दुकानदार डीएपी और यूरिया का स्टाक होने के बावजूद किसानों को खाद बांटने से कर रहा था इंकार
शिवपुरी। करैरा के ग्राम सिरसौद में शुक्रवार की दोपहर दुकानदारों द्वारा किसानों को खाद देने से इंकार करने पर किसानों ने सड़क पर चक्काजाम कर दिया। यह चककाजाम दो शिफ्ट में हुआ। पांच घंटे तक सड़क पर बबाल मचा रहा। मौके पर पहुंचे नायब तहसीलदार ने दुकानदारों के गोदामों को सील कर दिया है। इसके अलावा दुकानदारों पर एफआईआर भी करवाई जा रही है।
जानकारी के अनुसार सिरसौद के केके ट्रेडर्स, सोनल कृषि भंडार पर डीएपी व यूरिया खाद का स्टाक आया था। सूचना पर किसान दुकानदारों के यहां खाद लेने के लिए पहुंचे। बताया जा रहा है कि दुकानदारों ने किसानों को खाद देने से इंकार कर दिया। इस पर किसान नाराज हो गए और किसानों ने पिछोर-सिरसौद रोड पर चक्काजाम कर दिया। पहली शिफ्ट में पुरूषों ने दोपहर के समय चक्काजाम किया, लेकिन अमोला थाना प्रभारी अंशुल गुप्ता ने किसी तरह समझाइश देकर चक्काजाम खुलवाया। दूसरी बार शाम को करीब पांच बजे महिला किसानों ने रोड पर बैठकर जाम लगा दिया। किसानों को फिर से समझाइश दी गई और जाम खुलवाया गया। हालात बिगड़ने पर करैरा से नायब तहसीलदार विकास त्यागी मौके पर पहुंचे। उन्होंने केके टेडर्स और सोनल कृषि भंडार के चार गोदामाें को चैक किया। वहां पद यूरिया और डीएपी खाद पाया गया। चारों गोदामों को नायब तहसीलदार ने कृषि अधिकारियों की मौजूदगी में सील करवाया। बताया जा रहा है कि दोनों ही दुकानें किसी एक ही व्यापारी द्वारा संचालित की जाती हैं। ऐसे में व्यापारी के खिलाफ एफआईआर भी करवाई जा रही है।
ब्लैक मार्केटिंग से भी थे नाराज
किसान इसके अलावा ब्लैक मार्केटिंग से भी खफा नजर आ रहे थे। किसानों के अनुसार कोई दुकानदार अगर खाद का कट्टा दे भी रहा था तो 450 रुपये में यूरिया का कट्टा दे रहा था। वह भी तब जबकि दुकानदार की दुकान से दवा आदि सामग्री भी खरीदें। कुल मिलाकर किसानों को खाद के नाम पर ब्लैकमेलिंग का काम भी दुकानदारों द्वारा किया जा रहा है।
खाद के लिए खिड़की पर टंगी लाडली बहना
करैरा में हालात यह बने कि खाद के लिए महिला किसान भीड़ के बीच जब पुरूष किसानों के बीच लाइन में जद्दोजहद कर रही थीं तो उन्हें खिड़की तक पर लटकने को मजबूर हाेना पड़ गया। इस दौरान एक महिला किसान तो बैलेंस बिगड़ने पर नीचे गिरने से बच गई, उसे अन्य महिला किसानों ने हाथ से सहारा दे दिया, अन्यथा की स्थिति में वह घायल भी हो सकती थी।
न छांव की व्यवस्था न पीने का पानी
शासन ने सभी खाद वितरण केंद्रों पर आने वाले किसानों के लिए छांव और पानी के उचित प्रबंध करने के लिए प्रशासन को निर्देश दिए हैं, ताकि घंटों तक लाइन में लगे रहने वाले किसानों को धूप और प्यास न सताए, लेकिन जिम्मेदारों ने यह सारे प्रबंध सिर्फ कागजों में करके ही किसानों को सुविधाएं उपलब्ध करवाई हैं। धरातल पर हालात यह हैं कि किसानों के लिए किसी भी तरह के प्रबंध खाद वितरण केंद्र पर नहीं किए गए हैं। इसी के चलते करैरा में चक्काजाम, तहसील का घेराव और धरना प्रदर्शन जैसे हालात निर्मित हो चुके हैं। बाबजूद इसके जिम्मेदार इस ओर ध्यान देेने को तैयार नहीं हैं। किसानों को धूप में घंटों लाइन में लगने को मजबूर होना पड़ रहा है। करैरा खाद वितरण केंद्र पर किसानों को खाद वितरण शुरू होने के दो महीने बाद भी चिलचिलाती धूप में खाद लेने के लिए लंबी कतार में लगना पड़ रहा है। पीने के लिए पानी उन्हें या तो अपने गांव से लाना पड़ रहा है या फिर बाहर कहीं से पानी का प्रबंध कर रहे हैं। मौके पर खड़ा पानी का टैंकर सिर्फ शो-पीस बना हुआ है, उसमें लंबे समय से पानी नहीं भरा गया है।
यो बोले किसान
-हम सुबह चार बजे के यहां बैठे हैं, न तो यहां छांव की कोई व्यवस्था है और न ही पानी का कोई प्रबंध किया गया हैं यहां रखा पानी का टैंकर सूखा रखा है। घर से पानी की बाेतलें लेकर आना पड़ रहा है। खाद के कट्टे भी सिर्फ दो ही दे रहे हैं।
पार्वती
किसान, मुंगावली
इनका कहना है
-सिरसौद में दुकानदार ने किसानों को खाद देने से इंकार कर दिया था, इसी के चलते किसानों ने जाम लगा दिया था। दो फर्म के चार गोदामों को सील किया गया है और एफआईआर भी करवाई जा रही है।
विकास त्यागी
नायब तहसीलदार करैरा








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