शिवपुरी: भारतीय सेना के भूतपूर्व सैनिक श्रवणलाल दीवान जी का जीवन राष्ट्रसेवा, अनुशासन और त्याग का प्रतीक रहा। देश की रक्षा में वर्षों तक योगदान देने वाले ऐसे वीर का अंतिम सफ़र सम्मान, गरिमा और स्वच्छ वातावरण में होना चाहिए था। परंतु अत्यंत दुःख और पीड़ा के साथ कहना पड़ता है कि उनके पार्थिव शरीर को लुधावली वार्ड नंबर 17 से मुक्तिधाम ले जाया गया, वहाँ फैली गंदगी, कचरे बदहाल रास्ते ने पूरे समाज और प्रशासन की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया।
यह केवल एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए शर्म का विषय है। जिस देश में सैनिकों को “शहीद” और “वीर” कहकर सम्मान दिया जाता है, उसी देश में एक भूतपूर्व सैनिक के अंतिम संस्कार के समय बुनियादी स्वच्छता तक का अभाव होना गंभीर प्रश्न खड़े करता है। कचरे से भरी गलियाँ, दुर्गंध और अव्यवस्था के बीच से पार्थिव शरीर का निकलना न सिर्फ़ मानवीय संवेदना के विरुद्ध है, बल्कि सैनिक सम्मान की अवधारणा पर भी आघात है।
यह घटना स्थानीय प्रशासन, नगर पालिका और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारियों की याद दिलाती है। क्या सफ़ाई और रोड केवल काग़ज़ों और योजनाओं तक सीमित रह गई है?
जब एक सैनिक के अंतिम क्षणों में भी व्यवस्था विफल हो जाए, तो आम नागरिक की स्थिति का अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है।








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