ग्वालियर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 6-8 जनवरी के बीच ग्वालियर में डीजी कांफ्रेंस में शामिल होना प्रस्तावित है। इसके चलते रेलवे स्टेशन पर भी हाई अलर्ट घोषित किया गया है। रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स की परेशानी ये है कि उसके पास काफी बड़े एरिया की सुरक्षा की जिम्मेदारी है और उसके लिए मुट्ठी भर जवान हैं। ऐसे में अब प्रधानमंत्री की यात्रा को देखते हुए अतिरिक्त बल उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। इससे प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति निर्मित नहीं हो सके।आरपीएफ ग्वालियर के अंतर्गत कोटरा, डबरा, सिंथौली, अनंतपैठ, आंतरी, संदलपुर, ग्वालियर, बिरला नगर, रायरू, बानमोर, नूराबाद, उदी मोड़, फूफ, भिंड, गोहद, सोनी, मालनपुर एवं शनिश्चरा सहित करीब डेढ़ दर्जन स्टेशन आते हैं। इसके मुकाबले आरपीएफ के पास ग्वालियर में 55 जवान, डबरा में 11 एवं भिंड में 12 जवान हैं।इसमें 9 महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। दिलचस्प बात ये है कि ट्रेन में होने वाले हंगामे से लेकर ट्रेनों पर होने वाली पथराव तक की घटनाओं पर अंकुश लगाना आरपीएफ की जिम्मेदारी है। आम दिनों में तो काम चल जाता है, लेकिन अब प्रधानमंत्री एवं डीजी रेल के ग्वालियर आगमन को देखते हुए आरपीएफ की परेशानी बढ़ गई है। ऐसे में हेडक्वार्टर द्वारा अतिरिक्त फोर्स उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे यदि डीजी रेल ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर पहुंचें, तो उन्हे जवानों की ठीक-ठाक संख्या दिखाई दे। साथ ही डीजी कांफ्रेंस के दौरान सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखना भी आरपीएफ के लिए कड़ी चुनौती है।
193 किमी लाइन की सुरक्षा
आरपीएफ के अंडर में 115 किमी की भिंड लाइन एवं करीब 78 किमी की मेनलाइन आती है। इसमें रेलवे ट्रैक पर होने वाली घटनाओं पर भी आरपीएफ को ही नजर रखना होती है।
विकल्प पर विचार
आरपीएफ बल बढ़ाने की जगह वैकल्पिक उपाय करने में जुटा है। इसके चलते आरपीएफ को वॉकी-टॉकी उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही अब सीसीटीवी कैमरे भी स्टेशन पर लगवाए जा रहे हैं। वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि बल बढ़ाने से अधिक बेहतर उपाय आधुनिक पुलिसिंग को बढ़ावा देना है। इसके लिए कम मेन पॉवर में बेहतर काम के फार्मूले पर काम लेने का प्रयास चल रहा है। हालांकि ये कितना कारगर है, ये तो समय ही बताएगा।
प्रधानमंत्री की यात्रा को देखते हुए हम अतिरिक्त बल भेज रहे हैं। हालांकि कितना बल भेजा जा रहा है, इसके बारे में अभी कुछ बताया नहीं जा सकता है। फिलहाल आरपीएफ में बल बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है, लेकिन हम आधुनिक पद्धति से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं। इसके लिए हमने आरपीएफ को वॉकी-टॉकी उपलब्ध कराए हैं और अब सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं।
-आशीष मिश्रा, कमांडेंट, आरपीएफ






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