भोपाल। प्रदेश के लिए अच्छी खबर है। यहां के युवाओं ने सिगरेट पीना कम कर दिया है। 2009-10 में 15 साल से ऊपर के 17 फीसदी युवा सिगरेट पी रहे थे। अब सिर्फ 10 फीसदी युवा सिगरेट-बीड़ी पीते हैं। ये खुलासा ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे 2016-17 की रिपोर्ट में हुआ है।विश्व स्वास्थ्य संगठन, केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल अटलांटा ने यह सर्वे किया है। इसकी विस्तृत रिपोर्ट बुधवार को स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह जारी करेंगे।रिपोर्ट के अनुसार किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करने वाले युवाओं में भी कमी आई है, लेकिन यह महज छह फीसदी है। 2009-10 में यह आंकड़ा 40 फीसदी था जो घटकर 34 फीसदी तक आया है। इसमें खुली तंबाकू, गुटखा, सिगरेट-बीड़ी व तंबाकू का अन्य उपयोग शामिल है। तंबाकू का उपयोग करने राज्यों में मप्र में 11 वे पायदान पर है।उम्मीद की जा रही थी कि खुली तंबाकू और गुटखा खाने वाले कम होंगे। इसकी वजह यह कि मप्र में 2012 से गुटखा पर प्रतिबंध है। तंबाकू से होने वाले नुकसान को लेकर स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। वायस ऑफ टोबैको विक्टिम से जुड़े मप्र मेडिकल ऑफीसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. ललित श्रीवास्तव ने कहा कि सिगरेट, तंबाकू के पैकेट में लगने वाले वार्निंग चित्र व जागरूकता के चलते तंबाकू का सेवन करने वाले कम हुए हैं।
अच्छी खबरः मप्र में कम हुए सिगरेट पीने वाले, सात साल में 7 फीसदी कम, सर्वे में खुलासा,
भोपाल। प्रदेश के लिए अच्छी खबर है। यहां के युवाओं ने सिगरेट पीना कम कर दिया है। 2009-10 में 15 साल से ऊपर के 17 फीसदी युवा सिगरेट पी रहे थे। अब सिर्फ 10 फीसदी युवा सिगरेट-बीड़ी पीते हैं। ये खुलासा ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे 2016-17 की रिपोर्ट में हुआ है।विश्व स्वास्थ्य संगठन, केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल अटलांटा ने यह सर्वे किया है। इसकी विस्तृत रिपोर्ट बुधवार को स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह जारी करेंगे।रिपोर्ट के अनुसार किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करने वाले युवाओं में भी कमी आई है, लेकिन यह महज छह फीसदी है। 2009-10 में यह आंकड़ा 40 फीसदी था जो घटकर 34 फीसदी तक आया है। इसमें खुली तंबाकू, गुटखा, सिगरेट-बीड़ी व तंबाकू का अन्य उपयोग शामिल है। तंबाकू का उपयोग करने राज्यों में मप्र में 11 वे पायदान पर है।उम्मीद की जा रही थी कि खुली तंबाकू और गुटखा खाने वाले कम होंगे। इसकी वजह यह कि मप्र में 2012 से गुटखा पर प्रतिबंध है। तंबाकू से होने वाले नुकसान को लेकर स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। वायस ऑफ टोबैको विक्टिम से जुड़े मप्र मेडिकल ऑफीसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. ललित श्रीवास्तव ने कहा कि सिगरेट, तंबाकू के पैकेट में लगने वाले वार्निंग चित्र व जागरूकता के चलते तंबाकू का सेवन करने वाले कम हुए हैं।More from Fast SamacharMore posts in Fast Samachar »
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