
ग्वालियर। कुपोषण से पीड़ित बच्चों के कारण जिले के एनआरसी फुल तो वहीं घर घर भी कुपोषण कम नहीं है। सोमवार को दस्तक अभियान टीम के सामने 12 माह की खुशी की हालत देखकर डॉक्टर व स्टाफ दंग रह गए।गृहणी अनीता की चौखट पर कुपोषण का यह रूप सिस्टम को शर्मसार कर रहा था। घर की लाड़ो की खुशियों में कुपोषण बाधा बन गया है।
सोमवार को कुपोषण से पीड़ित करीब दो दर्जन बच्चे जिला अस्पताल मुरार पहुंचे। जहां पर उन्हें भर्ती कर खून चढ़ाया गया। कई बच्चों की हालत इतनी गंभीर थी कि उन्हें देखकर चिकित्सकों का कहना था कि इन्हें खून की नहीं पौष्टिक खाने की जरुरत है। बच्चों की हालत को देख कर शासन की योजना किस तरह से दम तोड़ रहीं हैं यह साफ देखा जा सकता था। ऐसे कौन लोग हैं जो बच्चों के अहार से पोषण छीन रहे हैं। जिन शासन प्रशासन द्वारा सख्त कार्यवाई की जानी चाहिए।
22 बच्चों पर चढ़ा खून
सोमवार को दस्तक अभियान ने तेजी पकड़ी। जिले के हर गांव तक दस्तक अभियान की टीम पहुंची। हर घर की दहलीज पर टीम ने पहुंचकर उस घर के बच्चों की स्क्रीनिंग की। जिन बच्चों को पोषण अहार की आवश्यकता महसूस हुई उन्हें समूह से दिलाया गया। जिन बच्चों को मामूली बीमारी निकली उन्हें वहीं पर इलाज दिया। पर जो गंभीर स्र्प से बीमार थे उन्हें जिला अस्पताल व एनआरसी भेजा गया। जिला अस्पताल मुरार में 22 बच्चे पहुंचे । खून की कमी की पूर्ति करने के लिए उन पर ब्लड चढ़ाया गया।
प्रथम स्थान पर लाने गांव-गांव हो रहा भ्रमण
दस्तक अभियान में शहर का प्रथम स्थान दिलाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। कलेक्टर के सख्त निर्देश है कि दस्तक अभियान की टीम हर घर तक पहुंचे और हर बच्चे की स्क्रीनिंग करे। सीएमएचओ मृदुल सक्सेना ने बताया कि सोमवार को 22 बच्चों को जिला अस्पताल में खून चढ़ाया और घाटीगांव क्षेत्र से भी कुछ बच्चे एनआरसी पहुंचाया गया।
एनआरसी: 12 बच्चे भर्ती, 33 हुई संख्या
थाटीपुर स्थित एनआरसी में सोमवार को 12 कुपोषित बच्चे भर्ती कराए गए। अब एनआरसी में भर्ती बच्चों की संख्या 33 हो गई है, जिस कारण रूम के बाहर भी पलंग डालने पड़ गए। अंदर बाहर कुपोषित बच्चों से सेंटर फुल हो गया है। पहले ही एनआरसी में स्टाफ तक के पलंग बच्चों के लिए डालने पड़ गए थे अब और हाल बेहाल हो गया है। भीषण उमस-गर्मी में बच्चों का बुरा हाल हो रहा है।





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