करैरा। भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल के हिमवीरों ने कोरोना महामारी के दौरान देश सेवा का किया कार्य। आरंभ में जब कोरोना शुरुआत हुआ तो बहुत से भारतीय विदेशों में फंसे हुए थे। कोरोना महामारी फैलने के समय दूसरे देशों में कोरोना महामारी से हालात बेकाबू थे। विदेशों में भारतीय की सहायता का कोई चारा नहीं था। क्योंकि उस समय कोरोना महामारी के डर से कोई भी पीड़ितों के पास जाकर मदद करने के लिए तैयार नहीं था।
विदेशों में भारतीय पीड़ितों के लिए खाने, दवा व देख रेख का अभाव था ऐसे हालात में पीडित लोगों के पास जीवन से जूझने के अलावा कोई चारा नही था। इन आपात के हालात में भारत सरकार ने चीन में वुहान तथा अन्य देशों में जैसे हांगकांग, ईरान, अरब, मिस्र व अफ्रीकी देशों से अपने नागरिकों को विशेष विमानों से भारत लाया गया। इन महामारी के हालात में भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल ने दिल्ली में छावला में स्थित कैम्प में क्वारेंटाइन सेन्टर में विदेशों आने वाले भारतीयों को आइसोलेशन में रखा गया।
जान पर खेलकर की कोरोना पीड़ितों की सहायता
आईटीबीपी ने दिल्ली में क्वारेंटाइन केन्द्र बनाया। इस केंद्र में विदेशों से आने वाले भारतीयों व विदेशियों को रखा जाता था व उनका इलाज भी किया जाता था। पहले विमान से लोगों को दिल्ली एयरपोर्ट लाया जाता था, फिर बल के वाहन से क्वारेंटाइन केन्द्र में लाया जाता था। इस प्रकार से कोरोना के पीड़ितों से निपटने में भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल के कर्मचारियों न अपनी जान पर खेलकर कोरोना पीडितों की सहायता की।
इस दौरान कई जवान कोरोना से स्वयं भी पीडित हो गए या फिर अपनी जान से हाथ भी धो बैठे। कोरोना महामारी की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने दिल्ली के छत्तरपुर इलाके में 10,000 बिस्तरों के कोरोना चिकित्सालय का निर्माण करवाया। इस चिकित्सालय को भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल की देख-रेख में चलाया गया।






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