खनियाधाना। नगर के श्री पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में पिछले चार माह से धर्म प्रभावना कर रहे आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री विशोक सागर जी मुनिराज एवं मुनि श्री विधेय सागर जी महाराज का भव्य पिच्छी परिवर्तन समारोह के साथ चातुर्मास की समाप्ति होनेके साथआज मुनि श्री का मंगल विहार दोपहर तीन बजे ग्राम चमरौआ के लिय हुआ। इस अवसर पर मुनि श्री को विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जन मंदिर जी में मौजूद थे तथा जैसे ही दोपहर में मुनि श्री ने अपने बिहार के संकेत दिए तो उपस्थित सभी लोगों की आंखों में से अश्रुधारा बहने लगी क्योंकि जिन संतों के सानिध्य में पिछले 4 माह से पूरे नगर का वातावरण धर्ममय हो गया था आज उनके जाने के पश्चात श्रद्धालुओं के चेहरे पर उदासी छाई हुई थी तथा सभी ने मुनि श्री को श्रीफल भेंट कर पुन: खनियांधाना में आगमन का निमंत्रण दिया। कल वुधवार को आहारचर्या संभवत: ग्राम चमरोआ में होने के पश्चात मुहारी खिरकिट, बामौरकलां की ओर मंगल विहार हो सकता है। इस अवसर पर उपस्थित भक्तजनों ने बताया कि आगामी 28 अक्टूबर से अष्टान्हिका महापर्व के अवसर पर सकल जैन समाज द्वारा वृहद स्तर पर विधान करने का कार्यक्रम है जिसमें पुणे मुनि श्री का मंगल साहित्य खनियाधाना जैन समाज को मिल सकता है।






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