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बड़ी खबर नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म, पुलिस पर मारपीट कर भगाने का आरोप | Bairad News


पीडि़ता का ठहरा गर्भ, पुलिस अधीक्षक से लगाई न्याय की गुहार
शिवपुरी। जिले के बैराड़ थाना क्षेत्र के ग्राम मारौरा खालसा में रहने वाली एक 14 वर्षीय नाबालिग के साथ प्रीति पत्नी पवन धाकड़ और आशा प्रजापति पत्नी मुकेश प्रजापति के सहयोग से पवन धाकड़ और दिलीप धाकड़ निवासीगण ग्राम मारौरा खालसा ने दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। आरोपियों ने पीडि़ता को इतना डराया धमकाया कि  उसने किसी से घटना का जिक्र ही नही किया।  खुलासा उस समय हुआ जब पीडि़ता का गर्भ ठहर गया तो उसने अपनी मां को पूरा वाक्या बताया। इसके बाद पीडि़ता को लेकर उसके माता-पिता बैराड़ थाने पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उल्टे पीडि़ता एवं उसके माता-पिता पर राजीनामा के लिए दबाव बताया और रिपोर्ट दर्ज नहीं की। उक्त पूरे घटनाक्रम का उल्लेख आज पीडि़ता के परिजनों ने समाजबंधुओं के साथ मिलकर पुलिस अधीक्षक शिवपुरी सौंपे गए ज्ञापन में किया है।
पुलिस अधीक्षक को दिए ज्ञापन में उल्लेख किया है कि करीब एक माह पूर्व 14 वर्षीय नाबालिग बालिका अपने घर पर अकेली थी जबकि उसके माता-पिता खेत पर गए हुए थे। दोपहर के समय पास में ही रहने वाली प्रीति धाकड़ और आशा प्रजापति आईं और बालिका को बहला फुसलाकर अपने घर ले गईं और एक कमरे में बंद कर जिसमें पवन धाकड़ और दिलीप प्रजापति पूर्व ही बैठे हुए थे। पीडि़ता के अनुसार दोनों प्रार्थिया को डरा धमकाकर मुंह बंद कर दिया और उसके साथ बारी-बारी से दुष्कर्म कर दिया। इसके बाद दोनों ने बालिका को इकलौते भाई एवं माता-पिता को मारने की धमकी दी जिससे पीडि़ता डर गई और उसने घटना के बारे में किसी को नहीं बताया। जब पीडि़ता का गर्भ ठहर गया तो उसने अपनी मां को घटना के बारे में बताया और माता-पिता के साथ 29 जुलाई को बैराड़ थाने में रिपोर्ट लिखाने पहुंची, लेकिन पुलिस ने पीडि़ता की रिपोर्ट नहीं लिखी और थाने के एक कमरे में बंद कर उस पर राजीनामा करने का दबाव बनाया गया। पीडि़ता का आरोप है कि उसके साथ महिला ने कपड़ेे उतारकर बेल्ट से बेरहमी से मारपीट की जिसके निशान पीडि़ता के शरीर पर हैं। पीडि़ता का आरोप है कि पुलिस द्वारा उस पर दबाव बनाया गया कि वह पवन धाकड़ एवं दिलीप प्रजापति के नाम बलात्कार की घटना में न बताये तथा अन्य किसी व्यक्तियों के नाम बताए। इसके बाद पुलिस ने पानी भरने की घटना को लेकर हुआ विवाद बताकर जबर्दस्ती राजीनामा करा दिया गया और धमकी देकर पीडि़ता के माता-पिता एवं अन्य परिजनों के हस्ताक्षर करा लिए गए। पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर पीडि़ता ने दोषियों के खिलाफ वैधानिक कार्यवाही करने की मांग की है। 

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