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स्वच्छता सर्वे : नगर निगम ने अपना काम किया, अब शहरवासियों की बारी,


इंदौर, । नगर निगम ने सालभर में स्वच्छता को लेकर हर मोर्चे पर जबर्दस्त काम करके साबित कर दिया है कि सफाई के मामले में इंदौर की बराबरी शायद ही कोई कर सकता है। गुरुवार से केंद्र सरकार देशभर के 4041 शहरों में ‘स्वच्छता सर्वेक्षण 2018’ शुरू कर रही है। अलग-अलग टीमें वहां की मैदानी हकीकत देखकर नंबर देंगी, लेकिन स्वच्छता सर्वे में नागरिक भी बराबरी से भागीदारी कर सकते हैं।वे 1969 नंबर पर कॉल कर अपना फीडबैक दे सकते हैं। उक्त नंबर पर गुरुवार से शहर के लोग स्वच्छता को लेकर पूछे गए सवालों का जवाब दे सकते हैं। इंदौर को नंबर एक बनाना है तो लोगों को फोन पर पूछे जाने वाले सवालों के जवाब में ‘ए’ का विकल्प चुनना होगा।कॉलर ने पूछे गए सवालों के सभी जवाब ‘ए’ में दिए तो इंदौर को 1000 नंबर मिल सकते हैं। कॉल से लिए गए फीडबैक का सारा रिकॉर्ड रखा जाएगा और आखिर में रैंकिंग तय करने के दौरान शहर को नंबर दिए जाएंगे। पब्लिक फीडबैक के लिए स्वच्छता सर्वे 2018 में 1400 नंबर दिए गए हैं। 400 नंबर महापौर हेल्पलाइन से संबद्ध एप डाउनलोड के थे। इंदौर को जनसंख्या के मान से करीब 60 हजार ‘इंदौर 311’ एप डाउनलोड करना थे। नागरिकों ने लगभग 80 हजार एप डाउनलोड करके टॉप-20 शहरों में स्थान बना लिया है।
पूछे जाएंगे छह सवाल
1. क्या आपको यह जानकारी है कि आपका शहर स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 में हिस्सा ले रहा है?
(यदि शहर के नागरिकों ने इसका जवाब ‘हां’ में दिया तो इसके लिए शहर को 175 नंबर दिए जाएंगे।)
2. आपका क्षेत्र क्या पिछले साल की अपेक्षा ज्यादा साफ है?
ए- हां, बहुत साफ है। कोई शिकायत नहीं है। (175 नंबर)
बी- पिछले साल से बेहतर है। (135 नंबर)
सी- पिछले साल से थोड़ा बेहतर है। (90 नंबर)
डी- कोई परिवर्तन नहीं है। पिछले साल जैसा साफ है। (45 नंबर)
ई- पहले से खराब है। (0 नंबर)
3. क्या इस साल आपने व्यावसायिक क्षेत्रों में लगे लिटरबिन का उपयोग शुरू किया है?
ए- हां, बहुत उपयोगी है। (150 नंबर)
बी- हां, थोड़ा-बहुत उपयोगी है। (70 नंबर)
सी- हां, कभी-कभार उपयोग करते हैं। (30 नंबर)
डी- बिलकुल उपयोग नहीं करते। (0 नंबर)
4. क्या आप इस साल पृथकीकृत (गीला-सूखा) घर-घर कचरा संग्रहण से संतुष्ट हैं?
ए- हां, पिछले साल से बहुत बेहतर है। कोई शिकायत नहीं है। (175 नंबर)
बी- हां, थोड़ा बेहतर है। (90 नंबर)
सी- पहले जैसा है। (45 नंबर)
डी- कोई डोर टू डोर व्यवस्था नहीं है। (0 नंबर)
5. क्या पिछले साल की अपेक्षा मूत्रालय-शौचालय की व्यवस्था बढ़ी है, जिसके कारण लोगों ने खुले में पेशाब और शौच करना बंद किया है?
ए- हां, संख्या बहुत बढ़ी है। (150 नंबर)
बी- हां, थोड़ी बढ़ी है। (70 नंबर)
सी- कोई परिवर्तन नहीं है। (30 नंबर)
डी- कोई मूत्रालय-शौचालय की उपलब्धता नहीं है। (0 नंबर)
6. क्या सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालय पहले की अपेक्षा ज्यादा साफ हैं और उन तक पहुंचना आसान है?
ए- हां, पहले की अपेक्षा मूत्रालय-शौचालय ज्यादा बेहतर हैं और उन तक पहुंचना आसान है। (175 नंबर)
बी- हां, थोड़ा बेहतर है। (135 नंबर)
सी- बहुत ज्यादा सुधार नहीं है। (90 नंबर)
डी- कोई खास परिवर्तन नहीं है। पिछले साल के समान है। (45 नंबर)
ई- पिछले साल से खराब हैं। कोई सुधार नहीं है। (0 नंबर)
इसलिए इंदौर को दें ‘ए’ ऑप्शन
– 2016 में शहर में 1500 स्थानों पर लिटरबिन लगाए गए थे। 2017 में इनकी संख्या बढ़कर 3000 हो गई है। गीला-सूखा कचरा फेंकने के लिए नीले और हरे रंग के लिटरबिन नगर निगम ने लगाए हैं।
– हर सफाईकर्मी को 500 से 800 मीटर लंबे हिस्से में सफाई का जिम्मा दिया गया है।
– 2016 में नगर निगम के पास डोर टू डोर कचरा कलेक्शन के लिए 365 गाड़ियां थीं। 2017 में इनकी संख्या 525 हो गई है।
– पहले गीला-सूखा कचरा अलग-अलग करने के लिए गाड़ियों में कंपार्टमेंट नहीं थे। अब सभी गाड़ियों में दो कंपार्टमेंट बनाए गए हैं।
– देश में पहली बार सैनिटरी पैड और डाइपर के लिए गाड़ियों के पिछले हिस्से में गोल डिब्बा इंदौर में लगाया गया है। यह प्रयोग काफी सफल रहा है।
– नगर निगम ने शहर में घूमने वाले पब्लिक ट्रांसपोर्ट के वाहनों में लिटरबिन लगाना अनिवार्य किया है।
– थूकने वालों, खुले में शौच या पेशाब करने वालों पर स्पॉट फाइन सख्ती से किया जा रहा है।
– शहर में 172 पब्लिक और 125 कम्युनिटी टॉयलेट बनाए गए हैं। वहां दिन में चार बार सफाई करने के साथ लाइट, पानी, साइन बोर्ड और पब्लिक फीडबैक आदि के इंतजाम किए गए हैं। टॉयलेट में सैनिटरी नेपकिन, वेंडिंग मशीन और उपयोग के बाद उसे नष्ट करने वाली मशीन भी वहीं लगाई गई है। दिव्यांगों के लिए रैंप बनाने और हैंडल लगाने के साथ बच्चों के लिए छोटी सीट लगाई गई हैं।
– टॉयलेट में सुबह पांच से रात 11 बजे तक अटैंडर तैनात रहते हैं। दो लोग लगातार सफाई करते हैं। केमिकल-फिनाइल के उपयोग का रिकॉर्ड भी उन्हें रखना होता है।
– पहले शहर में 110 यूरिनल थे, जिन्हें 2017 में बढ़ाकर 232 कर दिया गया। टॉयलेट में आने वालों की सुविधा के लिए वहां भी दोनों तरह के डस्टबिन लगाए गए हैं।
– निगम के टॉयलेट के अलावा पेट्रोल पंपों, मॉल और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स को स्वच्छ टॉयलेट लोकेटर एप से लिंक कर दिया गया है।
नागरिक दें सकारात्मक फीडबैक
निगम ने अपने संसाधनों और कर्मचारियों की मदद से शहर को स्वच्छ कराया है। निगम के प्रयासों में जनता ने बढ़-चढ़कर भागीदारी की जिसका परिणाम रहा कि स्वच्छता सर्वे 2017 में इंदौर नंबर एक पर आया। नंबर वन बनने के बाद भी निगम ने सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार काम किया। स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 शुरू हो गया है। मेरा शहरवासियों से आग्रह है कि वे ज्यादा से ज्यादा संख्या में 1969 और दिए गए लिंक पर अपना सकारात्मक फीडबैक दें। – मालिनी गौड़, महापौर
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