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राजेÓ बिन सब सून कोलारस में मंत्रियों का स्वागत प्रदेश की ताकतवर मंत्री यशोधरा राजे की कोलारस से दूरियां, आखिर क्यों?

अजयराज सक्सेना

शिवपुरी। विधायक रामसिंह यादव के दुखद निधन के बाद रिक्त हुई कोलारस विधानसभा सीट पर उपचुनाव होना है। भाजपा इस सीट पर कब्जा करने के लिए पूरी ताकत से मैदान में उतर गई है और चुनावी आंकडे फिट करना शुरू कर दिए है। जैसा कि विदित है कि शिवपुरी जिले की लगभग सभी सीटों पर शिवपुरी विधायक और प्रदेश की ताकतवर मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया का प्रभाव है। शिवपुरी, कोलारस और पोहरी की सीट पर राजे का ज्यादा प्रभाव है। इसका उदाहरण शिवपुरी से माखनलाल राठौर को विधायक और रिशिका अष्ठाना का नगरपालिका का चुनाव जीतना राजे के प्रभाव का उदाहरण है। यह सभी जानते है कि यशोधरा सिंधिया चुनाव में प्रत्याशी को जिताने के लिए एक उम्मीदवार की तरह मेहनत करतीं हैं। 

कांग्रेस से इस सीट को हथियाने के लिए भाजपा ने पूरी रणनीति बना ली है और इस रणनीति पर काम करना भी शुरू कर दिया है। इस माह के अंदर प्रदेश की सीएम शिवराज सिह के पांच दौरे इस विधानसभा में हो चुके है। कैबीनेट मंत्री नरोत्तम मिश्रा कोलारस में पूरी तरह सक्रिय है। मंत्री गोपाल भार्गव ब्राहम्णों की नब्ज टटोलने कोलारस में दो दिन रूक चुके है। मंत्री लाल सिंह आर्य योजनाओं और घोषणाओं की बरसात कर ही रहे है। भारत सरकार के केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र तोमर कोलारस में ही है। जिले में सबसे ज्यादा प्रभाव वाली नेता यशोधरा राजे सिंधिया कोलारस के इस चुनावी वातावरण से ओझल क्यों है। इसके पीछेे उनकी व्यस्तता बताई जा रही है, लेकिन सीएम के प्रोग्रामों में भी राजे का उपस्थित नही होना, व्यस्तता कारण नहीं हो सकता है। कारण कुछ ओर भी हो सकता है, सवाल बड़ा है…। 

जैसा कि सभा जानते है कि कोलारस और मुंगावली विधानसभा के चुनावी परिणाम प्रदेश में आने वाले आम चुनावों के भावी सीएम की बनती बिगड़ती तस्वीर पेश कर सकता है, यह चुनाव सांसद सिंधिया की परीक्षा तो मप्र के सीएम शिवराज की अग्निपरीक्षा है। कोलारस में भाजपा के तबीयत ठीक नही है और मुंगावली में सांसद सिंधिया पूर्व में स्व. विधायक महेन्द्र सिंह को विजयी बनाकर अपना करिश्मा दिखा चुके है। 

शिवपुरी-गुना क्षेत्र सिंधिया राजघराने के वर्चस्व वाला क्षेत्र है। यहां सिंधिया राज घराना ही पक्ष है और विपक्ष भी। यहां राजनीति के 2 चेहरे है एक महल समर्थक और एक महल विरोधी। जैसा कि विदित है कि यह प्रत्याशी कोई भी हो जंग शिवराज और ज्योतिरादित्य के बीच होनी है। इस स्थिती में कहीं ऐसा तो नही भाजपा को अपने आंचल मे पाल पोस कर बड़ा करने वाली लोकमाता विजयाराजे सिंधिया की बेटी पर यह सगंठन विश्वास नही कर रहा हो, जानबुझकर उन्हे कोलारस से दूर रखने का षडयंत्र रचा गया हो और इसका उदाहरण भाजपा ने हुजूर के विधायक रामेश्वर शर्मा को कोलारस का चुनाव प्रभारी बना कर दिया है। 

कहने का सीधा-सीधा अर्थ है कि कोलारस में भाजपा को अगर चुनाव में विजयी होना है तो यशोधरा राजे सिंधिया को आगे करना होगा। यदि यशोधरा राजे सिंधिया मैदान में होतीं तो मंत्रियों की फौज की जरूरत ही नहीं होती। वैसे भी लोग आचार संहिता लागू होने से पहले अपने अपने फायदे की घोषणाएं और भूमिपूजन करवा रहे हैं। मंत्रियों की फौज भाजपा को कमजोर साबित कर रही है। सबको समझ आ रहा है कि जिस विधानसभा में 12 साल में 12 मंत्री नहीं आए वहां मंत्रियों के शिविर क्यों लग रहे हैं। अपने राम का तो यही कहना है कि ‘राजेÓ बिन सब सून कोलारस में मंत्रियों का स्वागत।

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