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नोटबंदी: दांव पर लगी थी मरीज की जान, अस्पताल ने मोड़ा मुंह तो मसीहा बनकर आया बैंक मैनेजरनोटबंदी: दांव पर लगी थी मरीज की जान, अस्पताल ने मोड़ा मुंह तो मसीहा बनकर आया बैंक मैनेजर

500 और 1000 रुपए के नोट बंद होने की वजह देशभर में बैंकों के बाहर लंबी-लंबी कतारें और बैंककर्मियों पर काम का बोझ पड़ने की खबरें सुर्खियां बन रही हैैं. तमाम दिक्कतों के बीच एक बैंक मैनेजर ने मानवता की मिसाल कायम की हैं. मैनेजर की वजह से एक शख्स का सही वक्त पर ऑपरेशन हो सका.यह बेहद भावुक कर देने वाला मामला मध्यप्रदेश के खंडवा शहर का है. यहां रहने वाले रिटायर्ड कर्मचारी छगनलाल एक हादसे का शिकार हो गए. इस वजह से उन्हें ऑपरेशन के लिए एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती किया गया. लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने नए नोट के बिना ऑपरेशन करने से इनकार कर दिया.छगनलाल के परिजन पैसे निकालने बैंक पहुंचे तो वहां लोगों की लम्बी कतार थी. काफी देर बाद उनका नंबर आया तो घायल छगनलाल के हस्ताक्षर का मिलान नहीं होने से बैंककर्मियों ने पैसे देने में खुद को असमर्थ बताया.परिजन खाते में पैसे होने के बावजूद घंटों भटकते रहें. बैंक मैनेजर प्रदीप यादव की जानकारी में सारा मामला आया तो वह मदद के लिए खुद आगे आए.मैनेजर यादव ने बैंक से 24 हजार रुपए लिए और सीधे अस्पताल पहुंच गए. यहां उन्होंने अपने अपने सामने ही बैकिंग से जुड़ी सारी प्रकिया पूरी कर छगनलाल को 24 हजार रुपए सौप दिए.मैनेजर प्रदीप यादव की इस नेक पहल से परिजनों को रुपए मिले, जिसके बाद ही छगनलाल का ऑपरेशन शुरू हो सका.केंद्र सरकार ने 8 नवंबर की रात से 500 और 1000 रुपए के पुराने नोट बंद कर दिए, जिसके बाद देशभर में मारपीट, लाठीचार्ज और विवाद की खबरों के बीच खंडवा का यह मामला हर किसी के लिए मिसाल हैं.यह बेहद भावुक कर देने वाला मामला मध्यप्रदेश के खंडवा शहर का है. यहां रहने वाले रिटायर्ड कर्मचारी छगनलाल एक हादसे का शिकार हो गए. इस वजह से उन्हें ऑपरेशन के लिए एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती किया गया. लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने नए नोट के बिना ऑपरेशन करने से इनकार कर दिया.
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