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जान से खिलवाड़… बिना लोड टेस्टिंग के ट्रैफिक के लिए खोला ब्रिज, दीवारें धंसी तो कंपनी बोली- अभी सिर्फ ट्रायल ! Bhopal News

bridge opened for traffic without load testing, the wall shook the walls, the company quote - just now the trial

  • ब्रिज से हर घंटे गुजरते थे 6 हजार वाहन, अब निकलने के लिए दोनों ओर सिर्फ 4-4 मीटर सड़क, 3 माह रहेगी ट्रैफिक जाम की स्थिति
  • एयरपोर्ट रोड पर दाता कॉलोनी का ब्रिज दरका

भोपाल . एयरपोर्ट रोड पर दाता कॉलोनी आेवर ब्रिज धंसकने में निर्माण एजेंसी और कंस्ट्रक्शन कंपनी की बड़ी लापरवाही सामने आई है। दिल्ली की कंस्ट्रक्शन कंपनी सेंट्रोडोरस्ट्रॉय (सीडीएस) ने बिना लोड टेस्टिंग के अपने स्तर पर ही ब्रिज को ट्रैफिक के लिए खोल दिया था। नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अफसरों ने जानकारी होने के बावजूद भी आम राहगीरों की जान से खिलवाड़ होने दिया। गनीमत रही कि बड़ा हादसा होने के पहले यह गड़बड़ी सामने आ गई। अब एनएचएआई के अफसर तर्क दे रहे हैं कि कंपनी की जल्दबाजी में यह गड़बड़ी हुई है।
उधर, ब्रिज धंसकने के बाद कलेक्टर ने कहा है कि कंपनी ब्रिज के इस पूरे हिस्से का नए सिरे से काम करेगी। टेस्टिंग के बाद ही यहां ट्रैफिक शुरू होगा। ब्रिज को धंसकने से बचाने के लिए आनन-फानन में बुधवार को ब्रिज के नीचे सड़क के दोनों ओर बेरिकेडिंग कर दी गई है। ताकि वाहनों के वाइब्रेशन से ब्रिज को नुकसान न हो। ट्रैफिक के लिए सिर्फ 4 मीटर की सिंगल लेन है। ऐसे में ट्रैफिक जाम होना तय है। इसका कोई वैकल्पिक मार्ग भी नहीं। 
221 कराेड़ है प्रोजेक्ट की लागत, 5 ब्रिज बनना हैं
  • 8 किमी लंबाई, लाल घाटी चाैराहे से मुबारकपुर जाेड़ तक बनेंगे ब्रिज।
  • 12 कराेड़ रुपए की लागत से बना है दाता कॉलोनी ब्रिज।
  • 30 मीटर चौड़ा है ब्रिज, नवंबर 2019 है पूरे प्रोजेक्ट की डेडलाइन।
ब्रिज शुरू होने तक रोज दो लाख लोग परेशान होंगे : व्यस्त दिन में हर घंटे गुजरने वाले 6 हजार वाहनों के अलावा दाता कॉलोनी, इंद्रा विहार कॉलोनी, पंचवटी, सुविधा विहार सहित 20 से ज्यादा कॉलोनियां, गांधी नगर क्षेत्र, हज हाउस, एयरपोर्ट, आरजीपीवी, जेल, द्रोणांचल आने-जाने वाले दो लाख से ज्यादा लोग रोज ट्रैफिक जाम में फंसेंगे। सीडीएस कंपनी का कहना है कि ब्रिज हमने सरकार को हैंडओवर नहीं किया है। बारिश के बाद रिपेयर का काम शुरू करेंगे।
इस नियम का सहारा लेकर लोड टेस्टिंग से बच जाते हैं कॉन्ट्रैक्टर : सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के कोड के मुताबिक 15 मी. से कम स्पॉन के लिए लोड टेस्टिंग जरूरी नहीं है। कंपनी का तर्क है कि इस ब्रिज का स्पॉन 15 मी. है, इसलिए टेस्टिंग नहीं की। 
  •  जिस ब्रिज से राज्यपाल, मुख्यमंत्री और अन्य वीआईपी गुजर रहे हैं, उसकी टेस्टिंग में चूक कैसे?
  •  एजेंसी को वर्क कंप्लीशन का सर्टिफिकेट नहीं मिला तो ब्रिज पर ट्रैफिक कैसे शुरू हो गया? 
  •  जब साबित हो चुका है कि गुणवत्ता खराब होने के कारण ब्रिज की दीवारें दरक रही हैं तो फिर इसकी जांच शुरू क्यों नहीं की गई?
  •  क्या 15 मीटर से कम लंबाई के ब्रिज से वाहनों के गुजरने पर खतरा नहीं रहता है?
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