ग्वालियर ! जीवाजी यूनिवर्सिटी प्रशासन अपनी ही अध्ययनशालाओं के पीजी के डेढ़ हजारसे ज्यादा छात्रों का रिजल्ट नहीं दे सका। जेयू की इस लापरवाही के चलते
छात्र अन्य राज्यों में पीएचडी, एमफिल सहित अन्य पाठ्यक्रमों से वंचित हो
रहे हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं में भी शामिल नहीं हो पा रहे हैं। जेयू की
अध्ययनशालाओं में कश्मीर, नागालैंड,मिजोरम, दिल्ली, उप्र सहित अन्य राज्यों
के छात्रों की संख्या भी अधिक है। परीक्षा देकर वे घर चले गए हैं और एक
माह से रिजल्ट की ओर टकटकी लगाए हैं।
सीबीसीएस पैटर्न
जेयू की
अध्ययनशालाओं में एमएससी, एमजेएमसी, एमलिब, भारतीय प्राचीन इतिहास,
समाजशास्त्र, लोक प्रशासन, एमबीए सहित अन्य 84 स्ववित्तीय व परंपरागत
पाठ्यक्रम संचालित हैं। जेयू ने पिछले सत्र से पीजी के इन पाठ्यक्रमों में
च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम(सीबीसीएस) लागू किया है। इन पाठ्यक्रमों में
डेढ़ हजार से ज्यादा छात्र अध्ययनरत हैं।
जून की परीक्षा जुलाई में
जुलाई
से नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो जाता है। इसलिए यूजी और पीजी फाइनल सेमेस्टर
की परीक्षा मई-जून में हो जाना चाहिए, जिससे जून के अंत तक रिजल्ट आने पर
छात्र अगली पाठ्यक्रमों में प्रवेश ले सकें। जेयू में दो वर्षीय सीबीसीए
पैटर्न के पीजी पाठ्यक्रम की फाइनल सेमेस्टर की परीक्षा जुलाई में हो सकीं।
रिजल्ट जुलाई के अंत अथवा अगस्त के पहले सप्ताह तक आ जाना चाहिए।
एमफिल, पीएचडी व प्रतियोगी परीक्षा से वंचित
पीजी
की डिग्री लेने के बाद कई छात्र पीएचडी या एमफिल जैसे शोध पाठ्यक्रमों में
प्रवेश लेते हैं और इससे ज्यादा छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में आवेदन करते
हैं। लेकिन अब तक रिजल्ट नहीं आने से छात्र परेशान हैं। दूसरे राज्यों के
छात्रों की चिंता अधिक है। उन्होंने अभी किराए के मकान खाली नहीं किए हैं।
वे घर तो लौट गए हैं, लेकिन रिजल्ट के लिए बार-बार अधिकारियों को कॉल कर
रहे हैं। परीक्षा व रिजल्ट की बिगड़ी व्यवस्था के कारण अधिकारी भी स्पष्ट
जवाब नहीं दे पा रहे हैं।
परीक्षा स्कीम में देरी को बजह बताया
पेपर
का पैटर्न बदलने पर परीक्षा स्कीम में बदलाव करना होता है। कितने और किस
प्रकार के सवाल कितने अंक के रहेंगे, प्रैक्टिकल, वाइवा के अंक और पासिंग
मार्क क्या रहेंगे, यह स्कीम संबंधित विषय की बोर्ड ऑफ स्टडीज को करना होता
है। जेयू अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा स्कीम देरी से मिलने के कारण
रिजल्ट में देरी हो रही है।
28 तक अंक नहीं आए तो लगेगा 25 हजार जुर्माना
अंचल
के कई कॉलेजों ने स्नातक(यूजी) पांचवे सेमेस्टर के कई छात्रों के
प्रैक्टिकल, वाइवा के अंक जेयू नहीं भेजे हैं। ऐसे कॉलेजों को एक अवसर देते
हुए जेयू ने निर्देश दिए हैं कि वे पहले से अधिकृत परीक्षक से ऐसे छात्रों
की प्रैक्टिकल, वाइवा परीक्षा कराएं और 28 अगस्त तक उनके अंक जेयू में जमा
करें। तय तारीख के बाद 10 दिन के अंदर 25 हजार जुर्माने के साथ अंक लिए
जाएंगे। इस अवधि में भी यदि अंक नहीं आए तो संबंधित कॉलेज की संबद्धता
निरस्ती की चेतावनी भी अधिकारियों ने दी है।
आधा सैकड़ा शिकायतों का किया निपटारा
रिजल्ट
में देरी, मार्कशीट में गड़बड़ी जैसी अन्य समस्याओं के कारण छात्र सीएम
हेल्पलाइन में शिकायत कर रहे हैं। जेयू अधिकारी छुट्टी में भी उनके निराकरण
के लिए पहुंचते हैं। रविवार को अधिकारी व परीक्षा, गोपनीय विभाग के
कर्मचारी समस्या निपटाने में लगे रहे। उन्होंने आधा सैकड़ा से ज्यादा
शिकायतें निपटाईं। दफ्तर बंद होने तक 126 शिकायतें पेंडिंग थीं।
इनका कहना है
जेयू
की अध्ययनशालाओं के पीजी छात्रों का रिजल्ट तैयार है। जल्द ही उसे घोषित
कर दिया जाएगा। स्कीम देरी से मिलने के कारण कुछ विलंब हुआ है। यूजी पांचवे
सेमेस्टर की प्रैक्टिकल व वाइवा के अंक के लिए कॉलेजों को 28 अगस्त तक का
समय दिया है। ऐसा न करने पर उनके खिलाफ जुर्माना या संबद्धता निरस्ती की
कार्रवाई की जाएगी।
प्रो. राकेश कुशवाह, परीक्षा नियंत्रक





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