भोजन) को लेकर आए दिन गड़बड़ी सामने आ रही है। इसे रोकने के लिए भोजन की जांच
का जिम्मा शासन ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन को सौंपा है। इसके अफसर हर माह
अलग-अलग स्कूलों में जाकर दस सैंपल लेंगे। यदि खाने में गड़बड़ी मिली तो
सप्लायर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकारी स्कूलों के बच्चों को दिया
जाने वाला मिड-डे मिल (दोपहर का भोजन) खाने योग्य है अथवा नहीं, इसकी अब
बाकायदा मॉनीटरिंग होगी।
राज्य सरकार ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन को इसका जिम्मा सौंपा है।
फिलहाल यह होटल, रेस्तरां और बाजार में बिकने वाली खाद्य सामग्री की जांच
ही करता था। इसके तहत अधिकारी योजना से संबंधित संस्थान से खाद्य सामग्री
का सैंपल लेकर उसे जांच के लिए लैब में भेजते हैं। सरकार की मंशा है कि अब
मिड-डे मिल की जांच भी विभाग करे, ताकि बच्चों को पौष्टिक भोजन मिल सके।
इसके मद्देनजर सरकारी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर बंटने वाले मध्याह्न
भोजन की जांच खाद्य विभाग करेगा। उसे हर माह दस सैंपल लेकर उनकी जांच करनी
होगी। फिलहाल हर जिले में दो माह तक यह मॉनीटरिंग की जाएगी। यानी एक बार
की जांच में 20 सैंपल लिए जाएंगे। खाद्य विभाग की भोपाल स्थित फूड लैब में
इनकी जांच होगी।
इसलिए पड़ी मॉनीटरिंग की जरूरत
पिछले कुछ समय से प्रदेशभर में मध्याह्न भोजन में गड़बड़ी के कई
मामले सामने आए हैं। कहीं भोजन में छिपकली निकली है तो कहीं इल्ली वाला
चावल देने की शिकायतें भी हुई हैं। जिलों में फूड सप्लायर पर पतली दाल और
ऐसी ही खीर देने के आरोप लगते रहे हैं। अब आगे ऐसा न हो, इसलिए सरकार
मध्याह्न भोजन की मॉनीटरिंग करना चाहती है। सरकारी स्कूलों में मध्याह्न
भोजन योजना के तहत पहली से आठवीं तक के बच्चों को खाना दिया जाता है।
हफ्तेभर का मैन्यू तय
सोमवार को वेज पुलाव, कढ़ी पकौड़ा
मंगलवार को छोले की सब्जी, रोटी और खीर या हलवा
बुधवार को जीरा राइस, मिक्स सब्जी और तुअर दाल
गुरुवार को सोया या चना बड़ी, आलू की सब्जी और रोटी
शुक्रवार को मूंग की दाल, खिचड़ी और आलू-मटर-टमाटर की सब्जी
(शनिवार को ग्रीन मिक्स सब्जी, मिक्स दाल और रोटी का मीनू है। भोजन की राशि जिला पंचायत और नगर निगम मिलकर वहन करते हैं।)





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