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नगरपालिका से धरने का टैंट चौथे दिन गायब, पार्षदों ने दबाब का लगाया आरोप, बिना अनुमति धरने का दिया हवाला / Shivpuri News

शिवपुरी: नगर पालिका परिसर में चल रहे विरोधी पार्षदों के धरने का टेंट शुक्रवार देर रात संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हो गया। पार्षद भ्रष्टाचार के आरोपियों पर कार्रवाई और नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा को पद से हटाने की मांग कर रहे थे। टेंट गायब होने की जानकारी मिलते ही पार्षदों ने प्रशासन पर मनमानी, भ्रष्टाचार और विरोध को दबाने का आरोप लगाया। नगर पालिका प्रशासन ने इस मामले पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

यह विरोध प्रदर्शन लगभग चार महीने पहले शुरू हुआ था। तब करैरा के बगीचा सरकार हनुमान मंदिर में करीब 18 पार्षदों ने सामूहिक शपथ ली थी कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। इसके बाद इन पार्षदों ने अपने सामूहिक इस्तीफे कलेक्टर को सौंपे थे, लेकिन उन्हें स्वीकार नहीं किया गया।

पार्षदों ने बाद में अपने-अपने वार्डों में सड़क, गिट्टी, मोरम और कट्टल से संबंधित कथित घोटालों का खुलासा किया। इन मामलों की जांच भी हुई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने से पार्षदों में नाराजगी बढ़ गई। उन्होंने नगर पालिका अध्यक्ष का पुतला भी फूंका, पर तब भी उनकी सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद यह विरोध प्रदर्शन धरने में बदल गया।

भाजपा पार्षद नीलम बघेल ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने पहले भी पार्षद के रूप में काम किया है, लेकिन ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर पालिका में हर तरफ भ्रष्टाचार व्याप्त है और जनता की सुनवाई नहीं हो रही है। बघेल ने कहा कि उन्हें मजबूरन धरने पर बैठना पड़ा, लेकिन प्रशासन को यह भी पसंद नहीं आया और रातों-रात टेंट हटवा दिया गया। उन्होंने घोषणा की कि अब वे जमीन पर बैठकर धरना जारी रखेंगे।

कांग्रेस पार्षद संजय गुप्ता ने बताया कि उन्हें रात में टेंट गायब होने की सूचना मिली थी। मौके पर जाकर देखने पर टेंट नहीं मिला। उन्होंने सीएमओ और टेंट संचालक को फोन किया, लेकिन किसी ने कॉल रिसीव नहीं किया। गुप्ता ने कहा कि रविवार को छुट्टी होने के कारण सोमवार को सभी पार्षद सीसीटीवी फुटेज निकलवाएंगे, ताकि यह पता चल सके कि टेंट किसने हटवाया।

भाजपा पार्षद विजय शर्मा ने बताया कि 18 नवंबर को सीएमओ ने धरने को अवैध बताते हुए एसपी ऑफिस को पत्र भेजकर धरना समाप्त कराने को कहा था। उन्होंने कहा कि हम महीनों से माधव चौक से कलेक्ट्रेट तक कहीं भी धरना देने की अनुमति मांग रहे थे, लेकिन नहीं दी गई। नगर पालिका के ट्रस्टी होने के नाते परिसर में धरना शुरू किया था, पर भ्रष्टाचार को छुपाने वालों ने इसे भी हटवा दिया।

छुटभैया नेता शिकायतें ऊपर तक नहीं पहुंचने दे रहे
विजय शर्मा ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानीय नेता केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और वरिष्ठ नेतृत्व तक पार्षदों की शिकायतें नहीं पहुंचने दे रहे। उनका आरोप कि इन नेताओं को अपनी दुकानें चलानी हैं, अवैध खदानें और भूमाफिया का खेल चलाना है। भ्रष्टाचार खुला तो उनकी भी बारी आ सकती है, इसलिए बात ऊपर तक नहीं जाने दी जा रही।

नपा को ‘प्राइवेट लिमिटेड’ की तरह चलाने के आरोप
विजय शर्मा ने कई शिकायतें और पत्र दिखाते हुए कहा कि नगर पालिका को प्राइवेट लिमिटेड की तरह चलाकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। दो सड़कों के रोड रेस्टोरेशन की जांच हुई, लेकिन आज तक कोई नतीजा नहीं आया। बांध मरम्मत घोटाला, टायर-ट्यूब घोटाला, मोटर मरम्मत घोटाला, थीम रोड ब्यूटीशियन घोटाला, रोड रेस्टोरेशन घोटाला ये सब अधिकारियों की मिलीभगत से हुए हैं।

हाल ही में 16 लाख के मुरम-कत्तल घोटाले में दो इंजीनियर और एक ठेकेदार जेल जा चुके हैं, लेकिन ईई और नपा अध्यक्ष पर कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब इन घोटालों पर कार्रवाई की मांग को लेकर धरना दिया गया, तो भ्रष्टाचार के संरक्षकों ने टेंट ही हटवा दिया।

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