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शिक्षकों की लापरवाही से किलावनी विद्यालय की स्थिति खराब विद्यालय में नहीं आते बच्चे

कोलारस। कोलारस अनुविभाग के अंतर्गत आने बाले ग्राम तोर, पिपरौदा, किलावनी,  पिछोर,पाली, रामपुरी, भेडोन, पहाडी, पडोरा डांग विद्यालय की स्थिति काफी पिछती हुई दिखाई दे रही है। इसका कारण यहां पर वर्षो से पदस्थ लापरवाह शिक्षको का रवैया बना हुआ है। 

कोलारस केे ग्रामीण अंचलो में शिक्षा की दुर्दशा क्या है किसी से छिपी नही है। लापरवाह शिक्षको की मनमानी के शिकार मासूम बच्चे हो रहे है। डीपीसी महोदय के निरीक्षण में भी अधिकांश विद्यालय बंद मिलते है। मोबाईल मॉनिटरिंग में भी लापरवाही दिखाई दे रही है। 

केन्द्र से लेकर प्रदेश सरकार जहां शिक्षा की अलख जगाने के लिए भारी भरकम्प बजट विद्यालयो को दे रही है इसके बाबजूद भी ग्रामीण अंचलो में स्कूलो की हालत खस्ता है। बजट को ठिकाने शिक्षक लगा रहे है। सर्व शिक्षा अभियान मध्यान्ह भोजन स्कूल चलो अभियान, साईकिल वितरण योजना, डे्रस वितरण योजना से लेकर अन्य योजनाओ में कोलारस ग्रामीण अंचलो में स्थित किलावनी  से लेकर प्राथमिक विद्यालय में पदस्थ शिक्षक चपत लगाने में कोई कौर कसर नही छोड रहे है। किलावनी में स्थित प्राथमिक विद्यालय में पदस्थ लापरवाह जिम्मेदार शिक्षको द्वारा शिक्षा के लिए आने बाले बजट को हजम किया जा रहा है। अधिकांश समय विद्यालय में तालाबंदी जैसे हालात नजर आते है। जहां मध्यान्ह भोजन से लेकर पढाई का स्तर पूरी तरह से गिर चुका है। यह बात ग्रामीण जन भी स्वीकारते है। और किलावनी शासकीय विद्यालयो में पढाई न होने के चलते अनेक बच्चे कोलारस या शिवपुरी किराये के कमरे लेकर पढाई कर रहे है। मध्यान्ह भोजन पर दबंगो का राज है। अनेक विद्यालयो मे ंसमूह प्रभारी शिक्षको द्वारा ही चलाया जा रहा है। प्रतिमाह पैसा बचाने के चक्कर में यह मध्यान्ह भोजन छात्रो से दूर बना हुआ है। विद्यालयो में आने बाला बजट हजम किया जा रहा है। महीने में मुश्किल से 4-5 दिन ही मध्यान्ह भोजन दिया जाता है। शिक्षको की बात करें तो प्रति दिन इनके द्वारा अपडाउन किया जाता है जिससे इनको पता चल जाता है। आज डीपीसी या फिर अधिकारी तो निरीक्षण के लिए नही जा रहे है। जिन विद्यालयो में 2 शिक्षक पदस्थ है उनमें से 1 शिक्षक 1 दिन छोड कर विद्यालय पहुचता है। और बच्चे बाहर शिक्षको का इंतजार कर रहे थे। इन विद्यालयो में स्कूल चलो अभियान से लेकर सभी योजनायें संचालित होना चाहिये परन्तु यह योजनायें दिखावा बनी हुई है। अधिकांश विद्यालयो में नि:शुल्क साईकिल वितरण योजना के नाम पर घोटाले किये गये है।  

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