पुलिस कट्टा, दारू व डकैती की योजना बनाते बदमाशों को पकडऩे में जुटी-
नहीं, करती कबाड़ा व्यवसाइयों पर कोई कार्यवाही
हिरोज खान
करैरा। करैरा अनुविभाग अंतर्गत आने वाले थाना क्षेत्र अमोला, सुरवाया, करेरा, दिनारा, नरवर, सीहोर में कबाड़ा कारोबारियों का कारोबार बड़े पैमाने पर चल रहा है प्रत्येक कबाड़ा व्यवसायी प्रतिदिन एक गाड़ी कबाड़े की भरकर भेजता है प्रत्येक गाड़ी लगभग एक लाख रुपए के हिसाब से एक कबाड़ा व्यवसायी एक माह में 30 लाख रुपए कमाता है जिस के हिसाब से सरकार को दिए जाने वाला टैक्स लगभग साढे तीन लाख रुपए महीना होता है लेकिन उक्त गोरखधंधा सरकार का टैक्स चुकाए बिना फर्जी तरीके से यहां संचालित हो रहा है जिस पर आज तक ना तो कभी सेल टैक्स विभाग ना कभी इनकम टैक्स विभाग द्वारा कोई वैधानिक कार्रवाई की गयी है जिसके चलते पिछले 10 वर्षों में ही देखा जाए तो इन लोगों ने फर्श से अर्श का सफर तय कर लिया है यदि इन कबाड़ा व्यवसाइयों का पिछले 10 वर्षों का रिकॉर्ड देख लिया जाए तो इन पर चोरी का माल खरीदने के दर्जनों मामले दर्ज होंगे इसके बावजूद भी क्षेत्र की पुलिस इनके गोदामों पर कभी चेकिंग करने नहीं जाती जिस वजह से यह लोग खुलेआम चोरी का सामान खरीदते हैं साथ ही इन लोगों के द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से वाहनों को खरीदकर काटा जा रहा है और करेरा अनुविभाग की पुलिस है कि कहीं शराब की 2 – 4 पेटी पकड़कर कहीं, कट्टा सहित आरोपी पकड़कर तो कहीं डकैती डालने की योजना बनाने वालों को पकड़कर अपनी पीठ थपथपा रही है और वाह वाही लूटने का प्रयास कर रही है जबकि हकीकत यह है कि डकैती डालने के बाद डकैतों को पकडऩे में पुलिस अधिकतर असफल नजर आती है वही चोरों को भी की गई चोरियों के लिए ट्रेस करने में पुलिस असफल नजर आती है और बड़े स्तर पर गांव गांव में अवैध कलारियो का संचालन कर रहे लाइसेंसी ठेकेदारों पर भी कार्यवाही करने में पुलिस असफल नजर आती है आज तक पुलिस के द्वारा पिछले 10 वर्षों में किसी भी लाइसेंसी ठेकेदार पर शराब का कोई प्रकरण दर्ज नहीं किया गया जो कि स्वयं में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है।फोरलाइन हाईवे से करोड़ों के लोहे का माल गायब
पिछले 5 वर्षों में हाई हाईवे निर्माण से लेकर आज तक चोरों द्वारा यहां से करोडो रुपये का सामान चोरी किया गया जिसमें लोहे की जालियां, बैरीकेट, साइन बोर्ड, हाईवे किनारे लगे क्चस्हृरु की ओवरहेड लाइनों के खंबे, लोहे के गाडर, स्टॉपर आदि सहित अन्य समान चोरी हुआ व वर्तमान में चोरी हो रहा है जो खुलेआम यह कबाड़ा व्यवसाइयों द्वारा खरीदा जा रहा हैं। यदि पुलिस सही में चोरी का खुलासा करना चाहती है तो इन चोरों के संरक्षकों को पकडऩा जरूरी होगा। ईमानदार अधिकारी इन कबाडिय़ों के गोदामों का सही से निरीक्षण करें तो इनके गोदामों में 70 से 80त्न माल चोरी का बरामद होगा।
पूर्व कलेक्टर ने दिए थे वेरिफिकेशन के निर्देश
5-6 वर्ष पूर्व शिवपुरी में पदस्थ तत्कालीन कलेक्टर जॉन किंग्सली द्वारा कबाड़ा व्यवसाई के यहां से हथगोलों के खोल मिलने पर सख्ती दिखाते हुए जिले भर के समस्त थानों को इन कबाडिय़ों के पुलिस वेरिफिकेशन तथा समय-समय पर गोदामों के निरीक्षण के निर्देश जारी किए थे। जो उनके कार्यकाल में तो जारी रहे उनके जाने के बाद से उक्त आदेश ठंडे बस्ते में वर्तमान में डले नजर आ रहे हैं।
थानों के आगे से निकलता है चोरी का माल
जानकारी के अनुसार प्रत्येक कबाड़ा व्यवसायी प्रतिदिन एक गाड़ी माल भरकर भेजते हैं जोकि थानों के सामने से होकर निकलती हैं लेकिन पुलिस के द्वारा कभी इनको रोका नहीं जाता जिसके चलते लगता है कि क्षेत्र में हो रही चोरियों की वारदातों को पुलिस ही सबसे अधिक बढ़ावा दे रही है। यदि वाहनों की जांच मौके पर ही कर ली जाए तो चोरी का काफी माल उन ट्रकों में पकड़ा जाएगा लेकिन पुलिस ऐसा करने में परहेज क्यों करती है यह बात समझ से परे हैं।
परिवहन विभाग के नियमों के विरुद्ध काट रहे वाहन
नियमानुसार वाहन काटने हेतु सर्वप्रथम आरटीओ विभाग से अनुमति लेना पड़ती है उसके बाद वाहन का नंबर सिलेंडर करना पड़ता है फिर कहीं जाकर आप बहन को काट सकते हैं लेकिन करेरा क्षेत्र में कोई अनुमति लिए बिना ही वाहन काटे जा रहे है और अनुमति ले भी कैसे क्योंकि अनुमति रजिस्टर्ड वाहनों की मिलती है इंलिगल(चोरी) वाहनों की नही यह सब यहाँ खुलेआम किया जा रहा है। वाहनों को यहां काटकर उनके पार्ट्स महंगे दामों पर इन कबाडिय़ों द्वारा बेचे जा रहे हैं।
होनी चाहिये इन कबडियो की संपत्ति की जांच
अवैध तरीके से कम समय में सबसे अधिक संपत्ति अर्जित करने वाले इन कबाड़ा व्यवसाइयों की पिछले 10 वर्षों की जांच यदि जांच एजेंसीयों द्वारा कर कराई जाये तो सरकार को लाखों रुपए के राजस्व की चोरी के खुलासे के साथ साथ इनकी बैकडोर इनकम के कई मामले उजागर होकर बड़े स्तर पर क्षेत्र में हुई चोरियों के खुलासे होते नजर आएंगे।






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