बाद दौड़ता है छलांग लगाता है जबकि भैंस का बछड़ा दूध पीने के बाद डला रहता है यह क्या है? जहां एक और सात्विकता को बढ़ाने वाला गाय का दूध है वही भैंस का दूध आलस को बढ़ाता है एक विशेष तत्वों का उल्लेख करते हुए स्वामी जी ने बताया कि गाय का बछड़ा हजारों गायों में भी अपनी मां को पहचान लेता है वही भैंस का बच्चा दस भैंसों में से भी अपनी मां को नहीं पहचान पाता यह सब प्रत्यक्ष प्रमाण है वही भैंस की कीचड़ गंदगी की प्रकृति को सब जानते हैं और गाय की स्वच्छता सुंदरता पवित्रता को जन-जन जानता है तीसरे दिवस की कथा में महाराज का स्वागत एवं गौ आरती बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डॉ राघवेंद्र शर्मा, सुनील लोधी, हरि गोपाल शर्मा, धनीराम शास्त्री, रमेश चौधरी, कौशल शर्मा, बृजेश प्रजापति, निरन सिंह लोधी, अतर सिंह लोधी आदि ने की।






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