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दिन दूना रात चौगुना फल फूल रहा है पानी का काला कारोबार


मिनरल के नाम पर 30 प्रतिशत आबादी को सप्लाई कर रहे अमानक पानी

केदार सिंह गोलिया
शिवपुरी। मिनरल वाटर के नाम पर शहर की एक तिहाई आबादी को अमानक पानी परोसा जा रहा है। गर्मी बढ़ते ही पानी की आपूर्ति में और इजाफा हुआ है। अशुद्ध पानी के सेवन के कारण छह महीने में 10 हजार से अधिक लोगों को पेट रोग की तकलीफ हुई है। इस मामले में पानी के सैंपल अमानक पाए जाने के बाद भी नगर निगम कार्रवाई से पीछे है।
शहर में इस समय 12 से अधिक पानी आपूर्ति करने वाली कंपनियां काम कर रही हैं। तापमान बढ़ते ही शुद्ध पानी की मांग बढ़ गई है। सर्दियों में जहां 20 से 25 हजार लीटर पानी की खपत प्रतिदिन रहती है वहां गर्मियों में इसकी मांग व आपूर्ति बढ़कर 50 हजार लीटर तक पहुंच जाती है। जो वाटर सप्लायर पुराने हैं वे प्रतिदिन 12 से 14 हजार लीटर पानी की आपूर्ति अपने ग्राहकों को कर रहे हैं। जिनका कारोबार तीन से चार साल पुराना है वे प्रतिदिन सात से आठ हजार लीटर पानी बेच रहे हैं। इस प्रकार शहर के लोगों को कई कारोबारी अमानक पानी की आपूर्ति कर रहे हैं। पानी मानक है या अमानक इसकी पुष्टि, खाद्य सुरक्षा विभाग की टेस्टिंग लैब रिपोर्ट से होती है। हाल ही में अंबाह की पैकेज ड्रिंकिंग वाटर रिपोर्ट मिस ब्रांड आई है। इस रिपोर्ट को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग, एडीएम कोर्ट में अभियोजन की कार्रवाई कर रहा है।

10 हजार से अधिक पेट रोगी 

मिनरल वाटर के नाम पर अमानक पानी पीने से लोग पेट रोग की तकलीफ से परेशान हो रहे हैं। बीते छह महीनों में जिला अस्पताल की ओपीडी के आंकड़ों पर गौर करें तो पेट रोग के 10648 मरीज इलाज के लिए आए हैं। सर्वाधिक 2499 मरीज फरवरी में दर्ज हुए हैं। गंदे पानी के सेवन से लोगों को पेट दर्द के अलावा टाइफाइड व अमीबिऐसिस रोग हो रहे हैं। छह महीने में पेट दर्द के मरीजों की संख्या जनवरी में 1755, फरवरी में 2499, दिसंबर में 1465, नवंबर में 1711, अक्टूबर में 1496, सितंबर में 1722 बढ़ी है।

40 से 50 टीडीएस का पानी शुद्ध 
ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड के मानकों के मुताबिक, 40 से 60 टीडीएस के पानी को पीने योग्य माना गया है। इससे अधिक टीडीएस के जल को पीने योग्य नहीं माना गया है। शहर में लोग पानी मोल खरीदकर पी तो रहे हैं लेकिन उन्हें मानक की जानकारी नहीं होने से वे अमानक पानी का सेवन कर रहे हैं।

पैसा बचाने सेहत से कर रहे खिलवाड़ 
मिनरल वाटर के कारोबार में पैसा बचाने व मुनाफा कमाने के फेर में कई कारोबारी लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। उनका यह कारोबार खुलेआम चल रहा है। ऐसे कारोबारियों के प्लांटों से शहर में परोसा जा रहा पानी 80 से 100 टीडीएस का है। अधिक टीडीएस के पानी को पीने से लोग पेट रोगों की चपेट में पहुंच रहे हैं। पानी की शुद्धता बढ़ाने के लिए ऐसे कारोबारी मेम्बरान के प्रेशर के माध्यम से पानी को शुद्ध करने पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। कई प्लांटों में यूवी सिस्टम तक नहीं लगे हैं। शिवपुरी जिले में पानी का कारोबार कर रहे व्यवसायियों में से कई के पास ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड का लाइसेंस नहीं है। इस कारण खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों के पास पानी के सैंपल लेने व अमानक पानी के खिलाफ कार्रवाई के अधिकार भी नहीं हैं। 20-20 लीटर की केन में पानी भरकर सप्लाई कर रहे कारोबारियों की जांच-पड़ताल करने व दोषी पाए जाने की दशा में उनके खिलाफ कार्रवाई के अधिकार प्रशासन के पास हैं।

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