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दतिया महाराज राजेन्द्र सिंह जूदेव का निधन, अंतेष्टि गुरुवार को

शैलेन्द्र बुन्देला, दतिया

महाराज राजेन्द्र सिंह जूदेव का निधन, 

 अंत्येष्टि कल गुरूवार को, विधायक घनश्याम सिंह की नागरिकों से अपील कोरोना संक्रमण की गाइड लाइन का करें पालन, अंतिम यात्रा में न जुटाएं भीड़, घरों से दें पुष्पांजलि,श्रद्धांजलि
दतिया। सेंवढ़ा विधायक घनश्याम सिंह के ज्येष्ठ भ्राता एवं पूर्व सांसद महाराज कृष्ण सिंह जूदेव के ज्येष्ठ पुत्र दतिया महाराज राजेन्द्र सिंह जूदेव का बुधवार सुबह ग्वालियर के सिम्स अस्पताल में उपचार के दौरान ह्रदयघात से आकस्मिक निधन हो गया। 
महाराज राजेन्द्र सिंह जूदेव के निधन की खबर से जिले में शोक व्याप्त है। लोगों ने किला परिसर पहुंचकर महाराज के अंतिम दर्शन कर अश्रुपूरित श्रद्धांजिल अर्पित की। 
 महाराज राजेन्द्र सिंह जूदेव की अंत्येष्टि राजसी परंपरा अनुसार करन सागर तालाब के किनारे राजसी छतरी प्रांगण में  गुरूवार सुबह 9.30 बजे होगी।
अंतिम यात्रा गुरूवार सुबह 9 बजे किला परिसर से शुरू होगी। अंतिम यात्रा किला प्रांगण से किला चौक, दारुगर की पुलिया, टिगेलिया, राजगढ़ चौराहा, बम बम महादेव होते हुए करन सागर तालाब पहुंचेगी। मुखाग्नि महाराज राजेन्द्र सिंह जूदेव के इकलौते पुत्र युवराज अरुणादित्यदेव देंगे। 
विधायक महाराज घनश्याम सिंह ने की नागरिकों से अपील अंतिम यात्रा में न जुटाएं भीड़-
सेंवढ़ा विधायक महाराज घनश्याम सिंह ने जिलावासियों एवं नागरिकों से अपील की है कि कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए शासन द्वारा जारी गाइड लाइन का पालन करते हुए अंतिम यात्रा में भीड़ न जुटे इसलिए आप अपने घरों, बालकनियों पर खड़े होकर अंतिम दर्शन कर पुष्पांजलि, श्रद्धांजलि अर्पित करें। 
खेलकूद व सांस्कृतिक गतिविधियों को दिया प्रोत्साहन-
महाराज राजेन्द्र सिंह जूदेव सरल सहज व मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने जिले में सांस्कृतिक व खेलकूद गतिविधियों को काफी प्रोत्साहित किया। श्रीराम कथा आयोजन समिति द्वारा आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम तथा दतिया चैलेंजर कप क्रिकेट प्रतियोगिता के आयोजन में सक्रिय सहभागिता दी। श्री गोविंद गौशाला समिति के अध्यक्ष रहते हुए गौशाला में पारंपरिक गोवर्धन पूजा को उन्होंने भव्यता प्रदान की।
लखनऊ में जन्म, मथुरा में हुई शिक्षा-
महाराज राजेन्द्र सिंह जूदेव का जन्म नबम्बर 1950 में लखनऊ उप्र में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा मथुरा में हुई। आगरा विश्विद्यालय से उन्होंने बीकॉम, एमकॉम की डिग्री हासिल की। इसके बाद भोपाल और नागपुर में निजी कंपनी में सेवाएं दी। वह वर्ष 1999 से दतिया किला में निवासरत होकर निजी कृषि व प्रोपर्टी का कार्य देख रहे थे।
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