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6-10 वॉरशिप तैनात किए अरब सागर में भारत ने : कमांडो मौजूद रहेंगे अदान की खाड़ी तक , समुद्री लुटेरों के हमले रोकेंगे जहाजों पर / #INTERNATIONAL

भारतीय नौसेना ने अरब सागर से अदान की खाड़ी तक पेट्रोलिंग बोट समेत 6-10 युद्धपोत तैनात किए हैं। - Dainik Bhaskar

भारतीय नौसेना ने अरब सागर से अदान की खाड़ी तक पेट्रोलिंग बोट समेत 6-10 युद्धपोत तैनात किए हैं।

भारत ने अरब सागर से अदान की खाड़ी तक करीब 10 वॉरशिप तैनात किए हैं। इस पर मौजूद मरीन कमांडोज सोमालिया के समुद्री लुटेरों से जहाजों को बचाएंगे।

भारतीय नौसेना ने कहा- अरब सागर में कारोबारी जहाजों पर हमले बढ़ रहे हैं। इन जहाजों को समुद्री लुटेरों से बचाने और उनके ड्रोन हमले रोकने के लिए सोमालिया के तट के पास, अरब सागर और अदन की खाड़ी में डिस्ट्रॉयर्स, फ्रिगेट्स और पेट्रोलिंग बोट समेत 6-10 युद्धपोत तैनात किए गए हैं।

मैप में अरब सागर और अदान की खाड़ी की लोकेशन देखी जा सकती है..

समुद्र में होने वाली हर घटना पर नजर होगी
भारतीय नौसेना ने कहा- अब समुद्र में होने वाली हर घटना पर हमारी नजर होगी। तैनात किए गए युद्धपोत समुद्र में किसी भी घटना को रोकने के लिए तैयार रहेंगे और हर स्थिति पर नजर बनाए रखेंगे। नौसेना के चीफ एडमिराल आर हरी कुमार ने 10 जनवरी को बताया था कि पिछले 42 दिनों में ऐसी 35 घटनाएं हुई हैं जहां जहाज पर हमला हुआ हो। हालांकि किसी भी भारतीय जहाज पर हमला नहीं हुआ।

लाल सागर में भी जहाजों पर हमले हो रहे हैं। 19 नवंबर 2023 को हूती विद्रोहियों ने कार्गो शिप गैलेक्सी लीडर को हाइजैक कर लिया था। इस जहाज में 25 भारतीय क्रू मेंबर्स थे।

लाल सागर में भी जहाजों पर हमले हो रहे हैं। 19 नवंबर 2023 को हूती विद्रोहियों ने कार्गो शिप गैलेक्सी लीडर को हाइजैक कर लिया था। इस जहाज में 25 भारतीय क्रू मेंबर्स थे।

कई जहाजों पर भारतीय क्रू मेंबर सवार थे
अरब सागर में जिन जहाजों पर हमले हुए उनमें भारतीय क्रू मेंबर भी सवार थे। भारतीय नौसेना ने इन हमलों की जानकारी मिलते ही एक्शन लिया और वॉरशिप्स को इन्हें बचाने के लिए भेजा। ऐसी कुछ घटनाओं पर एक नजर…

5 जनवरी 2024
4 जनवरी को सोमालिया के समुद्री लुटेरों ने अरब सागर में लाइबेरिया के फ्लैग वाले लीला नोर्फोक जहाज को हाईजैक कर लिया था। भारतीय नौसेना ने 5 जनवरी को बताया कि जहाज ने ब्रिटेन के मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स (UKMTO) पोर्टल पर एक संदेश भेजा था। इसमें कहा गया था कि 4 जनवरी की शाम को 5-6 समुद्री लुटेरे हथियारों के साथ जहाज पर उतरे थे।

जानकारी मिलते ही भारतीय नौसेना ने हाईजैक किए गए जहाज को छुड़ाने के लिए वॉरशिप INS चेन्नई और मैरिटाइम पैट्रोलिंग एयरक्राफ्ट P8I को रवाना किया गया था। जिसके बाद इसमें सवार 15 भारतीयों समेत सभी 21 क्रू मेंबर्स को सुरक्षित निकाल लिया गया।

फुटेज में भारतीय नौसेना की बोट अरब सागर में हाईजैक हुए लीला नोर्फोक जहाज के करीब जाती दिख रही है।

फुटेज में भारतीय नौसेना की बोट अरब सागर में हाईजैक हुए लीला नोर्फोक जहाज के करीब जाती दिख रही है।

23 दिसंबर 2023
इसके पहले 23 दिसंबर को हिंद महासागर में भारत आ रहे मालवाहक जहाज केम प्लूटो पर हमला हुआ था। इसमें 21 भारतीय और एक वियतनामी क्रू मेंबर सवार थे। सऊदी अरब से तेल लेकर भारत आ रहा यह जहाज जापान का था और लाइबेरिया के फ्लैग से ऑपरेट हो रहा था। हमले के वक्त जहाज पोरबंदर तट से 217 नॉटिकल मील (करीब 400 किमी) दूर था।

कोस्ट गार्ड का जहाज ICGS विक्रम 25 दिसंबर को एमवी केम प्लूटो एस्कॉर्ट करते हुए मुंबई लाया था।

कोस्ट गार्ड का जहाज ICGS विक्रम 25 दिसंबर को एमवी केम प्लूटो एस्कॉर्ट करते हुए मुंबई लाया था।

1990 के बाद सोमालिया में बढ़े समुद्री लुटेरे
सोमालिया वो मुल्क है, जिसके समुद्र में बड़ी तादाद में मछलियां मौजूद हैं। 1990 तक इसकी अर्थव्यवस्था मछलियों से ही चलती थी। तब यहां समुद्री लुटेरों का कोई डर नहीं था। अधिकतर लोग मछली का व्यापार करते थे। फिर यहां सिविल वॉर शुरू हो गया। सरकार और नौसेना नहीं रही। इसका फायदा विदेशी कंपनियों ने उठाया।

1990 के बाद सोमालिया में सिविल वॉर शुरू हुआ। लोग बेरोजगार होने लगे। रोजगार छिनने के बाद सोमालिया के लोग समुद्री लुटेरे बन गए।

1990 के बाद सोमालिया में सिविल वॉर शुरू हुआ। लोग बेरोजगार होने लगे। रोजगार छिनने के बाद सोमालिया के लोग समुद्री लुटेरे बन गए।

सोमालिया के लोग छोटी नावों में मछली पकड़ते थे। उनके सामने विदेशी कंपनियों के बड़े-बड़े ट्रॉलर आकर खड़े हो गए। लोगों का रोजगार छिनने लगा। इससे परेशान होकर 1990 के बाद इस देश के लोगों ने हथियार उठा लिए और समुद्री लुटेरे बन गए। समुद्री मालवाहक जहाजों का एक बड़ा बेड़ा सोमालिया कोस्ट के पास से होकर गुजरता था।

मछुआरे से लुटेरे बने लोगों ने इन जहाजों को निशाना बनाना शुरू किया। जहाज छोड़ने के बदले वे फिरौती लेने लगे। साल 2005 तक यह धंधा इतना बड़ा हो गया कि एक पाइरेट स्टॉक एक्सचेंज बना दिया गया। यानी लुटेरों के अभियान को फंड करने के लिए लोग इन्वेस्ट कर सकते थे। बदले में लोगों को लूटी हुई रकम का एक बड़ा हिस्सा मिलता।

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