ग्वालियर। जम्मू-कश्मीर के पुंछ व राजौरी सेक्टर में रविवार को पाकिस्तानी सेना द्वारा शांतिकाल में की गई फायरिंग में शहीद हुए ग्वालियर के जवान रामअवतार लोधी की पार्थिव देह को पूरे सम्मान के साथ सोमवार शाम पैतृक गांव बरौआ लाया गया। यहां वंदे मातरम के जयघोष व पाक मुर्दाबाद के नारों के बीच 3 साल के बेटे दिव्यांश व छोटे भाई शंकर ने मुखाग्नि दी। मुखाग्नि के समय जवान के सम्मान में सेना के जवानों ने शस्त्र उलटे कर अंतिम सलामी दी और मातमी धुन बजाई। शहीद के अंतिम दर्शन के लिए आसपास के गांवों के हजारों लोगों को भीड़ उमड़ पड़ी। सबकी आंखें नम व पड़ोसी मुल्क पाक के खिलाफ चेहरे पर आक्रोश था। अंतिम संस्कार में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, साडा अध्यक्ष राकेश जादौन, जिला व पुलिस प्रशासन के अधिकारी मौजूद थे।
सेना के अधिकारी विमानतल से पार्थिव देह लेकर घर पहुंचे-विमानतल से सेना के अधिकारी शहीद जवान की पार्थिव देह को सेना के वाहन से पैतृक गांव बरौआ पहुंचे। पार्थिव देह घर पहुंचते ही महिलाओं का धैर्य टूट गया। शहीद की पत्नी रचना, मां, बहन व सास पार्थिव देह से लिपट गईं। ये दृश्य देखकर लोगों की आंखें नम हो गईं। मां व पत्नी ने प्यार से शहीद के चेहरे पर हाथ फेरा और अंतिम दर्शन किए।ड्रेस व राष्ट्रीय ध्वज सेना के अधिकारी ने शहीद की पत्नी को सौंपा-सेना के अधिकारियों ने सबसे पहले परम्परा के अनुसार शहीद जवान की संपूर्र्ण ड्रेस व जिस राष्ट्रीय ध्वज में जवान की पार्थिव देह लपेटकर लाए थे, उसे सम्मान सहित पत्नी रचना लोधी को सौंपा। उसके बाद अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू की गईं।केंद्रीय मंत्री ने दिया शहीद को कंधा-परिवार के लोगों के अलावा केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, साडा अध्यक्ष राकेश जादौन ने शहीद की अंतिम यात्रा में कंधा दिया। ग्रामीण पार्थिव देह के आगे ट्रॉली से फूल बरसाते हुए चल रहे थे।
मुखाग्नि के समय बिजली गुल हो गई-
मुखाग्नि के समय जिला प्रशासन द्वारा अंतिम संस्कार के लिए की गई व्यवस्थाएं फेल हो गईं। अचानक बिजली चले जाने के कारण वहां अंधेरा छा गया। लोग जहां थे वहीं खड़े रहे। करीब 5 मिनट बाद बिजली आ गई।





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