Press "Enter" to skip to content

नैनो सैटेलाइट सिग्नल के लिए तैयार हुई इंदौर में लैब ! Indore News

SGSITS Indore : नैनो सैटेलाइट सिग्नल के लिए तैयार हुई इंदौर में लैब
 इंदौर। इसरो की मदद से शहर का ऑटोनॉमस संस्थान गोविंदराम सेकसरिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (एसजीएसआईटीएस) भी नैनो सैटेलाइट भेजेगा। इसकी तैयारियां जारी हैं। सैटेलाइट भेजने के लिए दो लैब का काम पूर्ण हो चुका है। इसमें पहली लैब 42 हजार किलोमीटर पर स्थापित होने वाले सैटेलाइट को सिग्नल भेजने और रिसीव करने का काम करेगी। सैटेलाइट एंटिना सिग्नल लैब सेंट्रल इंडिया की पहली लैब होगी, जो शहर में स्थापित हुई है। 5जी टेक्नोलॉजी के सिग्नल भी इससे चेक किए जा सकेंगे। दूसरी लैब अर्थ स्टेशन के लिए बनाई गई है। इसका नाम सेंटर फॉर रिमोट सेंसिंग दिया गया है। इसमें सैटेलाइट के लिए सेंसर तैयार होंगे।
सैटेलाइट बना चुकी बेंगुलरु की यूनिवर्सिटी करेगी मेंटरिंग

एमएचआरडी के वर्ल्ड बैंक के तहत नैनो सैटेलाइट प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। इसमें करीब पांच करोड़ की लागत आएगी। इसमें दो करोड़ रुपए अर्थ स्टेशन में लगेंगे। सैटेलाइट को स्थापित करने का काम इसरो करेगा और कंट्रोलिंग संस्थान में बनाए जाने वाले अर्थ स्टेशन से होगी। स्टेशन और सैटेलाइट बनाने के लिए बेंगलुरु की पीईएस यूनिवर्सिटी से समझौता किया है। यह यूनिवर्सिटी सैटेलाइट बना चुकी है और इससे संबंधित सभी तरह की जानकारियां संस्थान को देगी और मेंटरिंग करेगी
सैटेलाइट से होंगे ये फायदे
संस्थान के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग के एसोसिएट प्रो.डॉ. एसके जैन इस प्रोजेक्ट की टीम में शामिल हैं। उन्होंने बताया नैनो सैटेलाइट तीन तरह की समस्याओं को दूर करेगा। इससे किस क्षेत्र में कितना प्रदूषण है, यह पता किया जा सकेगा। यह ट्रैफिक समस्या को दूर करने में भी यह सहायक होगा। सड़कों पर मौजूद वाहनों की संख्या के हिसाब से ट्रैफिक सिग्नल का टाइम सेट किया जा सकेगा। इससे नर्मदा नदी के आसपास के पेड़-पौधों की मॉनिटरिंग की जा सकेगी। सैटेलाइट के लिए फंडिंग तीन तरह से जुटाई जा रही है। वर्ल्ड बैंक, सरकार और संस्थान के पूर्व छात्र राशि देंगे। सैटेलाइट भेजने के लिए दो साल का समय तय किया गया है

चंद्रयान- 2 पर स्टडी करेगा संस्थान
संस्थान के डायरेक्टर डॉ. राकेश सक्सेना का कहना है कि चंद्रयान-2 बनाने और इसकी तैयारियों पर संस्थान के प्रोफेसर की विशेष नजर थी। संस्थान के प्रोफेसर इसरो के साइंटिस्ट से लगातार कनेक्ट रहते हैं। चंद्रयान-2 सफलापूर्वक लांच होने के बाद इसे भेजने की पूरी योजना पर संस्थान छात्रों के साथ स्टडी करेगा।
More from Fast SamacharMore posts in Fast Samachar »

Be First to Comment

Leave a Reply

error: Content is protected !!