जयपुर। राजस्थान के धौलपुर जिले मे एक परिवार ने बच्चेको सांप काटने पर डॉक्टरी इलाज कराने के बजाय अंधविश्वास का सहारा लिया।
बच्चे की मौत हो गई तो एक तांत्रिक के कहने पर बच्चे का शव कब्र से निकलवा
लिया।
धौलपुर के गुजर्रा कलां गांव में 10 वर्षीय बालक छोटू पुत्र
मोहर सिंह 31 अगस्त की शाम बाजरे की बाली भून रहा था। इस दौरान एक सांप ने
बच्चे को काट लिया। बच्चे ने घरवालों को बताया तो परिजन और ग्रामीण बच्चे
को अस्पताल ले जाने की बजाय गांव के बाहर किसी देवता के मंदिर पर ले गए।
यहां प्रार्थनाएं की गईं, लेकिन बच्चे की तबीयत में सुधार नहीं हुआ।
ग्रामीण आस-पास के तांत्रिकों और नीम-हकीमों के पास भी बच्चे को इलाज के
लिए ले गए, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा और अंततः बच्चे की मौत हो गई।
बच्चे
की मौत के बाद गांव से बाहर बच्चे को शनिवार सुबह 5 बजे कब्र खोदकर दफना
दिया गया। इसके बाद किसी ने परिजनों को एक तांत्रिक के बारे में बताया तो
ग्रामीण मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के गांव पीपरी पुरा निवासी रविंद्र नाम
तांत्रिक को गांव ले आए। तांत्रिक रविंद्र ने आधा दर्जन साथियों के साथ
गांव पहुंचकर कब्र से खुदाई कराकर बच्चे को बाहर निकाल लिया।
तांत्रिक
की टीम ने नीम की पत्तियों को गर्म पानी में खौलाकर उसका लेप बनाकर बच्चे
के शरीर पर लगाया और उसके बाद बालक को नीम की पत्तियों में दबा दिया और
बालक के चारों तरफ उपलों में आग लगाकर कर उसको जिंदा करने के उपाय करती
रही। रविंद्र का दावा था कि बच्चे की नाड़ी बोलने लगी है। इस उपाय से शरीर
में गर्मी आ रही है और रगों में खून भी दौड़ने लगा है, लेकिन अभी कुछ कहा
नहीं जा सकता।





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