
महज औपचारिकताएं पूरी कर बैंक मैनेजर को बचाने के प्रयास में जांच टीम
बैंक के सीसीटीवी फुटेज में रिकॉर्ड है पूरा घटनाक्रम
खनियांधाना। सरकार की नोट बंदी की घोषणा के बाद जहां पूरे देश में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जा रहीं हैं वहीं दूसरी ओर खनियांधाना के गांधी चौक स्थित भारतीय स्टेट बैंक में पन्द्रह दिनों पूर्व एक उपभोक्ता द्वारा जमा कराये जाने वाले नोटों को मेनेजर द्वारा बदलने के मामले में आज तक कोई कार्यवाही नहीं होने से स्थानीय नागरिकों में भारी रोष है। पीडि़त उपभोक्ता ने इसकी शिकायत तत्काल बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों सहित मुख्यमंत्री शिकायत 181 तथा पुलिस स्टेशन में की थी लेकिन इतना समय बीत जाने पर भी कोई कार्यवाही नहीं होना पूरे प्रकरण पर सवालिया निशान लगा रहा है। बैंक अधिकारी जहां पूरे मामले की जांच करने के वाद कोई कार्यवाही की बात कह रहे हैं वहीं पुलिस भी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही एफआइआर दर्ज करने की बात कह रहे हैं। यहां तक कि पुलिस द्वारा जब बैंक के सीसीटीवी फुटेज की रिकार्डिंग मांगी गई तो बैंक ने उसे भी उपलब्ध नहीं किया, इधर शिकायतकर्ता को बार-बार शिकायत वापिस लेने की धमकी मिल रहीं है।
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क्या है पूरा मामला
घटनाक्रम के मुताबिक 30 नवंबर को कस्बे के राजेश जैन पुत्र प्रकाश चंद अपने भाई धीरज जैन जो कि एम.पी.ऑनलाइन कियोस्क चलाते हैं, के बैंक खाते में 41000 रुपये जमा कराने गांधी चौक शाखा पहुंचे जिसमें 2000 व 100 रुपये के नये नोट थे, वहां कैश काउंटर पर बैठे कर्मचारी ने किसी दूसरे के खाते में रकम जमा करने से मना कर दिया जिसकी शिकायत उसने गेट पर खड़े शाखा प्रबंधक श्री रामशरण गुप्ता से की । मैनेजर ने युवक को अपने केविन में बिठाया तथा पूरे नोट स्वयं ले कर नयी जमा पर्ची भर कर एक कर्मचारी द्वारा रकम जमा कराने काउंटर पर भेज दी। जब राजेश ने देखा कि उसके द्वारा दिये गये नोट बदल कर मेनेजर ने अपनी जेब से निकाल कर 1000 – 500 के नोट मिला दिये तो उसने आपत्ति दर्ज कराई कि उसने तो नये नोट दिये हैं तो उन्हें क्यों बदल दिया जिस पर उसके रुपये वापिस फैंकते हुये जमा नहीं किये व बैंक से वाहर करा दिया जिसकी शिकायत उसने तुरंत बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक सहित 181 तथा थाने में की लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई।
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बैंक प्रबंधन मामला दबाने के प्रयास में
शिकायत के दो दिन बाद ही एसबीआई के क्षेत्रीय प्रबंधक ने खनियांधाना पहुंच कर मामले को समझा जिसमें अधिकांश लोगों ने बैंक मेनेजर के व्यवहार, बोलचाल व दवाव बनाकर जबरन बीमा पॉलिसी बेचने सहित हर काम में रुपये मांगने जैसी गंभीर शिकायतें कीं जिसके बाद प्रबंधन द्वारा गत दिवस जांच टीम भेजी गई जिसमें जांच अधिकारी श्री उम्मेद गोलेचा ने दोनों पक्षों के बयान ले कर कार्यवाही का आश्वान दिया, लेकिन जिस प्रकार जांच टीम ने औपचारिकतायें निभाते हुये बैंक मैनेजर के पक्ष के लोगों से मिल कर वयान लिये व शिकायत करने वालों को टरका दिया उसे देख कर लगता है कि पूरा प्रबंधन मिल कर मामले को दबाने के प्रयास में है।
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जमकर बदले गये कमीशन में नोट
बैक के बाहर खड़े कई लोगोंं का तो यहां तक कहना था कि नोटबंदी के बाद अभी तक के बैंक के कारनामों की बारीकी से जांच हो तो कमीशन के फेर में कई लोंगो के इक_े लाखों रुपये नये नोटों में बदले गये हैं वही लोग इस शिकायत को दबाने में युवक को धमका रहे हैं ताकि कहीं पूरी जांच हो गई तो कई गड़बडिय़ां सामने आ सकतीं हैं ।
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क्या कहते हैं शिकायर्ता
मेरे साथ नोट बदलने की घटना पूरी बैंक के सीसीटीवी में रिकार्ड होने के वाबजूद जांच के नाम पर हमें पन्द्रह दिनों से परेशान किया जा रहा है, ना ही बैंक के बड़े अधिकारी सुन रहे हैं और ना ही पुलिस एफआईआर दर्ज कर रही है। मुझे न्याय नहीं मिला तो में बैंक की चेयरमैन सहित रिजर्व बैंक व श्वष्ठ तक इस मामले को ले जाऊंगा
राजेश जैन, शिकायतकर्ता
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इनका कहना है
मुझे बैंक द्वारा पूरे मामले की जांच करने भेजा गया है जिसमें मैंने दोनो पक्षों की बात सुनी है तथा अन्य उपभोक्ताओं से भी चर्चा की है, अधिकांश ग्राहकों में मैनेजर के प्रति रोष है जिसकी रिपोर्ट हम वरिष्ठ अधिकारियों को देंगे।
उम्मेद गोलेचा
जांच अधिकारी, भारतीय स्टेट बैंक






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