Press "Enter" to skip to content

दुर्भाग्यशाली योग जुड़ा है इनकी विधायक़ी के साथ

भोपाल।जी हाँ दोस्तो, हम बात कर  रहे है एक ऐसे विधायक की जो लगातार चार बार से विधानसभा चुनाव लड़ते आये और दो बार जीत का वरण भी किया पर जब भी विधायकी मिली तो विपक्ष में ही बैठना पड़ा , जबकि इन्होंने भाजपा और काँग्रेस दोनों ही दलों से विधायक़ी का स्वाद चख लिया है।
इस अजीब से दुर्योग के शिकार बने हैं शिवराज सरकार के विरुद्ध 2007 में काँग्रेस के टिकिट पर शिवपुरी उपचुनाव जीत कर पहली बार विधायक बने वीरेंद्र रघुवंशी । इनकी गिनती तात्कालिक रूप से पूर्व केंद्रीय मंत्री और काँग्रेस के कद्दावर क्षत्रपों में शुमार ज्योतिरादित्य सिंधिया के विश्वस्तों में  की जाती थी और इन्ही के आशीर्वाद से रघुवंशी ने 2007 में कई दिग्गजों को पछाड़कर टिकिट और असंभव विजयश्री का वरण किया और विपक्ष के तेजतर्रार विधायक की पहचान बनाई । गौरतलब है कि 2007 का यह पूरा चुनाव किसी व्यक्ति विशेष , पार्टी विशेष ना होकर  ज्योतिरादित्य सिंधिया विरुद्ध शिवराज सिंह चौहान हो गया था और इस चुनाव में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री समेत पूरा मंत्रिमंडल डला रहा और जीत के पूरे प्रयास किए लेकिन सफल नही हो पाए , इस प्रकार पहली बार वीरेंद्र रघुवंशी विधायक बने । इस समय भी सरकार भाजपा की थी विधायक तो बने मगर विपक्ष के ।

अब बात करते है 2008 के आम चुनाव की जिसमे इन्हें काँग्रेस से टिकट तो मिल गया और चुनाव भी लडे किन्तु मात्र 18 माह के अपने कार्यकाल में जनमानस के बीच लोकप्रियता खो बैठे और भाजपा के माखन लाल राठौर से परास्त हो गए , लेकिन यहाँ भी दुर्योग से इनको तो टिकट देनी वाली पार्टी काँग्रेस पुनः विपक्ष में बैठी ।
फिर आया साल 2013 का आम चुनाव इसमे भी काँग्रेस ने वीरेंद्र रघुवंशी पर तीसरी बार भी दांव खेला और टिकट दिया , लेकिन रघुवंशी की किस्मत ने फिर  साथ नही दिया और रघुवंशी भाजपा की कद्दावर नेत्री यशोधराराजे सिंधिया के विरुद्ध चारों खाने चित्त हुए और फिर वही रिकॉर्ड बरकरार रहा , कि वीरेंद्र को टिकट देने वाली कांग्रेस सत्ता से बाहर ।।

अब बात करते है आगे की लेकिन अब कहानी में ट्विस्ट आने वाला था । लगातार चुनाव हार रहे वीरेंद्र रघुवंशी ने पार्टी बदलने का बड़ा निर्णय लिया और कि चौकांने वाली बात यह रही कि उन्होंने चुनाव हारने के आरोप अपने राजनैतिक आका ज्योतिरादित्य सिंधिया पर मढ़ते हुए ना केवल  बीजेपी ज्वाइन कर ली बल्कि संगठन में बहुत कम समय मे बड़ा मुकाम हासिल भी किया । जिसकी वजह से 2018 में कोलारस उपचुनाव में  इन्होंने कोलारस से बीजेपी से टिकट की माँग की , लेकिन किस्मत ने साथ नही दिया और टिकट नही मिला और इन्होंने नाराज़गीवश उपचुनाव से थोड़ी दूरी  भी बना ली । इस उपचुनाव में भाजपा के हारे प्रत्याशी देवेंद्र जैन ने  रघुवंशी पर भीतरघात के गंभीर आरोप भी  पार्टी के वरिष्ठों के सामने लगाये।
फिर आये 2018 के आम चुनाव और इन्होंने वर्तमान मुख्यमंत्री को सभी बातों से समहत कर लिया था  ,परिणामस्वरूप इन्हें कोलारस से बीजेपी ने टिकट दिया और मात्र 720 मतों से जीत कर ये खरे भी उतरे पर एक बार भी वही पिछले तीन चुनावो वाले दुर्भाग्य ने पीछा नही छोड़ा और हो गया बीजेपी का ब्लैक आउट मतलब सत्ता से बाहर। वीरेंद्र रघुवंशी पुनः एक बार विपक्ष के विधायक के रूप में स्थापित हो गये। अब भविष्य में रघुवंशी अपने इस दुर्योग से पिंड छुड़ा पायेंगे या फिर शिकार होंगे ,यह भी गौरतलब मसला रहेगा।

More from Fast SamacharMore posts in Fast Samachar »

Be First to Comment

Leave a Reply

error: Content is protected !!