हर ठगी के बाद पाप काटने तीर्थयात्रा पर जाता था राजस्थानी गिरोह

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 रायपुर। चार किलो नकली सोने की चेन थमाकर
राजनांदगांव के दो कारोबारियों से 16 लाख रुपए ठगी के मामले में पकड़े गए
राजस्थानी गैंग के तीन शातिरों से पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए
हैं। गैंग के मास्टरमाइंड सेवाराम सोलंकी उर्फ बिनोवा ने पुलिस को बताया कि
ठगी के पैसों का आपस में बराबर बंटवारा करने के बाद सभी लोग अय्याशी में
लाखों रुपए उड़ाते थे।
वहीं अपने कुकर्मों का पाप धोने के लिए
तीर्थयात्रा पर निकल जाते थे। रायपुर से कारोबारियों को ठगने के बाद कुछ
दिन देवबलौदा व चरौदा में छिपकर रहे फिर खाने-पीने के साथ अय्याशी में 5
लाख 20 हजार रुपए महज दस दिनों में खर्च कर तीनों उज्जैन के प्रसिद्ध
महाकालेश्वर व हुसैन टेकारी में पाप धोने चले गए थे। पुलिस ने उनकी
गिरफ्तारी राजस्थान और मप्र सीमा के बीच में की।
पुलिस सूत्रों ने
बताया कि राजस्थानी गिरोह के पकड़े गए सदस्य सेवाराम सोलंकी उर्फ बिनोवा
(40), मोहन राठौर (38) और पवन राठौर उर्फ पप्पू (38) ने गड़े सोने की कहानी
सुनाकर प्रदेश के कई कारोबारियों को ठगी का शिकार बनाया है। हालांकि पूछताछ
में इन्होंने पहली बार ठगी करना कबूल किया है।
मन अशांत, पुलिस के हत्थे चढ़ने का सताता था डर
तीनों
ठगों ने पूछताछ में शिरडी, नासिक, शनि शिंगणापुर, ओंकारेश्वर,
महाकालेश्वर, पुष्कर में ब्रम्हा मंदिर आदि कई तीर्थस्थल की यात्रा करना
कबूला है। उनका कहना था कि ठगी के पैसे अय्याशी में उड़ाने के बाद उनका मन
अशांत होने लगता था, ऊपर से पुलिस के हत्थे चढ़ने का डर सताता था। मन की
शांति और पाप को धोने के लिए वे तीर्थयात्रा पर जाते थे।
शनि और पाप काटने जाते थे तीर्थ
एएसपी
विजय अग्रवाल ने बताया कि ठग पहले ठगी करते थे फिर पैसे के बंटवारा कर
अलग-अलग तीर्थ स्थलों पर निकल जाया करते थे। ठगी की हर वारदात के बाद ऐसा
करते थे। यह गिरोह हमेशा पवन शनि शिंगणापुर जाकर शनि काटने पूजा-अर्चना भी
करता था।
इन राज्यों में ठगी
ठगों ने रायपुर
के अलावा आंध्रप्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र तथा मप्र के कई शहरों में इसी तरह
ठगी करना कबूल किया है। ठगों ने बताया कि असली जैसा दिखने वाली सोने की
चेन व हार को वे इतवारी बाजार नागपुर से खरीदकर लाते थे और उसमें कुछ सोने
के असली टुकड़े जोड़कर कारोबारियों को गड़ा खजाना मिलने का झांसा देकर ठगते
थे।


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