शिवपुरी। 10 साल पहले दंपति को जलाकर मौत के घाट उतरने के मामले में न्यायालय ने लोक अभियोजक की दलीलों से सहमत होते हुए मुख्य अभियुक्त आशा सहगल को दोहरा आजीवन कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। एक अन्य आरोपित आशा के पति मन्नी सहगल की मौत हो चुकी है। इनके अलावा दो अन्य आरोपितों को संदेह के आधार पर बरी कर दिया गया है।
चौथे अपर सत्र न्यायाधीश अयाज मोहम्मद विदिशा ने हत्या करने वाले आरोपितों में आशा सहगल निवासी रन्नौद जिला शिवपुरी को धारा 302/34 भादवि में आजीवन कारावास व 5000 रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया। प्रकरण की पैरवी अतिरिक्त जिला लोक अभियोजन अधिकारी विदिशा मनीष कथोरिया द्वारा की गई। समय-समय पर जिला लोक अभियोजन अधिकारी जेएस तोमर के द्वारा मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
अतिरिक्त जिला लोक अभियोजन अधिकारी मनीष कथोरिया ने घटना के बारे में बताया कि 28 अगस्त 2012 को फरियादिया लंकेश ने जिला अस्पताल विदिशा में रिपोर्ट लेख कराई थी कि मेरी सौतेली मां कृष्णा रानी, भाई भूपेन्द्र मकान खाली कराना चाहते हैं। इसी बात को लेकर उसी दिन सुबह 9.30 बजे मेरी सौतेली मां कृष्णा बाई, भाई भूपेन्द्र, मामा मन्नी उर्फ मनीष सहगल एवं मामी आषा सहगल सभी लोग एक राय होकर एक साथ आये और विवाद करने लगे। मैं व मेरी पत्नि बोलने लगे तो उन्होंने कहा या तो समझौता करो या मकान खाली कर दो। बहसबाजी हो ही रही थी कि जान से मार डालने की नियत से मामी आशा सहगल ने हाथ में लिये मिट्टी के तेल की अद्दी लंकेश की पत्नी रश्मि और मुझ पर उड़ेल दिया और आग लगा दी, जिससे मेरी पत्नी जल गई। मैं अपनी पत्नी की आग बुझाने लगा तो मैं भी जल गया। हमारे किरायेदार और मेरे बच्चे विशाल ने पानी डालकर आग बुझाई। विवेचना के दौरान फरियादी लंकेश एवं उसकी पत्नी रश्मि की आरोपितों द्वारा आग लगाये जाने से मृत्यु हो जाने के कारण प्रकरण में भादवि की धारा 302/34 का इजाफा कर न्यायालय के समक्ष अभियोग पत्र पेश किया गया।
विचारण के दौरान आरोपित मन्नी उर्फ मनीष सहगल की मृत्यु हो गई।प्रकरण में अतिरिक्त जिला लोक अभियोजन अधिकारी मनीष कथोरिया द्वारा लिखित में अंतिम तर्क प्रस्तुत करने के साथ मौखिक दलील पेश की कि मामी ने मात्र मकान की खातिर जान से मार डालने की नियत से लंकेश व उसकी पत्नी रश्मि को आग लगाकर हत्या कर दी।
आरोपितों को क्रूरतापूर्ण कृत्य के लिए सजा नहीं दी गई तो लंकेश के बच्चों का जीवन खतरे में है। न्यायालय से निवेदन है कि इस प्रकार के क्रूरता पूर्ण कृत्यों के लिए अभियुक्तगण को कठोर से कठोर दण्ड देकर बच्चों को न्याय प्रदान करें। न्यायालय अतिरिक्त जिला लोक अभियोजन अधिकारी विदिशा मनीष कथोरिया के तर्कों से सहमत होकर आरोपीया आशा सहगल के विरूद्ध मामले को प्रमाणित पाते हुए आजीवन कारावास (2) की सजा सुनाई।






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