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कांग्रेस से मुख्यमंत्री पद के दावेदार एवं सांसद सिंधिया ने मुख्यमंत्री शिवराज पर सोशल मीडिया के माध्यम से बोला हमला

ग्वालियर । मध्यप्रदेश में 14 साल से भाजपा की सरकार राज कर रही है। शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री के तौर पर 12 साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है। मुख्यमंत्री सहित उनका पूरा मंत्रीमंडल और भाजपा प्रदेश भर में इस उपलब्धि पर जश्न मना रही है और शिव-राज, बारह साल, बेमिसाल की बात कर रही है। ऐसे में गुना-शिवपुरी सांसद और कांग्रेस की ओर से संभावित मुख्यमंत्री पद के दावेदार ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह पर जोरदार हमला बोला है।
सिंधिया ने इस बार किसी जनसभा या मंच से नहीं बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से शिवराज सिंह पर हमला बोला है। इसके लिए उन्होंने ट्विटर को अपना हथियार बनाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से 12 साल बेमिसाल पर 12 सवाल किए हैं। जिनके माध्यम से उन्होंने सरकार की जमीनी हकीकत और  प्रदेश की वास्तविक तस्वीर दिखाने की कोशिश की है। इन सवालों के जरिए उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, कुपोषण, बेरोजगारी, गैंगरेप, किसानों की बदहाली और व्याप्त भ्रष्टाचार के मुद्दों को उठाकर सरकार को सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया है।
ये हैं सिंधिया द्वारा किए सभी 12 सवाल, जिन्हें हमने उनके ट्विटर अकांउट से लिया है और  संपादित किए बिना  उनकी ही भाषा में आपको पढ़ा रहे हैं। देखिए उनके पूरे 12 सवाल

आखिर जश्न क्यों?                                                                                                                                                                            
सवाल1- मुख्यमंत्री बताने का कष्ट करें, कि 12 साल के कार्यकाल का जश्न आखिर आप मना किस लिए रहे है?
बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं
सवाल 2- 2016 में प्रतिदिन 63 मासूम बच्चों की मौत, 1 साल में गंभीर कुपोषित बच्चों की संख्या 3 गुना बढ़कर 26000 हुई, इंदौर के एमवाय अस्पताल में गैस कमी के कारण 11 मरीजों की मृत्यु, आज मप्र का शिशु मृत्यु दर देश में सबसे अधिक – इसके लिए कौन जिम्मेदार है? मप्र में 7000 डॉक्टरों की जरुरत, केवल 3000 उपलब्धय 334 बाल रोग विशेषज्ञों की जरुरत, अभी 85 मौजूदय 1989 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की जरुरत, अभी सिर्फ 1171 केंद्र. पहले तो अस्पताल नहीं, अस्पताल है तो डॉक्टर नहींय डॉक्टर है तो दवाई नहीं. लगता है सरकार स्वयं प्ब्न् में चली गई है.

मौत को गले लगाता किसान 
सवाल 3- आज किसान फसल सडकों पर फेंकने को मजबूर- एक तरफ बढ़ती लागत, समर्थन मूल्य में इजाफा नहीं, मंडियों में दाम नहीं, बिक्री हो तो भुगतान हाथोहाथ नहीं. भावान्तर का भंवरजाल किसानों के लिए सुरक्षा कवच है या जख्म कुरेदने का षड्यंत्र? सीएम शिवराज, क्या यही है आपका किसानों पर उपकार? अपना जायज हक मांगने पर मप्र सरकार ने मंदसौर के किसानों को गोली चलाकर जान से मार डाला, टीकमगढ़ में किसानों को थाने में निवस्त्र कर लाठियां बरसाई, फिर नरसिंहपुर में निराश किसानों को अपने खून से कलेक्ट्रेट की दीवारों को रंगने पर मजबूर कर दिया।

सवाल 4- मुख्यमंत्री कहते है किसान पूरी तरह संतुष्ट है? अपने ही प्रदेश में भीषण कृषि संकट से जुझ रहे पीडि़त किसानों को असामाजिक तत्व का खिताब देते है?

सवाल 5-हिंदुस्तान के दिल में बसे किसानों में से हर 5 घंटे, एक किसान अपनी जान ले रहा हैय पिछले 16 सालों में, 21000 किसान आत्म-हत्या का रास्ता अपना चुके है. क्या आपको उनकी पीड़ा दिखती ही, या क्या यही है कृषि कर्मण पुरस्कार जीतने वाले स्वर्णिम मध्यप्रदेश की सच्चाई?

भ्रष्टाचार से कलंकित होता प्रदेश
सवाल 6- सिंहस्थ के आस्था के कुम्भ में भी भ्रष्टाचार का कोई मौका नहीं छोड़ा. व्यापम की बदौलत आज हमारा स्वर्णिम प्रदेश मृत्यु प्रदेश कहलाया जाता है जाने कितने मासूमो ने जान गंवाई. शिक्षा में इतिहास में पहला ऐसा घोटाला- 7 साल पढ़ाई करने वाले डॉक्टर की आपने 7 लाख की बोली लगा दी?

ये कैसी शिक्षा व्यवस्था?
स्वाल 7- कही शौचालय, गौशाले में स्कूल तो कही छात्र सड़क किनारे, बिना छत आवारा पशुओं के साथ पढऩे को मजबूरद्य ऊपर से स्कूल में टीचर नहीं, जहां है वहां एक ही है- 17,874 स्कूल में केवल एक टीचर- 12 साल में मुख्यमंत्री शिवराज ने शिक्षा के लिए आखिर किया क्या है?

कब सुरक्षित महसूस करेंगी महिलाएं?                                                                                                                                  
सवाल 8- मुख्यमंत्री के नाक के नीचे भोपाल गैंगरेप जैसी अत्यंत दुखदायी घटना सामने आ रही है – महिला अपराध बढ़ता चला जा रहा है लेकिन, और पुलिस मदद की जगह पीडि़त का मजाक बनाते है आपने 12 साल के शासन में महिलाओं की सुरक्षा पर ध्यान क्यों नहीं दिया? अमरीका में कह रहे थे कि मप्र की सड़के वाशिंगटन से बेहतर है- कोई इनके आंखों से पट्टी उतारे असल में सैकड़ों यहां गड्ढे है, सड़कों का हाल ऐसा, कि मौत के ये अड्डे है.

क्या हुआ 24 घंटे बिजली का वादा?
सवाल 9-बिजली-पानी की बात करें तो 24 घंटे बिजली का वादा किया था, मगर मप्र में बिजली का नामोनिशान नहीं. पीने का स्वच्छ पानी भी उपलब्ध नहीं. आप ऐसे झूठे वादे करना कब बंद करेंगे?

दलितों व आदिवासियों का शोषण कब तक ?
सवाल 10- दलितो के खिलाफ अपराध में मप्र तीसरे नंबर -मप्र में 92: दलित बच्चे आज भी स्कूल में पानी नहीं पी सकते. मुख्यमंत्री के सीहोर जिले में 50 दलित परिवार सरकार से इच्छामृत्यु की गुहार करने को मजबूर है. आप कहते थे सबका साथ, सबका विकासद्य आज हम पूछना चाहते है-किसका साथ, और कहां है विकास?

सवाल11- हमारे आदिवासी भाई-बहन अभी तक अपने जल-जंगल-जमीन के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन प्रदेश सरकार उन्हें उनके अधिकार दिलाने के बजाय, उनके पट्टे छीनकर उन्हें भूमिहीन करने में लगी है. क्या यह है हमारे आदिवासी भाइयों और बहनों के अच्छे दिन? मप्र में 14 लाख बेरोजगार- 13 लाख पढ़े-लिखे भी होकर,खा रहे दर-दर की ठोकर. मनरेगा भ्रष्टाचार में मप्र सबसे अव्वल नंबर पर-1 साल में 21 लाख से ज्यादा फर्जी जॉब कार्ड रद्द हो चुके है. समय पर मजदूरी नहीं मिलती, जरूरतमंदों को काम नहीं, केवल 1 प्रतिशत परिवारों को 100 दिन रोजगार मिला.

अंधेर नगरी-चौपट राजा 
सवाल 12- नोटबंदी ने सिर्फ 3 महीनों में 15 लाख नौकरियां तबाह कर दी, और मप्र मुख्यमंत्री कहते है नोटबंदी से गरीबों के लिए रोजगार अवसर बढ़े? असल में हाल कुछ ऐसा है कि चरमराई है मध्यप्रदेश की कानून, स्वास्थ्य, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था – क्योंकि कर दी है भाजपा ने उन सबकी हालत खस्ता।

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