कोलारस। कोलारस अनुविभाग के अंतर्गत आने बाले अधिकांश ग्रामीण अंचलो में स्थित माध्यमिक विद्यलायो से लेकर प्राथमिक विद्यालय समय पर नही खुल रहे है। यहां पर तैनात अधिकांश शिक्षक जो कि संगठनो से जुडे हुये है वह विद्यालय पर ध्यान न देते हुये अपनी राजनीति ताकत दिखाने में जुटे हयु है। अधिकांश शिक्षक जो कि सत्ताधारी दल से जुडे हुये है वह विद्यालय न जाते हुये चोरी छुपे पार्टीयो की बैठको से लेकर मंत्रीयो के पास मंडराते हुये दिखाई दे रहे है। अधिकांश शिक्षको के बीडियो तक मौजूद है। कुल मिला कर शिक्षा की हालत क्षेत्र में क्या है इसका पता आलाधिकारियो से लेकर शिक्षा विभाग कोलारस के अधिकारी को भी पता है। विद्यालयो में मध्यान्ह भोजन के नाम पर जम कर चपत लगाई जा रही है। महीने में एक दो दिन ही मध्यान्ह भोजन दिया जा रहा है। अधिकांश शिक्षक जो कि गांवो में पदस्थ है वह खुलेआम नगर में ही कोचिंग सेन्टरो से लेकर विद्यालय संचालित कर रहे है। जिसके चलते ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे विद्यालयो में नही पढ पा रहे है। शिक्षा विभाग द्वारा जन कल्याणकारी योजनाये चलई जा रही है। परन्तु इनका लाभ ग्रामीण अंचलो के बच्चो को नही मिल पा रहा है। अधिकांश गांव ऐसे है जहां पर विद्यालय तो है परन्तु स्टाप गायव रहता है।
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फर्जी कागजी कार्यवाही कर वजट किया जा रहा है हजम
कोलारस के अंतर्गत आने बाले ग्रामीण अंचल जिनमें खैरोना डांग, भैंसदा, पिछोर, कनावदा, गणेशखेडा, लेवा, पिपरौदा, साखनौर सहित अधिकांश गांवो में पदस्थ शिक्षक जिन पर विद्यालय का प्रभार है वह शासन के बजट को आसानी के साथ चपत लगा रहे है। इनके द्वारा नि:शुल्क साईकिल वितरण योजना, ड्रेस वितरण योजना, मध्यान्ह भोजन, नि: शुल्क पुस्तक विरण योजना में जम कर बजट को हजम किया गया है। विद्यालय में देख रेख सहित निर्माण कार्यो से लेकर पुताई सफाई के लिए आने बाला बजट प्रभारी शिक्षको द्वारा कागजी कार्यवाही फर्जी तरीके सें संचालित कर ठिकाने लगाया गया है। सूचना के अधिकार के तहत अधिकांश विद्यालयो में ली गई जानकारी में इस बात का खुलाश हुआ है। शिक्षा के क्षेत्र में सरकार जहां प्रति माह बजट भेज रही है परन्तु अधिकांश विद्यालयो पर ताला बंदी जैेसे हालात नजर आ रहे है।





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