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गलत साक्ष्य देने पर जिला क्षय अधिकारी डॉ. व्यास को 6 माह की सजा / Shivpuri News

शिवपुरी: 14 साल पुराने एक मामले में न्यायालय में मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत करने वाले जिला क्षय अधिकारी डॉक्टर आशीष व्यास को 6 महीने के साधारण कारावास और 10 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा मिली है। शासन की ओर से पैरवी शशि शर्मा, सहायक जिला अभियोजन अधिकारी ने की।


अभियोजन पक्ष से मिली जानकारी के अनुसार न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आरोपी डॉ. आशीष व्यास पर धारा-193 भादवि के तहत यह मामला चला जिसमें अब से 14 साल पुराने प्रकरण क्र.-08/2009 मप्र राज्य द्वारा नरवर आरक्षी केन्द्र विरुद्ध कैलाश यादव और अन्य में डॉ. आशीष व्यास द्वारा अभियोजन साक्षी क्रमांक-4 के रूप में न केवल अभियोजन द्वारा बताए जा रहे आहत गण मुरारी लाल, दक्खोबाई और रामबती बाई का चिकित्सीय परीक्षण कर अपने मत दिए बल्कि साक्ष्य में यह भी प्रकट किया कि उस प्रकार का एक सहअभियुक्त मदनसिंह 17 अक्टूबर 2008 को भर्ती हुआ और शाम 5 बजे डिस्चार्ज कर दिया। जिसका प्रमाण पत्र डॉ. व्यास द्वारा दिया गया।

विभिन्न कारण और आधार देते हुए डॉ. आशीष द्वारा यह प्रमाण पत्र कूटरचित किया और न्यायालय में अभियोजन साक्षी क्रमांक-4 के रूप में शपथ पर झूठे साक्ष्य प्रस्तुत किए। इसलिए साक्षी डॉ. आशीष व्यास पर मिथ्या साक्ष्य देने के संबंध में कार्रवाई दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 344 के अंतर्गत19 माई 2010 को एमजेसी क्रमांक-02/10 के रुप में संस्थित किया।

न्यायालय द्वारा अभियोजन के तर्कों से सहमत होते हुए आरोपी को धारा-193 भादवि में 6 माह का साधारण कारावास और कुल-10,000/- रुपए के अर्थदंड से दंडित किया गया। सहायक जिला अभियोजन अधिकारी शशि शर्मा ने साक्ष्य के आधार पर यह कार्रवाई होना बताया वही डॉ. आशीष व्यास ने इस मामले में सुनवाई के लिए अपर कोर्ट में अपील करने की बात कही।

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