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करैरा की उकायला गौशाला में गोवंश की दर्दनाक स्थिति: कीचड़, बीमारी और लापरवाही का शिकार बनी गायें, ग्रामीणों ने उठाई संचालन बदलने की मांग / Shivpuri News

आधा दर्जन से अधिक गायों के कंकाल मौके पर पाये गये
शिवपुरी: जनपद करैरा की ग्राम पंचायत उकायला में स्थित गौशाला इन दिनों एक दर्दनाक तस्वीर पेश कर रही है। यहां गोवंश की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि गायें कीचड़ भरे फर्श पर फिसलती-गिरती रहती हैं, जबकि पानी और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव उन्हें मौत के मुंह में धकेल रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि गौशाला का संचालन करने वाले बंसी वाले सेवा समूह की लापरवाही ने स्थिति को और बदतर बना दिया है। पूर्व में पशु चिकित्सकों की टीम ने यहां का दौरा किया था, जहां उन्होंने कई गंभीर कमियां उजागर कीं, लेकिन अब तक कोई सुधार नहीं हुआ। ग्रामीणों में संचालक के खिलाफ गहरा आक्रोश पनप रहा है और वे मांग कर रहे हैं कि गौशाला का नियंत्रण योग्य हाथों में सौंपा जाए ताकि गोवंश का उचित देखभाल हो सके। यहां का पूरा परिसर कीचड़ से लबालब भरा हुआ है। गायों के पैर आधा फुट तक कीचड़ में धंस जाते हैं, जिससे वे घंटों फंसी रहती हैं और हिल-डुल भी नहीं पातीं। बारिश के मौसम में यह समस्या और बढ़ जाती है, क्योंकि जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। गौशाला में रखी गई सैकड़ों गायों को इस दलदल में जीना पड़ रहा है, जो न केवल उनके स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है बल्कि उन्हें चोटिल भी कर रहा है। स्थानीय निवासी वीरू जाटव ने बताया कि “गायें यहां कीचड़ में फिसलकर गिरती हैं और उठ नहीं पातीं। कई बार तो वे घायल हो जाती हैं, लेकिन कोई देखभाल करने वाला नहीं मिलता।” इस तरह की स्थिति ने गोवंश को असहाय बना दिया है, जहां वे बुनियादी जरूरतों से वंचित हैं।
पानी की व्यवस्था का हाल और भी बदतर है। गौशाला में एक टंकी पूरी तरह खाली पड़ी हुई है, जबकि दूसरी में जो पानी है, वह गंदा और प्रदूषित हो चुका है। गोवंश को पीने के लिए साफ पानी नहीं मिल रहा हैं। उमस और बारिश के इस मौसम में पानी की कमी घातक साबित हो रही है, क्योंकि गायें प्यास से तड़पती रहती हैं। पूर्व में पशु अस्पताल के डॉक्टरों ने गौशाला का भ्रमण किया था, जहां उन्होंने पाया कि साफ-सफाई का पूरी तरह अभाव है। डॉक्टरों की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि बिजली की कोई सुविधा नहीं है, जिससे रात के समय देखभाल और अधिक मुश्किल हो जाती है। अंधेरे में गायें अपनी जगह से हिल नहीं पातीं और कोई आपात स्थिति में मदद नहीं पहुंच पाती। गोवंश की स्वास्थ्य स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। यहां आधा दर्जन से अधिक गोवंशों के कंकाल बिखरे पड़े हैं, जो लापरवाही की जीती-जागती मिसाल हैं। डॉक्टरों ने अपने निरीक्षण में पाया कि कई गायें अस्वस्थ हैं, उन्हें सही समय पर इलाज नहीं मिल रहा। बंसी वाले सेवा समूह द्वारा गौशाला का संचालन किया जा रहा है, लेकिन रखरखाव में घोर लापरवाही बरती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि समूह के सदस्य गोवंश की देखभाल पर ध्यान नहीं देते, जिससे बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। एक स्थानीय किसान राम सिंह ने कहा, “गायें बीमार पड़ती हैं और तड़प-तड़प कर मर जाती हैं। मरने के बाद उनके शवों को हटाया नहीं जाता, बल्कि वहीं छोड़ दिया जाता है। इससे बदबू फैलती है और वायरस का खतरा बढ़ जाता है, जो बाकी गोवंश को भी संक्रमित कर रहा है।”
इस लापरवाही का असर पूरे गोवंश पर पड़ रहा है। मृत गोवंशों के शवों से निकलने वाली दुर्गंध न केवल आसपास के इलाके को प्रभावित कर रही है बल्कि अन्य गायों में संक्रामक रोगों का प्रसार कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में बैक्टीरिया और वायरस तेजी से फैलते हैं, जो पूरे झुंड को खतरे में डाल देते हैं। गौशाला में कोई नियमित चिकित्सा जांच या टीकाकरण की व्यवस्था नहीं है, जिससे छोटी-मोटी बीमारियां भी जानलेवा बन जाती हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार उन्होंने संचालक से शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बजाय, समूह के सदस्य बहाने बनाते रहते हैं और समस्या को अनदेखा करते हैं।
ग्राम पंचायत के लोगों में अब संचालक के प्रति गहरा आक्रोश व्याप्त है। वे मानते हैं कि बंसी वाले सेवा समूह को गौशाला सौंपी गई थी ताकि गोवंश की रक्षा हो, लेकिन इसके उलट स्थिति और बिगड़ गई है। स्थानीय  ग्रामीण जनों ने आरोप लगाते हुए कहा कि “हमने कई बार जिला प्रशासन को सूचित किया है, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। अब ग्रामीण खुद आगे आ रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि गौशाला का नियंत्रण किसी योग्य संस्था या ग्राम पंचायत के हाथों में दिया जाए।” ग्रामीणों की मांग है कि सही तरीके से संचालन सुनिश्चित किया जाए, जिसमें नियमित साफ-सफाई, पानी और बिजली की व्यवस्था, साथ ही पशु चिकित्सकों की नियमित विजिट शामिल हो। वे चाहते हैं कि गोवंश को स्वस्थ रखने के लिए चारा, दवा और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
इस मुद्दे पर स्थानीय प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही सुधार नहीं हुआ तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे। गौशाला की यह दयनीय स्थिति न केवल पशु क्रूरता का मामला है बल्कि पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन रही है। उकायला के ग्रामीण अब उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी आवाज सुनी जाएगी और गोवंश को इस नर्क से मुक्ति मिलेगी। यदि स्थिति यथावत रही तो यह पूरे क्षेत्र में गो-रक्षा के प्रयासों पर सवालिया निशान लगा देगी।
इस घटना से साफ है कि गोवंश संरक्षण के नाम पर बनी गौशालाएं यदि सही हाथों में नहीं होंगी तो उनका उद्देश्य विफल हो जाएगा। ग्रामीणों की मांग पर ध्यान देकर प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए, ताकि आगे ऐसी लापरवाही न दोहराई जाए।

इनका कहना है..

गौ शाला का पूर्व में निरीक्षण किया गया था अनियमितताये पाई गई थी हमने जांच रिपोर्ट सौंप दी है एवं जनपद सीईओ को भी अवगत करा दिया है ।

डा. मनीष बांदिल पशु चिकित्सक करैरा

हमे जानकारी प्राप्त हो गई है जांच करवाकर उचित कार्रवाई की जायेगी

हेमंत सूत्रकार जनपद सीईओ करैरा

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