इंदौर। खेलों की ऑनलाइन कोचिंग। सुनने में अजीब लगता हो, लेकिन अभावग्रस्त युवाओं के लिए देश में एथलेटिक्स कोचिंग की पुख्ता व्यवस्था न होने से इंदौर के एक युवा इंजीनियर ने अमेरिका के बोस्टन शहर में रहकर कोच-खोज नाम का यह स्टॉर्टअप शुरू किया है। इस काम में उसके साथ मुंबई के दो दोस्त भी शामिल हैं। ये युवा अमेरिका और जर्मनी से अभावग्रस्त बच्चों को कोचिंग दे रहे हैं। शुरुआत जेवलिन थ्रो (भाला फेंक) से की है और आगे मार्शल आर्ट और फुटबॉल को भी शामिल किया जाएगा।मध्यप्रदेश सरकार के फ्रेंड्स ऑफ एमपी कान्क्लेव में आए इंदौर के 31 वर्षीय इंजीनियर आदित्य भार्गव ने बताया कि इस काम में दो विदेशी कोच पैरू के माइकल मसलमैन और यूएसए के टॉम पैट्रनऑफ उनके एडवाइजर हैं। आदित्य बताते हैं कि उनके साथ मुंबई के दो दोस्त सिद्धार्थ पाटिल और शेखर कादव भी इस स्टॉर्टअप में शामिल हैं। एथलीट जब रिटायर हो जाते हैं तो उनको कोई काम नहीं देता, लेकिन हम उनके अनुभवों का उपयोग भविष्य के एथलीट तैयार करने में कर सकते हैं। इंदौर के वैष्णव कॉलेज से पढ़ाई के बाद आदित्य बायो मेडिकल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री के लिए 2009 में बोस्टन चले गए थे। इसके बाद से वहीं पर उन्होंने स्टॉर्टअप की नई राह चुन ली।
देश में क्रिकेट के दीवाने, एथलेटिक्स पर ध्यान नहीं
आदित्य इस बात से निराश नजर आते हैं कि हमारे देश में क्रिकेट के प्रति तो लोग दीवाने हैं लेकिन एथलेटिक्स पर किसी का ध्यान नहीं है। सरकार का भी सपोर्ट नहीं है। इसीलिए हम एथलेक्टिस में अधिक मैडल नहीं जीत पाते। हमारे असली चैंपियन गांव में होते हैं लेकिन सरकार की मदद और सुविधाएं उन तक नहीं पहुंच पाती। हम कॉरपोरेट कंपनियों और एनजीओ से भी ये उम्मीद करते हैं कि वे ऐसे गरीब बच्चों को प्रशिक्षित करें। अपना सीएसआर फंड इस काम में लगाए।
एक खेल ही है जिसमें युवाओं की ऊर्जा का सही उपयोग हो सकता है और भटके हुए युवाओं को नशे से भी दूर ले जा सकता है। आदित्य ने बताया कि टैलेंट सर्च के लिए हम जल्द ही दिल्ली और मुंबई में अलग-अलग स्कूलों में 8 से 15 वर्ष आयु के बच्चों का जेवलिन थ्रो का कॉम्पीटिशन करेंगे। जो बेस्ट होंगे ऐसे करीब 8 बच्चों को ट्रेनिंग के लिए जर्मनी भेजेंगे। कुछ कंपनियों से स्पांसरशिप की बात चल रही है। यदि वे तैयार हुईं तो बच्चों की यात्रा और रहने-खाने के सभी खर्च निःशुल्क रहेंगे।




