शिवपुरी। वृद्ध लोगों को जब कोई ठिकाना नही मिलता तो वह मजबूरी में वृद्धाश्रम में रहने के लिए आते है। बाकी मन किसी को यहां पर रहने का नही होता। वृद्धाश्रम में वैसे तो कोई परेशानी नही है, लेकिन अपने परिवार के बिना रहने का दुख क्या होता है, यह तो वही जानता है जिस पर यह पीड़ा बीतती है। संपति देने के बाद भी बेटे बहू ने मारपीट कर घर से निकाला और हालात ऐसे बन गए कि घर पर दो वक्त की रोटी भी नसीब नही हुई। यह आपबीती वृद्धाश्रम में पिछले ५ माह से निवास कर रहे ७२ वर्षीय जगदीश सिंह कुशवाह निवासी कोलारस शिवपुरी ने काफी दुखी होते हुए सुनाई।
जगदीश ने आगे बताया कि वह पढ़े-लिखे होकर आरएमपी डॉक्टर है। उनके कोलारस में तीन मकान है और उनके दो बेटे अनिल कुशवाह, राजवीर व एक बेटी है। बेटी की शादी अशोकनगर कर दी और डेढ़ साल पहले एक बेटे राजवीर का सडक़ दुर्घटना में निधन हो गया। पत्नी वर्ष १९९० में ही बीमारी के कारण इस दुनिया को छोडक़र चली गई थी। उनके पास सबकुछ था, लेकिन पिछले ४-५ साल से उनका बड़ा बेटा अनिल व उसकी पत्नी उनको शारारिक व मानसिक रूप से प्रताडि़त करने लगी। बेटे-बहू ने मकान व एक कार सहित पूरी संपति पर कब्जा कर लिया, इसके बाद भी उनकी मारपीट कर घर से निकाल दिया। पिछले २ साल से वह अपने रिश्तेंदारों से लेकर परिचितों के घरों पर दिन निकालते रहे, लेकिन बाद में उन लोगों ने भी साथ छोड़ दिया तो वह मजबूर होकर ५ महिने पहले शिवपुरी के अस्पताल चौराहा स्थित वृद्धाश्रम में रहने के लिए आ गए।
बेटे-बहू व पोतों में से कोई नही आया मिलने
हालात ऐसे है कि ५ माह में बेटा अनिल से लेकर बहू या कोई भी रिश्तेदार उनसे मिलने के लिए वृद्धाश्रम में नही आया, जबकि सभी को इस बात की जानकारी है कि वह यहां पर रहते है। हालांकि जब उनका मन होता है तो वह दो या चार दिन के लिए अशोकनगर में बेटी सहित अन्य रिश्तेदारों के पास मिलने के लिए चले जाते है। पूरी जिंदगी परिवार के साथ रहा और अब वृद्धावस्था में यह दिन देखने को मिल रहे है, ऐसा कभी सोचा नही था। अब दीवाली का त्यौहार आ रहा है तो मन में विचार है कि अशोकनगर जाकर अपनी बेटी व उसके बच्चों से ही मिल आऊं। बेटी पर इतनी व्यवस्था नही है कि वह मुझे रख सकें, दो या चार दिन घर पर रखना अलग बात है।
सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत लगाया केस, अभी तक नही हुई सुनवाई
जगदीश ने बताया कि कोलारस में उनका तीन मंजिल मकान है जो कि उनके नाम पर है। जब बच्चों ने उनको घर से बाहर निकाल दिया तो गुस्से में आकर कोलारस एसटीएम कोर्ट में सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत मकान खाली कराने को लेकर केस लगाया था, लेकिन १६ महिने बीतने के बाद भी अभी तक कोई आदेश नही हुआ। हर सप्ताह एसडीएम कोर्ट जाता हूॅ तो एसडीएम बोलते है कि बस मामलें में आदेश होने को है, लेकिन अभी तक वह आदेश नही हो पाया। अगर एसडीएम कार्यालय से मकान खाली होकर मुझे मिल जाए तो यहां वृद्धाश्रम में रहने की उनको जरूरत नही है। वह मकान में रहकर उसकी दो दुकानों के किराए से आराम से आगे की जिंदगी निकाल सकते है। बाकी मरने के बाद तो यह मकान बेटे को ही मिलेगा। पर इस मामले में भी कोई सुनवाई नही हो रही।







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