
(बैरागढ़)।नौसिखिए चालक ने ब्रेक की बजाय एक्सीलेटर दबाकर स्कूल बस का इंतजार कर रही छात्राओं पर कार चढ़ा दी। हादसे में एक छात्रा की मौके पर मौत हो गई, जबकि दूसरी गंभीर रूप से घायल हो गई। यह दर्दनाक हादसा गुरुवार सुबह 8.45 बजे बैरागढ़ सीटीओ अय्यप्पा मंदिर रोड के अंतिम छोर स्थित कैलाश नगर मोड़ पर यादव टी स्टाल के पास हुआ।नवनीध गर्ल्स स्कूल में कक्षा छठवीं की छात्रा गरिमा उर्फ गुनगुन शिवदासानी अपनी सहेली कक्षा पांचवीं की छात्रा स्तुति सेंगर के साथ यादव टी स्टाल के पास रोज की तरह स्कूल बस आने का इंतजार कर रही थीं। बस आने से पहले ही सामने से तेज गति से आ रही कार नंबर एमपी 04 सीजे 9856 ने दोनों छात्राओं को कुचल दिया। किनारे पर खड़ी गरिमा के ऊपर अगला टायर चढ़ गया। वह उछल कर दूर जा गिरी। उसका सिर चबूतरे से टकरा गया और सिर व मुंह से खून बहने लगा। स्तुति भी उठ नहीं पा रही थी। एक्सीडेंट के बाद पास के लोगों ने दोनों को एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गरिमा बोल नहीं पा रही थी। अस्पताल पहुंचते ही चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। स्तुति को चिरायु अस्पताल में भर्ती किया गया। उसकी हालत खतरे से बाहर है। दोनों छात्राएं कैलाशनगर में रहती हैं।
मेधावी छात्रा थी गरिमा
रिश्तेदारों के मुताबिक गरिमा नवनीध स्कूल की मेधावी छात्रा थी। क्लास टीचर हिमांशी लालवानी के मुताबिक गरिमा उत्साही और उर्जावान थी। उसे स्कूल में श्रद्धांजलि अर्पित की गई। पूज्य सिंधी पंचायत ने भी श्रद्धांजलि दी है। अंतिम संस्कार शाम को बैरागढ़ विश्रामघाट में किया गया।
प्रयत्क्षदर्शी बोले-बहुत तेज थी कार की रफ्तार
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कैलाशनगर जोड़ से सीटीओ की तरफ आते समय कार की गति इतनी तेज थी कि लोग हैरान रह गए। छात्राएं जब तक कुछ समझ पातीं कार उन्हें कुचल चुकी थी। कार कैलाशनगर निवासी इलेक्ट्रिक एवं म्युजिक सेंटर व्यवसाई कन्हैया देवानी चला रहा था। वह घर से शिव मंदिर गोल चक्रा स्थित अपनी दुकान की तरफ जा रहा था। एक्सीडेंट के बाद लोगों ने कन्हैया को पकड़कर जमकर पिटाई की और कार में तोड़फोड़ कर दी। पुलिस ने कन्हैया को गिरफ्तार कर कार जब्त कर ली है।कन्हैया ने माना कि कार मोड़ते समय स्पीड कम करने के लिए उसने ब्रेक के बजाय एक्सीलेटर दबा दिया, जब तक कुछ समझ में आता हादसा हो चुका था। बताया जाता है कि कन्हैया ने कार तीन दिन पहले ही खरीदी थी। उसे कार पूरी तरह कार चलाना भी नहीं आती। आरोपी के पास ड्राइविंग लाइसेंस है, लेकिन कार पर एल साइन लिखा है। यानि वह कार चलाना सीख रहा था।
शुक्र है कई छात्राएं नहीं पहुंची थीं बस स्टाप पर
गरिमा और स्तुति जिस दुकान के पास खड़ी थीं, वहां आमतौर पर 5 से 7 छात्राएं बस में चढ़ती हैं। गुरुवार को बाकी छात्राओं के आने से पहले ही दर्दनाक हादसा हो गया। यदि बाकी छात्राएं पहुंचती तो हादसा और भी भयानक हो सकता था। थाना प्रभारी सुधीर अरजरिया के अनुसार जांच की जा रही है कि आरोपी कार सीख रहा था कि उसे ड्राइविंग आती है। दुर्घटना के समय वह कार में अकेला ही था।
मुंबई और शिर्डी में नया साल मनाकर लौटा था परिवार
गरिमा की मौत से पूरा परिवार सदमे में है। गरिमा ने इस बार क्रिसमस की छुट्टियों में मुंबई और शिर्डी जाने की जिद की थी। पिता ने उसकी बात मान ली। दो-तीन दिन पहले ही परिवार छुट्टियां बिताकर लौटा था। लाड़ली बेटी की मौत की खबर मिलते ही मां मुस्कान गश खाकर गिर पड़ी। उधर छोटा भाई नक्ष बार-बार पूछ रहा था गुनगुन कहां है।बेटी गरिमा को मां ने गुरुवार को सुबह ही लंच बनाकर दिया था। आमतौर पर गरिमा बस स्टाप तक पहुंचने में लेट हो जाती थी, लेकिन गुरुवार को वह कड़ाके की सर्दी के बावजूद उठी और समय से पहले ही बस स्टाप पर पहुंच गई थी। लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था। नवनीध स्कूल के प्राचार्य मनीष जैन एवं गरिमा की क्लास टीचर हिमांशी लालवानी मुस्कान को सांत्वना देने पहुंचे तो वह बेसुध बैठी रही। वह बार-बार कहती रही कि मेरी बेटी आने ही वाली है।
दहाड़ मारकर रोई दादी और पिता
गरिमा की दादी ऊषा शिवदासानी पोती की मौत की खबर मिलते ही दहाड़ मार कर रोने लगी। बेटी का पार्थिव शरीर लेने चिरायु अस्पताल पहुंच पिता अनिल शिवदासानी का भी रो-रोकर बुरा हाल था। शिवदासानी घर में ही अकाउंटेंट के रूप में काम कर करते हैं। बेटी की मौत ने उन्हें झकझोर कर रख दिया है। पड़ोसी भी गरिमा की मौत से दुखी नजर आए।
मदर्स डे पर बनाया था ग्रीटिंग
गरिमा ने पिछले साल मदर्स डे पर मां मुस्कान के लिए अपने हाथ से ग्रीटिंग कार्ड बनाया था। स्कूल में आयोजित मां मेरी सबसे प्रिय सखी विषय पर हुए व्याख्यान में गरिमा ने मां को सरप्राइज के रूप में ग्रीटिंग कार्ड दिया था। परिवार के सदस्यों की खुशी के यह पल याद करते हुए आंखें नम हो उठीं।
गोद लेकर भाई की कमी पूरी की पर खुद चली गई
गरिमा अक्सर अपने मम्मी पापा से पूछती थी कि मेरा भाई क्यों नहीं है। रक्षाबंधन पर गरिमा को भाई की कमी अखरती थी। परिवार ने गरिमा के भाई की कमी पूरी करने के लिए तीन साल पहले रिश्तेदारी में ही एक बालक को गोद लिया था। उसका नाम नक्ष रखा था। गरिमा उसे प्यार से नकुल कहकर बुलाती थी। गरिमा चाहती थी कि नक्ष भी उसके साथ स्कूल चले। तीन साल के नक्ष का इसी साल प्ले स्कूल में एडमिशन कराया गया था। बहन की मौत की खबर से नक्ष भी दुखी नजर आया।






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