
प्याज बेचने में आ रही दिक्कत से नाराज किसानों की सुनवाई नहीं होने से वे कहने लगे है कि, यदि किसानों की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो चुनाव परिणामों पर व्यापक असर पड़ेगा। प्याज की बम्पर पैदावार जहां किसानों के लिए मुसीबत बनीं हुई हैं, तो वहीं सरकार के लिए भी परेशानी का कारण बन गई हैं।
मंडी में हालात यह है कि बारिश से सैकड़ों क्विंटल प्याज भीग रही हैं और जो किसान कतार में हैं उन किसानों की प्याज तुल नहीं रही। किसानों का साफ कहना है कि प्याज बेचे या खेती करें। वहीं जहां एक तरफ किसान अपनी प्याज को बेचने के लिए सब काम छोड़कर मंडी में लाइन में लगा हैं तो वहीं दूसरी ओर अधिकारी सुनने को तैयार ही नहीं।
मप्र में किसानों के खुदकुशी करने का ग्राफ बढ़ा :—
किसानों का कहना है कि, जब खेती में ध्यान देने की जरूरत हैं तब किसान प्याज की लाइन में लगा हैं और इसका असर आने वाले चुनाव में दिखेगा। मध्यप्रदेश में किसानों के खुदकुशी करने का ग्राफ भी बढ़ता जा रहा है। सरकार के नए-नए फरमान से भी किसान पसोपेश में हैं। इस बीच उन किसानों की मुश्किलें बढ़गई हैं। जो लंबी कतार के कारण दूसरी कृषि उपज मंडी की ओर चले गए थे। जब लौटे तो किसी भी मंडी में प्याज न बिकने से परेशान हो गए।
राशन दुकानों से 2 रुपए किलो की दर से प्याज का वितरण :—
जहां एक ओर किसानों की परेशानी कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। इस बीच प्याज खरीदी के टोकन मिलने बंद कर दिए गए। अब बताया जा रहा है कि, अभी तक जितने भी किसानों को टोकन मिले हैं अगले तीन, चार दिनों तक उन्हीं की प्याज खरीदी जाएगी। जिन जिलों में प्याज की खरीदी बंद हो गई है। वहां एक, दो दिन बाद पीडीएस राशन दुकानों से दो रुपए किलो की दर से प्याज का वितरण शुरू हो जाएगा।
नए फरमान से किसान प्याज की बिक्री को लेकर परेशान :–
सरकार के आदेश के बाद अब तक 64 लाख 51 हजार क्विंटल प्याज की खरीदी हो चुकी थी। मुख्यमंत्री ने पूर्व में संकेत दिए थे कि 15 जुलाई तक प्याज की खरीदी की जा सकती है। लेकिन एकाएक नए फरमान से किसान प्याज की बिक्री को लेकर चिंतित हो उठे हैं। मंडी के अधिकारियों ने इस बारे में बताया कि, प्याज की रिसाइकिलिंग रोकने के लिए ऐसा कदम उठाया जा रहा है।






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