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ग्रामीण क्षेत्रों से हुआ सचिवों का मोहभंग, दर्शनों को तरसते ग्रामीण  पंचायत सचिव मुख्यालय पर नहीं करते निवास

करैरा। गांधीजी के सपनों को साकार करने के लिए प्रदेश में ग्राम स्वराज की स्थापना की जाकर ग्रामीण विकास की सैकड़ों योजनाओं का खाका तैयार किया गया। यहीं नहीं पंचायतीराज की अवधारणाओं को मूर्त रूप देने के लिए गांव-गांव में पंचायत सचिवों को नियुक्त किया गया जो शासकीय कर्मचारी के रूप में शासन की याजनाओं को आमजन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकें, परन्तु देखने में आ रहा है कि करैरा जनपद विभाग से अधिकारियो से लेकर बाबू व पंचायत सचिवों का ग्रामीण क्षेत्रों में मोहभंग होता जा रहा है, एक ओर अधिकारी जनपद ग्राम पंचायतो का दौरा नही कर रहे हैं वही पंचायत सचिव मुख्यालयों पर निवास न कर करैरा शिवपुरी में निवास कर रहे हैं। जंप के अधिकारी हप्ते में एक या दो वार ग्रामो में दौरे को जाते हैं तो वही पंचायत सचिव अपने अधिकारी पर भी हप्ते में एक आद बार जनपद आकर भारी पड रहे हैं, ऐसे में ग्रामीणों का परेशान होना स्वाभाविक है। लेकिन जंप के अधिकारीयो व सचिवों को ग्रामीणों की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है कारण, सरकारी खजाने को खाली कर निर्माण कार्यो में धांधलियो को अंजाम देकर पंचायत सचिव आज आलिशान इमारते तानकर शहरी क्षेत्रों में निवास कर रहे हैं वही दूसरी ओर ग्राम पंचायतों की अवाम सचिवों को तलासते हुए करैरा जनपद व उनके निवासों के चक्कर काट रही हैं। इस सम्पूर्ण माजरे के पीछे कारण जो भी हो परंतु बिना जिम्मेदारों की सहमति के ए सब नामुमकिन है, लेकिन इसे करैरा जनपद विभाग का दुर्भाग्य ही कहा जा सकता हैं की यहां के जिम्मेदार अधिकारी से लेकर बाबू व चपरासी भी जिला मुख्यालय पर निवासरत हैं तो फिर सचिवों पर काहे की और कैसी लगाम।

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खूंठी पर टांग डाले मप्र शासन के नियम व कानून

मप्र शासन ने लिखित आदेश जारी किए थे की संबधित विभागों में पदस्थ अधिकारी व कर्मचारी मुख्यालय पर ही रहेगें, साथ ही पंचायत सचिव पंचायतों में निवासरत होकर ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करेगें, लेकिन शासन के

आदेश महज कागजों में ही सिमटकर रह गए है । धरातल में करैरा जनपद विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों का निवास जिला मुख्यालय दतिया शिवपुरी पर होने के कारण वो पंचायत सचिवों पर नियम लागू करने में अस्हाय जान पड रहे हैं तो वहीं पंचायत सचिव तहसील व जिला मुख्यालयों पर निवासरत है जिसके चलते समस्याओं का समाधान पाने केलिए ग्रामीण दर-दर की ठोकरेंं खाने के लिए विवश बने हुए हैं।

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इन पंचायतों में नहीं रहते सचिव

करैरा जनपद पंचायत की ग्राम चिनोद टीला काली पहाड़ी डामरौंन कला डामरौंन खुर्द छितीपुर दवरा करैरा खेराई बम्हारी सलैया सिल्लारपुर,पारगढ़ बरौदी घसारई नारही सिरसोना सिलानगर बडौरा रहरगवा करौठा चौका बहादुरपुर थनरा खेराघाट लंगूरी हाजीनगर वनगवा लालपुर आढर बासगढ़ जयनगर राजगढ़ अमोला क्रेसर आदि पंचायतें ऐसी हैं जहाँ सचिवों के पंचायत क्षेत्र में दर्शन ही हो जाएं तो बहुत बड़ी बात है। यदि पंचायतों में निवासरत ग्रामीणों की मानें तो उक्त ग्राम पंचायतों के सचिव , करैरा दिनारा दतिया डबरा ग्वालियर सहित शिवपुरी शहर में निवासरत रहते हैं जिसके चलते ग्रामीणों को अपने कार्यों को लेकर करैरा अथवा शिवपुरी भागना पड़ता है, अगर सचिव अपने घर नहीें मिलता तो ग्रामीणों को वापस लौटना पड़ता है। 

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करैरा -शिवपुरी में बना लिए खासे मकान

विगत वर्ष अधिकारियों द्वारा की गई जांच में एक दर्जन से अधिक सरपंच-सचिवों के खिलाफ न केवल घोटालों के आरोप प्रमाणित पाए गए थे बल्कि जांच अधिकारियों ने तत्कालीन कलक्टर के निर्देश पर पुलिस में एफआईआर दर्ज

कराने आवेदन प्रस्तुत किए थे। ऐसे घोटालों में लिप्त सरपंच-सचिव करैरा व शिवपुरी की विभिन्न कालोनियों में भव्य इमारतों का निर्माण कर मजे कर रहे हैं परन्तु उनके खिलाफ आज तक भ्रष्टाचार अधिनियम व धोखाधड़ी के प्रकरण

दर्ज नहीं होने से वह शासकीय योजनाओं में पलीता लगाने से बाज नहीं आ रहे

हैं।

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इनका कहना है

मामला आपके द्वारा संज्ञान में लाया गया है। यदि संबधित मुख्यालय पर निवास नहीं कर रहे हैं तो गलत है। हम इस मामले की जांच कराएगें।

अंकित अस्थाना, करैरा एसडीएम 

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