ग्वालियर। बेलगढ़ा थाने में मारपीट के आरोपी किसान की मौत के मामले की जांच एसडीओपी करेरा करेंगे। सोमवार को इस संबंध में आदेश जारी हो गए और केस डायरी भी एसडीओपी के पास पहुंच गई। एसडीओपी मंगलवार को इस मामले में घटनास्थल का जायजा लेने के लिए थाने जाएंगे। साथ ही उन पुलिसकर्मियों के भी बयान होंगे, जिन पर हत्या का मामला दर्ज किया गया है।
शनिवार को बेलगढ़ा इलाके के बाजना गांव में सुरेश रावत का झगड़ा खेमू शाक्य से हो गया था। इस मामले में खेमू की शिकायत पर बेलगढ़ा पुलिस ने सुरेश पर एफआईआर दर्ज की और उसे हिरासत में ले लिया। उसे पुलिसकर्मियों ने लॉकअप के बाहर बैठा रखा था। इसी दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों ने पुलिसकर्मियों पर हत्या का आरोप लगाकर चक्काजाम किया था। शनिवार-रविवार की रात 2.30 बजे भितरवार थाने में एएसआई विजय राजपूत, हवलदार अरुण मिश्रा, सिपाही नीरज प्रजापति, विजय सिंह, धर्मेन्द्र सिंह और सैनिक अहसान उर्फ चच्चा पर हत्या का मामला दर्ज किया गया। आईजी राजाबाबू सिंह ने सोमवार को इस मामले की जांच एसडीओपी आत्माराम शर्मा को सौंपी।
सोमवार को वह सीसीटीवी फुटेज भी निकाले गए, जिसमें किसान फांसी लगाता दिख रहा है। जिन 5 पुलिसकर्मियों को एसपी नवनीत भसीन ने निलंबित किया था, उनकी जगह 5 पुलिसकर्मी सोमवार को बेलगढ़ा थाने में पदस्थ कर दिए गए।
यह रही पुलिस की चूक, इसलिए बढ़ा हंगामा
- इस मामले में मौजूदा स्टाफ की सबसे बड़ी चूक रही कि उसे थाने के लॉकअप में बंद किया जाना था, लेकिन लॉकअप के बाहर बैठा दिया। किसी को भी हिरासत में लेने पर उसका बेल्ड, गमछा या ऐसी कोई भी वस्तु आरोपी के पास से हटा दी जाती है, जिससे वह किसी भी घटना को अंजाम दे सके या खुद को नुकसान पहुंचा सके। उसके गले में गमछा डला रहा, लेकिन स्टाफ ने उसे तक नहीं हटाया।
- जैसा कि पुलिस अधिकारियों का दावा है कि वह सीसीटीवी फुटेज में फांसी लगाता दिख रहा है। अगर ऐसा था तो पुलिसकर्मी उसे अस्पताल क्यों ले गए? फोरेंसिक एक्सपर्ट को बुलाकर जांच कराई जाती, जिससे स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाती। जबकि पुलिस हिरासत में जब भी किसी की मौत होती है तो सबसे पहले घटनास्थल पर एफएसएल टीम जांच करती है।
- थाने में ही मृतक के फिंगरप्रिंट, हैंड वॉश होते।
- पुलिसकर्मी उसे अस्पताल ले भी गए थे तो परिजनों के आने के बाद भागे क्यों? इन परिस्थितियों ने मामले को संदिग्ध बना दिया।





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