सीएम हेल्पलाइन कि शिकायत को वापस लेने के लिये सीबीएमओ ने दी पत्रकार को धमकी
पत्रकार ने एसपी से लगाई न्याय में गुहार
राजगढ़ (रवि राठौड़ ) । यूँ तो सरदारपुर का सामुदायिक स्वास्थ्य कैन्द्र कई प्रकार कि अनियमितता से भरा पड़ा है! लेकिन पत्रकार को धमकाने का मामला तब प्रकाश मे आया जब सरदारपुर के जानेमाने बेबाक कलम के धनी पत्रकार शैलेन्द्र पँवार को भी यहाँ कि सीबीएमओ डॉ. शीला मुजाल्दा ने अपने मोबाइल नम्बर से 24 अगस्त को फोन कर महिला आयोग में मानसिक प्रताड़ना एवं शासकीय कार्य में बाँधा डालने का प्रकरण दर्ज करने कि धमकी दे डाली वो भी इसलिए कि पत्रकार शैलेन्द्र पँवार ने आशा सहयोगी दुर्गा वर्मा, सुनिता सोलंकी और संतोष डामेचा कि सीएम हेल्पलाईन पर शिकायत दर्ज करवाई थी कि ये तीनों अपने कार्य क्षैत्र में भ्रमण करने के बजाय बीसीएम आॅफिस का ही कार्य करती या बैठी देखी जाती है जिससे मजरे, टोले व कस्बों मे जच्चा-बच्चा को आशा सहयोगीयो का पूरी तरह मार्गदर्शन नही मिल पा रहा है तथा उक्त आशासहयोगी बीसीएम आॅफिस से ही कागजो पर अपना कार्य पूर्ण बता देती है! वहीं बेबाक पत्रकार शैलेन्द्र पँवार ने इस मामले से सम्बंधित सुचना का अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत तीन आवेदन भी प्रस्तुत किये हुए है जिससे सीबीएमओ साहीबा कि बौखलाहट इतनी बड़ गई कि वे पत्रकार को भी दबंगई दिखा बैठी और फोन करके सीधे धौस दे डाली कि पत्रकार सीएम हेल्पलाईन पर कि गई अपनी शिकायत को वापस नहीं लेंगे तो महिला आयोग में आशा सहयोगीयो के साथ जाकर मानसिक प्रताड़ना एवं शासकीय कार्य मे बाँधा डालने का प्रकरण दर्ज करवा देगी और कहने लगी पुंछ लेना सभी पत्रकारों से कि मेरा व्यवहार कैसा है, हाँ देख लेना नहीं तो फिर मत कहना कुछ हो जाये तो? इधर जब पत्रकार शैलेन्द्र पँवार 24 अगस्त कि शाम 6:30 बजे के लगभग सरदारपुर से राजगढ़ कि ओर जा रहे थे तो तीन अज्ञात लोगों ने उन्हें माही पुल पर रोक लिया और एक आवेदन (जिस पर लिखा था कि मेरे द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य कैन्द्र सरदारपुर कि सुचना का अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत चाही गई सभी जानकारी आज दिनांक तक मुझे प्राप्त हो चुकी है तथा सीएम हेल्पलाईन पर कि गई शिकायत का निराकरण हो चुका है) पर पत्रकार शैलेन्द्र पँवार से हस्ताक्षर करने के लिये झूमाझपटी करते हुए डराने धमकाने लगें! पत्रकार किसी प्रकार उन अज्ञात तीनों बदमाशो से बचावकर निकलने में कमयाब हो गये!
इस घटनाक्रम से खतरा महशुस होने पर पत्रकार शैलेन्द्र पँवार ने धार पुलिस अधिक्षक विरेन्द्रसिंह, जिला चिकित्सा अधिकारी पनिका, पुलिस थाना अजाक धार आनन्द तिवारी , पुलिस अनुविभागीय अधिकारी सरदारपुर, सरदारपुर थाना प्रभारी कैलाश बारिया को आवेदन देकर धौस धमकी देने वालों पर प्रकरण पंजीबद्ध करने कि माँग कि है तथा धमकी भरी आडीयो रिकार्डींग सीडी कैसेट में अपलोड कर तथा आठ पृष्ठ संलग्न कर पुख्ता सबूतो एवं प्रमाण के साथ आवेदन प्रस्तुत किये है!
गौरतलब है कि पूर्व में भी सीबीएमओ डॉ. शीला मुजाल्दा द्वारा स्वास्थ्य कैन्द्र में अनियमितताओ का कवरेज करने पहुँचे पत्रकारों के कैमरे झीनाझपटी कर अभद्रता दिखाई थी! इतने बड़े जिम्मेदाराना पद पर रहते किसी अधिकारी द्वारा ऐसा व्यवहार करना कई सवालों को जन्म दे रहा है! वहीं पूरे मामले को लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति के उप संचालक से चर्चा कि गई तो उन्होंने ने ऐसे व्यवहार को अनुचित ठहराते हुए सीबीएमओ डॉ शीला मुजाल्दा के विरूध्द न्यायोचित कार्यवाई कि बात कही है! वहीं पत्रकार शैलेन्द्र पँवार ने बताया कि सीबीएमओ डॉ. शीला मुजाल्दा के तुच्छ व्यवहार को देखते हुए ऐसा प्रतित होता है कि अपना बचाव करने के लिये वे पत्रकार पर किसी प्रकार से झूठे प्रकरण दर्ज करवा सकती है! अब देखना यह होगा कि विभाग के उच्च अधिकारीगण ऐसी सीबीएमओ के विरूध्द कोई न्यायोचित ठोस कदम उठाते पायेगे या उन्है भी किसी प्रकार सीबीएमओ साहीबा मानसिक प्रताड़ना और शासकीय कार्य मे बाँधा डालने कि धौंस दोगे! अब ये तो वही उदाहरण हो गया कि चौर जी भर क चौरीयाँ करे और पुलिस पकड़े तो मानसिक प्रताड़ना हो गई! इस घटना के बाद समस्त पत्रकार जगत में रोस है क्यो कि शैलेन्द्र पँवार निष्पक्ष, साहसी एवं बेबाक समाचारों के कारण सरदारपुर क्षैत्र के भ्रष्टाचार से पड़ीत लोगों के लिये किसी मसीहा से कम नहीं है! इस क्षैत्र के कई भ्रष्टाचारीयो कि अब तक निष्पक्षतापूर्वक समाचार प्रकाशित कर चुके है जिससे अवैध गतिविधियों में लिप्त अधिकारी, नेता आदि शैलेन्द्र पँवार का नाम सामने आते ही किसी ना किसी प्रकार उन्हें आये दिनों मानसिक रूप से प्रताड़ित करते रहते है! इसके पूर्व में भी रिंगनोद-कंजरोटा रोड़ पर राजगढ़ कि ओर आते समय कुछ बदमाशो ने उनकी हत्या का प्रयास करते हुए दो फायर किये थे जिसमें वे किसी प्रकार वहाँ से बच निकले और बदमाशो कि योजना असफल हो गई थी! इसके बाद भी अब तक राजनीतिक दबाव के चलते ना तो प्रकरण पंजीबद्ध किया गया और ना ही उनकी सुरक्षा के इन्तजामात किये गये! बल्कि पत्रकार शैलेन्द्र पँवार पर ही झूठे प्रकरण दर्ज कर लिये गये और अब भी किसी भ्रष्टाचारी के काले करनामो का खूलासा करते है तो इसी प्रकार झूठे प्रकरण दर्ज करने कि धमकियाँ देकर दबाव बनाया जाता है! अब देखना यह होगा कि अब भी पत्रकार शैलेन्द्र पँवार को न्याय मिल पायेगा या इसी प्रकार पत्रकार शैलेन्द्र पँवार पर ओर भी झूठे प्रकरण दर्ज कर भ्रष्टाचारीयो को बढ़ावा दिया जायेगा!






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