
तिरुवनंतपुरम.केरल में लॉ स्टूडेंट से रेप और उसकी बेरहमी से हत्या के मामले में गुरुवार को एर्नाकुलम कोर्ट ने दोषी को फांसी की सजा सुनाई। 2 दिन पहले ही चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने अमीरुल इस्लाम को दोषी करार दिया। पीड़िता के वकील ने अमीरुल के लिए फांसी की मांग की थी। पिछले साल मई में दिल्ली की निर्भया की तरह एर्नाकुलम में 30 साल की लड़की के साथ दरिंदगी हुई थी। पुलिस के मुताबिक, पोस्टमॉर्टम के वक्त लड़की की आंत बाहर पाई गई। प्राइवेट पार्ट पर भी कई जख्म मिले थे। इस वारदात के विरोध में देशभर में लोगों ने प्रदर्शन किए। सोशल मीडिया पर भी #JusticeForJisha कैम्पेन चला था।
पुलिस ने कैसे आरोपी को किया था गिरफ्तार?
– न्यूज एजेंसी के मुताबिक, पुलिस ने अमीरुल इस्लाम पर मर्डर, रेप, सबूतों से छेड़छाड़ और एसएसटी एक्ट के तहत चार्ज लगाए। पीड़िता के नखून और शरीर के कई भागों से दोषी के डीएनए सैम्पल मिले थे।
– पुलिस ने बताया था कि लॉ स्टूडेंट के मर्डर के 50 दिन बाद अमीरुल को गिरफ्तार किया गया। इसके लिए एसआईटी ने 5 हजार लोगों के फिंगर प्रिंट्स की जांच की। 20 लाख फोन कॉल्स को सुना गया, उसके बाद पुलिस आरोपी तक पहुंच सकी थी।
लड़की की बॉडी पर मिले थे 30 से ज्यादा जख्म
– लॉ स्टूडेंट से रेप-मर्डर की घटना 28 अप्रैल, 2016 की है। तब लड़की अपने घर में अकेली थी और उसकी मां काम पर गई थी। इसी दौरान दोषी ने उसे शिकार बनाया। अगले दिन मां के घर लौटने पर वारदात का खुलासा हुआ था।
– तब पुलिस ने बताया था कि ऐसा लग रहा है कि लड़की ने आरोपियों का डटकर मुकाबला किया। उसकी बॉडी पर किसी धारदार हथियार से किए गए 30 से ज्यादा जख्म मिले। पड़ोसियों ने बताया कि उन्होंने 28 अप्रैल दोपहर एक बजे आखिरी बार लड़की को देखा था, जब वो पानी लेने जा रही थी।






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