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अगर लड़का होता तो थप्पड़ जड़ देता, जनपद CEO पर महिला कर्मचारी का लैंगिक भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न का आरोप @प्रिंस प्रजापति

जनपद सीईओ पर महिला कर्मचारी का लैंगिक भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न का आरोप

प्रिंस प्रजापति शिवपुरी। जिले के सरकारी कार्यालयों में आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) के अभाव और कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ कथित भेदभाव का मामला सामने आया है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत पिछोर जनपद में पदस्थ सहायक लेखा अधिकारी वीणा मजेजी ने जिला पंचायत सीईओ को पत्र लिखकर जनपद सीईओ नरेंद्र सिंह नरवरिया पर मानसिक उत्पीड़न, लैंगिक भेदभाव और शारीरिक हिंसा की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला कर्मचारी का कहना है कि कार्यालय में तानाशाही जैसा माहौल है और वे लगातार दबाव में काम करने को मजबूर हैं।
शिकायती पत्र के अनुसार, 20 फरवरी की शाम उन्हें जनपद सीईओ के कक्ष में बुलाया गया, जहां कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया। महिला कर्मचारी ने आरोप लगाया कि उनसे कहा गया कि अगर आप महिला नहीं होतीं और कोई लड़का होता, तो मैं उसे एक थप्पड़ जड़ देता। आप महिला होने का फायदा उठा रही हो। एक जिम्मेदार प्रशासनिक पद पर बैठे अधिकारी द्वारा इस प्रकार की टिप्पणी को लेकर कार्यालयीन कार्यसंस्कृति पर सवाल खड़े हो गए हैं।
छह महीने से वेतन बंद, आर्थिक संकट गहराया
वीणा मजेजी ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्हें पिछले छह महीनों से वेतन नहीं मिला है। आर्थिक स्थिति बिगड़ने के कारण वे अपनी 12वीं कक्षा में पढ़ रही बेटी की ट्यूशन फीस तक नहीं भर पा रही हैं और किराए का मकान खाली करने की नौबत आ गई है। उनका कहना है कि बिना वेतन के लगातार काम करने का दबाव डाला जा रहा है, जिससे मानसिक तनाव और बढ़ गया है।
ऑनलाइन बैठकों में अपमान और कार्य का अतिरिक्त दबाव
शिकायत में उल्लेख है कि प्रतिदिन सुबह 7 से 9 बजे तक गूगल मीट के माध्यम से लगभग 120 लोगों के सामने लक्ष्य और नियमों को लेकर कथित रूप से अपमानित किया जाता है। वित्तीय स्वीकृति (एसएनए पोर्टल) का कार्य, जो आहरण एवं संवितरण अधिकारी स्तर का है, बिना प्रशिक्षण के उनसे कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हाल ही में दुर्घटना का शिकार होने के बावजूद उन्होंने पोर्टल का कार्य जारी रखा, लेकिन उन्हें कोई सहानुभूति नहीं मिली। कार्यालय से निकलते समय भी अनुमति को लेकर सवाल-जवाब कर दबाव बनाया जाता है।
महिला कर्मचारी ने यह भी आरोप लगाया कि कार्यालय में आंतरिक शिकायत समिति तक गठित नहीं है, जिससे महिलाएं औपचारिक रूप से अपनी शिकायत दर्ज नहीं कर पा रहीं। उन्होंने दावा किया कि इससे पहले भी एक महिला कार्यक्रम अधिकारी को इसी तरह प्रताड़ना झेलनी पड़ी थी, जिसके बाद उन्होंने जिले में संबद्धता ले ली।

प्रकरण संज्ञान में है : जिला पंचायत सीईओ
इस पूरे मामले में जिला पंचायत सीईओ विजय राज ने कहा कि महिला कर्मचारी ने औपचारिक शिकायत नहीं, बल्कि अपनी समस्या से अवगत कराया है। उन्होंने कहा कि प्रकरण संज्ञान में आया है और नियमानुसार जो भी कार्रवाई होगी, की जाएगी। मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

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