मेरी बेटी मेरा अभिमान, मेरी बेटी मेरी शान है
कहकर हमेशा दुलारा तुझे, फिर क्यूं तूने रुलाया मुझे।
मेरी नन्ही परी सी थी तू, जब इस दुनिया में आई थी
मेरे हाथों की लकीरों में तूने अपनी जगह बनाई थी।
तेरी छोटी छोटी खुशियों को खुद से ज्यादा चाहा मैंने,
मेरी प्यारी गुड़िया रानी, फिर क्यूं तूने रुलाया मुझे।
अपने पापा का गुरूर थी तू, मां की आंखों का नूर थी तू
अपने परिवार के संस्कारों का जीता जागता सबूत थी तू।
दो दिन के झुटे प्यार के लिए, क्यूं हम सबको ठुकराया है,
इस भड़कीली आंधी में तूने क्यूं खुद को बहकाया है।
पूरे समाज के विरूद्ध जा, तेरे सपनों से मिलवाया तुझे,
मेरी प्यारी बिटिया रानी,फिर क्यूं तूने रुलाया मुझे
हर्षिता जैन






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