शिवपुरी। नगरपालिका परिषद की लगातार दो बैठक में चार-पांच बिंदु पारित नहीं किए गए थे, लेकिन नपा प्रशासन ने पूरा एजेंडा पारित कराने के लिए हाजिरी रजिस्टर पर अनुपस्थित रहे पार्षदों के भी ठहराव पंजी पर हस्ताक्षर करा लिए। यह मामला तूल पकडऩे के बाद कलेक्टर तरूण राठी के निर्देश पर डिप्टी कलेक्टर सीबी प्रसाद ने नपा कार्यालय में छापा मारकर उपस्थिति रजिस्टर तथा ठहराव पंजी को जब्त कर सील कर दिया है। दोनों दस्तावेज देखने पर प्रथम दृष्टि में ही अनियमितता उजागर हो रही है। सूत्रों की खबर है कि पार्षद मनीषा गौतम, मनीषा विनीत गुर्जर, भावना राजकुमार पाल और किरण सेन के हस्ताक्षर उपस्थिति पंजी पर नहीं थे जबकि ठहराव पंजी पर उनके हस्ताक्षर कराकर एजेंडा पारित कर लिया गया। जिला प्रशासन सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि मामले की छानबीन के लिए जांच कमेटी बनाई जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार नगरपालिका में 14 और 22 अगस्त को आयोजित परिषद की बैठक में चार-पांच बिंदुओं पर सहमति नहीं बन पाई थी। इस कारण परिषद को स्थगित कर दिया गया था और शेष बिंदुओं पर चर्चा के लिए उन्हें आगामी बैठक में रखने का प्रस्ताव पारित किया गया था, लेकिन नपा प्रशासन ने उन बिंदुओं को भी पार्षदों के हस्ताक्षर कराकर पारित कर दिया। जिन पर विचार ही नहीं किया गया था। दो दिन पहले परिषद की बैठक में यह मामला भाजपा पार्षदों ने जोरशोर से उठाया। उनका आरोप था कि ठहराव पंजी पर भाजपा पार्षदों के फर्जी हस्ताक्षर हैं। जिन भाजपा पार्षदों के ठहराव पंजी पर हस्ताक्षर हैं उनके नाम हैं अरूण पण्डित, राजकुमारी कुशवाह और बलवीर यादव तथा डॉ. विजय खन्ना। पार्षद अरूण पण्डित ने बाद में अपने हस्ताक्षर फर्जी होने का खण्डन किया और कहा कि उनके ठहराव पंजी पर हस्ताक्षर असली है। जबकि परिषद की बैठक में वह पूर्व नपा उपाध्यक्ष भानु दुबे, वरिष्ठ पार्षद अभिषेक शर्मा बट्टे के साथ खड़े थे। श्री दुबे और श्री शर्मा ने भाजपा पार्षदों के फर्जी हस्ताक्षर होने का आरोप लगाया था। यह मामला तूल पकडऩे के बाद सूत्र बताते हैं कि कलेक्टर तरूण राठी ने डिप्टी कलेक्टर सीबी प्रसाद को निर्देशित किया कि वह नगरपालिका में जाकर संबंधित रिकॉर्ड जब्त करें। इस तारतम्य में डिप्टी कलेक्टर सीबी प्रसाद ने उपस्थिति रजिस्टर ठहराव और प्रोसिडिंग जब्त की। उनका कहना है कि जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कुछ गड़बड़ी है अथवा नहीं।
बॉक्स
जांच में परिषद की वीडियो रिकॉर्डिंग भी देखी जाएगी
क्या अनुपस्थित पार्षदों के सहयोग से परिषद का एजेंडा पारित किया गया? यह सवाल तूल पकडऩे के बाद प्रशासन ने संबंधित रिकॉर्ड जब्त कर लिया है ताकि देखा जाए कि कौन पार्षद उपस्थित है और कौन अनुपस्थित तथा अनुपस्थित पार्षदों के हस्ताक्षर ठहराव पंजी पर हैं अथवा नहीं। सफाई में यह तक भी दिया जा रहा है कि उपस्थिति पंजी पर तो नपाध्यक्ष और उपाध्यक्ष के हस्ताक्षर भी नहीं है, लेकिन वह बैठक में उपस्थित थे। इसके लिए सूत्र बताते हैं कि इस मामले की जांच में परिषद की पिछली बैठक की वीडियो रिकॉर्डिंग भी देखी जाएगी ताकि स्पष्ट हो सके कि जिन पार्षदों के उपस्थिति पंजी पर हस्ताक्षर नहीं है वह उपस्थित थे अथवा नहीं, लेकिन यदि वीडियो रिकॉर्डिंग देखने के बाद पता चलता है कि उपस्थिति पंजी पर अनुपस्थित पार्षद बैठक में उपस्थित नहीं थे तो दस्तावेजों में कूटकरण का मामला दर्ज किया जा सकता है।






Be First to Comment