अध्यक्ष से लेकर सीएमओ ने किए अनगिनत फर्जीवाड़े, लेकिन अभी नहीं हुई कार्यवाही
माखन सिंह धाकड़
बैराड। नगर पंचायत बैराड़ द्वारा वर्तमान में विभिन्न निर्माण कार्य कराए जा रहे जिसकी दरें ई टेण्डरिंग के माध्यम से बुलाई गई है जिसमें सी सी रोड निर्माण कार्य की दरें 30 प्रतिशत तक कम प्राप्त हुई हैं जबकि अध्यक्ष द्वारा पूल बनाकर किए गए टेंडरों की दरें विभागीय दर पत्रक से अधिक है जिससे स्पष्ट होता है कि नगर पंचायत अध्यक्ष द्वारा नगर पंचायत को अपनी समझकर शासन एवं जनता के पैसों का दुरुपयोग किया जा रहा है। इसी प्रकार कार्यालय भवन निर्माण की निविदा में एक ठेकेदार द्वारा 26 प्रतिशत कम दर भरी गई थी अध्यक्ष द्वारा किसी भी ठेकेदार की बिड जमा न की जाकर, केवल अपने चहेते ठेकेदार की बिड जमा कराई गई। इसकी दरें बहुत अधिक है मुख्य नगर पालिका अधिकारी एवं अध्यक्ष नगर पंचायत बैराड़ द्वारा अधिकांश टेंडरों को जानबूझ कर दो लाख रुपए से कम का तैयार कराया जाता है ताकि उसे ऑनलाइन न कराना पड़े इसी का जीता जागता उदाहरण है निर्माण कार्य में लगने वाली सामग्री एवं मुरम बोल्डर आदि का वार्षिक टेण्डर मात्र 2 लाख से कम का रखा जाता है ताकि उसे ऑनलाइन न किया जा सके उक्त टेंडर को अध्यक्ष द्वारा अपने चहेतों को देकर 3 से 4 लाख रुपये का सामान भी खरीद लिया गया है। जब उक्त टेंडर पूरे द्वितीय वर्ष के लिए मात्र 2 लाख रुपए का था फिर तीन से चार लाख रुपए का सामान कैसे खरीद लिया गया समझ से परे है जो जांच का विषय है। इस प्रकार शासकीय गुल्लक को बड़ी चपत लगाई जा रही है। इसी प्रकार हैडपंप सामग्री एवं अन्य कई टेंडर फर्जी रुप से लिए गए हैं। नगर परिषद बैराड अब भ्रष्टाचार की गढ़ बन चुकी है यदि जल्द ही इसकी निष्पक्ष जांच नहीं कराई तो भ्रष्टाचारी इसे दीमक की तरह खा जाएंगे। एस्टीमेट के अनुसार नहीं, बल्कि अध्यक्ष के अनुसार हो रहा काम
नगर पंचायत में हो रहे निर्माण कार्यों में ठेकेदार द्वारा एस्टीमेट के हिसाब से कार्य ना किया जाकर अध्यक्ष के कहने पर मनमाने ढंग से घटिया स्तर के सामान का उपयोग किया जा रहा है जिससे निर्माण कार्य कराये जाने का कोई औचित्यक नहीं हैं। सत्यनता के लिये वार्ड क्रमांक 2, 3, 4, 8 में 9 में सीसी निर्माण कार्य की जॉच मौके पर की जा सकती हैं।
नपं अध्यक्ष शासकीय संपत्ति का कर रहे हैं निजी उपयोग
नगर पंचायत अध्यक्ष द्वारा शासकीय एवं संस्था के संसाधनों का उपयोग अपने निजी घरेलू कार्यों में किया जा रहा है। इसके संबंध में अभी कुछ दिन पूर्व ही राजएक्सप्रेस समाचार पत्र में प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। ट्रेक्टर से अध्यक्ष पुत्र मोहन सिंह रावत जो कि नगर पंचायत में कथित रूप से कर्मचारी है के द्वारा स्वयं के खेत की जुताई की जा रही है, किंतु प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। सूत्रों की मानें तो अध्यक्ष के घर पर फर्नीचर भी संस्था के खर्चे पर ही लगाया गया है। इसी प्रकार अध्यक्ष द्वारा नगर पंचायत की ट्यूबबैल की मोटरों का स्वयं के बोरों में उपयोग करना जबकि खराब मोटरों को नगर पंचायत के बोरों में डालना। बताया जाता है कि यह सब अध्यक्ष द्वारा मुख्य नगरपालिका अधिकारी की ही मिलीभगत से किया जाता है।
23 दुकानों की नीलामी का फर्जीवाड़ा उजागर
नगर पंचायत द्वारा बस स्टैण्ड पर बनवाइ गई 23 दुकानों की नीलामी प्रक्रिया महज दिखावे के लिए की गई क्योंकि महज 6 दुकानों की नियम के अनुसार बोली लग सकी जबकि शेष दुकानों की अध्यक्ष द्वारा बोली लगने ही नहीं दी गई। सूत्रों की मानें तो अध्यक्ष द्वारा अपने चेहतों को कम कीमत इन दुकानों को बांट दिया गया। नीलामी का फर्जीवाड़ा इस बात से उजागर होता है कि एक दुकान 15 लाख 52 हजार रूपये दूसरी 9 लाख रूपये तक बिकी है, लेकिन कुछ दुकानों को महज 2 लाख 70 हजार रूपये में दे दी। दुकान नीलाम में इतना बड़ा अंतर फर्जीवाड़े को साफ दर्शाता है। बताया तो यहां तक जाता है कि अध्यक्ष द्वारा प्रत्येक दुकान से 2 लाख अपनी जेब में रखे हैं। नीलामी प्रक्रिया संदिग्ध जान पड़ती है यदि की निष्पक्ष जांच की जाए तो इसमें एक बड़ा भ्रष्टाचार उजागर होगा।
दो से पांच हजार तक वसूले जाते हैं राशनकार्ड के ऐवज में
नगर परिषद के द्वारा नागरिकों के गरीबी रेखा के राशनकार्ड बनाये जा रहे है। जिसमें परिषद के कर्मचारियों द्वारा राशनकार्ड बनबाने के ऐवज में प्रत्येक व्यक्ति से दो से पांच हजार रुपए तक वसूले जाते हैं। अपना नाम न छापने की शर्त पर कुछ कर्मचारियों ने बताया कि इन पैसौं में से एक बड़ा हिस्सा अध्यक्ष से लेकर सीएमओ और एसडीएम तक को भेजा जाता है इसके बाद ही वह राशनकार्ड पर अपने हस्ताक्षर करते हैं। बताया तो यहां तक जाता है कि कुछ जनप्रतिनिधियों एवं कर्मचारियों ने ही अपने गरीबी रेखा के कार्ड बनाकर रखे हैं जबकि पात्र लोगों के राशनकार्ड पैसे नहीं देने के कारण निरस्त कर दिए जाते हैं। इसके अलावा लोगों की मानें तो नगर पंचायत में भवन निर्माण स्वीकृति के ऐवज में 10 से 20 हजार तक रुपए वसूलने के बाद अध्यक्ष एवं सीएमओ द्वारा मौखिक स्वीकृति दी जाती है।
अध्यक्ष एवं परिवार ने किया शासकीय भूमि पर अतिक्रमण
नप अध्यक्ष, उनके पति, देवर एवं पुत्र द्वारा नगर में खाली पड़ी शासकीय जमीन को जगह-जगह घेरकर उस पर अतिक्रमण कर लिया गया है। जानकारी के बाद भी इन्हें तो पुलिस और न ही प्रशासन द्वारा रोका जा रहा है। कुछ स्थानों पर तो इनके द्वारा स्वयं की भूमि बताकर उसका विक्रय भी कर दिया गया है, लेकिन उन्हें जमीन के दस्तावेज नहीं दिए जाते, बल्कि उन्हें गुमराह करते रहते हैं।
चहेतों को निर्धारित से अधिक वेतन हो रहा भुगतान
नगर परिषद बैराड में सीएमओं एवं अध्याक्ष पति के द्वारा मिलकर अपने चहेते कर्मचारियों को शासन द्वारा स्वीकृत वेतन से अधिक का भुगतान किया जा रहा है जो शासन के नियम के विरूद्ध है जिससे निकाय को आर्थिक क्षति भी पहुंच रही है। कार्यालय के कर्मचारी प्रखर सिंघल एव राजेन्द्र गर्ग को सीएमओ एवं अध्यक्ष के द्वारा 10 हजार रुपये प्रति माह भुगतान किया जा रहा है जबकि शासन द्वारा कम्प्यूटर ऑपरेटर को 5 हजार रुपए मासिक मानदेय निर्धारित है।
इनका कहना है
नगर परिषद बैराड का नवीन गठन 7 जनवरी 2015 को हुआ है गठन के दिनांक से दो कम्प्यूटर ऑपरेटर संविदा दर पर, दो भवन सर्वे कार्य अंशकालीन श्रमिक, 24 सफाई कार्य अंशकालीन श्रमिक, दो सफाई कचरा वाहन चलाने वाले, एक ट्रेक्टर आदि को संविदा दर रखा गया है। एक सफाई श्रमिक मुक्ति धाम की सफाई एवं पेड़ों में पानी डालने के लिये आवश्यरक सेवाये होने से श्रमिकों को संविदा दर पर रखा गया है जो कि अध्यक्ष का नजदीकी रिश्तेदार दामाद का बडा भाई है जिसको संविदा दर पर अध्यक्ष के आदेश से रखा गया है।
कमलकिशोर शिवहरे, सीएमओ नगर परिषद बैराड






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